Critical Minerals Agreement: भारत और अमेरिका जल्द ही क्रिटिकल मिनरल्स पर बड़ी डील करेंगे। US राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखला में सहयोग ऐतिहासिक ऊंचाइयों पर पहुंच सकता है।
US Ambassador to India Sergio Gor on critical minerals agreements: भारत और अमेरिका के बीच क्रिटिकल मिनरल्स पर जल्द एक बड़ी डील होगी। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में कहा, 'मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हम उन्नत विनिर्माण, ऊर्जा प्रणालियों और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए आवश्यक आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने वाले महत्वपूर्ण खनिज समझौतों को अंतिम रूप देने के बहुत करीब पहुंच गए हैं। अगले कुछ महीनों में, हम एक बड़ी घोषणा की उम्मीद करते हैं।'
गोर ने आगे जोर देकर कहा कि वाशिंगटन-नई दिल्ली संबंध ऐतिहासिक ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं। उन्होंने साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए हाल की महत्वपूर्ण उपलब्धियों, जैसे कि अमेरिका-भारत अंतरिम व्यापार डील, का उल्लेख किया।
सर्जियो गोर ने कहा कि कुछ महीनों में दोनों देशों ने वास्तविक परिणाम दिए होंगे, जो इस बात को दर्शाएंगे कि सरकारें अवसर को प्रत्यक्ष परिणाम में बदलने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति रखती हैं।
उन्होंने कहा, 'हम कुछ अलग देख रहे हैं। विफलताओं की बजाय, हम सफलताओं को देख रहे हैं। हमने पहले ही सफलताओं की एक उल्लेखनीय श्रृंखला देखी है, जो यूएस-भारत साझेदारी की ताकत और गति को दर्शाती है। दोनों देशों के संबंधों में वह क्षमता है कि यह ऐतिहासिक ऊंचाइयों तक पहुंच सके और ऐसे परिणाम दे सके, जैसा हमने पहले कभी नहीं देखा।'
गोर ने हाल की सफलताओं को और विस्तार से बताते हुए कहा, 'पहली, व्यापार में सफलता। दूसरी, विश्वास और प्रौद्योगिकी में सफलता। और तीसरी, रणनीतिक समन्वय में सफलता। ये सभी दर्शाते हैं कि यूएस-भारत साझेदारी किस दिशा में जा रही है।'
भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते पर गोर ने कहा, 'हमारी अर्थव्यवस्था के पैमाने, हमारे लोगों की प्रतिभा और दोनों समाजों में उद्यमशील ऊर्जा संभावनाओं को स्पष्ट रूप से दिखाती है। जो आवश्यक था, वह था गति और राजनीतिक इच्छा, ताकि अवसर को प्रत्यक्ष परिणाम में बदला जा सके। आज हम इस क्षमता को खोलना शुरू कर रहे हैं। यह साझेदारी केवल शुल्क और बाजार पहुंच के बारे में नहीं है, बल्कि उन संसाधनों और आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने के बारे में भी है, जो भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था को परिभाषित करेंगी।'