
Chandranath Rath Murder Case: पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ की हत्या का मामला अब इंटरस्टेट गैंग और डिजिटल फुटप्रिंट्स की वजह से सुलझने की राह पर है। 6 मई की रात माध्यमग्राम में हुई इस हत्या में बंगाल पुलिस ने UPI टोल पेमेंट को ब्रेकथ्रू माना है। SIT की जांच में अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कुल आठ लोगों के शामिल होने का अनुमान है।
भारतीय वायुसेना के पूर्व कर्मी और सुवेंदु अधिकारी के पर्सनल असिस्टेंट चंद्रनाथ रथ अपने घर के पास माध्यमग्राम के दोहरिया इलाके में गोली मारकर मारे गए। हमलावरों ने मिलिट्री स्टाइल में प्लानिंग की। CCTV फुटेज और तकनीकी निगरानी के मुताबिक, रथ की एसयूवी को फेक नंबर प्लेट वाली सिल्वर हैचबैक ने रोका, फिर मोटरसाइकिल पर सवार हमलावरों ने करीबी फायरिंग की। हमले के बाद गाड़ियां कोलकाता एयरपोर्ट और बारासात के पास छोड़ दी गईं।
पुलिस के अनुसार, हत्या से ठीक पहले निवेदिता सेतु पर बाल्ली टोल प्लाजा पर संदिग्ध गेटअवे कार से एक UPI ट्रांजेक्शन हुआ। कैश या फास्टैग की बजाय मोबाइल पेमेंट करने की वजह से पुलिस को मोबाइल नंबर और आरोपी की पहचान आसानी से मिल गई। इस डिजिटल क्लू ने UP, बिहार, झारखंड और ओडिशा तक जांच का रास्ता खोला। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह ब्रेकथ्रू था। बाहर से आए हमलावरों की पहचान UPI ट्रेल से हुई।
एसआईडी ने बिहार के बक्सर से मयंक राज मिश्रा और विक्की मौर्य तथा अयोध्या (यूपी) से राज सिंह को गिरफ्तार किया। राज सिंह बलिया का रहने वाला है और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से जुड़ा माना जा रहा है। पुलिस का दावा है कि इनमें से एक शार्पशूटर है। गाड़ी झारखंड से आई थी और फेक प्लेट्स का इस्तेमाल किया गया।
सुवेंदु अधिकारी ने इसे प्रीमेडिटेड मर्डर बताया और कहा कि उनके करीबी होने की वजह से रथ को निशाना बनाया गया। रेकी कई दिनों से चल रही थी। TMC ने CBI जांच की मांग की है, जबकि कांग्रेस ने भी स्वतंत्र जांच चाही। SIT अब रेकी, शेल्टर, हथियार सप्लाई और पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। कई छापेमारी जारी हैं। पुलिस का कहना है कि डिजिटल फुटप्रिंट्स, CCTV और इंटरस्टेट कोऑर्डिनेशन से बाकी आरोपियों तक जल्द पहुंचा जाएगा।