US-Iran Tensions: परमाणु को लेकर जारी वार्ता के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को “खतरनाक” बताया और कहा कि अमेरिका को बड़ा फैसला लेना है। जानें बातचीत और बढ़ते तनाव पर क्या बोले अमेरिकी राष्ट्रपति।
US President Donald Trump on Iran: ईरान और अमेरिका के बीच तीसरे दौर की वार्ता गुरुवार को जिनेवा में हुई, जबकि आज एक और दौर की बातचीत प्रस्तावित है। इससे पहले शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान को “बहुत मुश्किल” और “बहुत खतरनाक” बताया और कहा कि परमाणु वार्ता को लेकर अमेरिका अपने अगले कदम पर विचार कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी जोर दिया कि वे सैन्य तनाव के बीच भी शांतिपूर्ण समाधान को प्राथमिकता देना चाहते हैं।
टेक्सास में एक सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “हमें एक बड़ा फैसला लेना है। आप जानते हैं, यह आसान नहीं है। हमें बहुत बड़ा निर्णय लेना है। हमारे सामने एक ऐसा देश है, जो 47 वर्षों से लोगों के हाथ-पैर और चेहरे उड़ा रहा है। वे जहाजों को निशाना बना रहे हैं, लोगों को मार रहे हैं, सिर्फ अमेरिकियों को ही नहीं, बल्कि कई अन्य लोगों को भी।” ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत में अमेरिका के सामने बड़ा फैसला है और कोई भी समझौता अर्थपूर्ण होना चाहिए।
उन्होंने कहा, “जैसा कि आप जानते हैं, हमने उन खूबसूरत B-2 बमवर्षकों से उन पर जोरदार प्रहार किया और हाल ही में उनकी परमाणु क्षमता को खत्म कर दिया। लेकिन मैं इसे शांतिपूर्ण तरीके से करना पसंद करूंगा। वे बहुत मुश्किल लोग हैं। मैं आपको बताना चाहता हूं कि वे बहुत खतरनाक लोग हैं, बहुत कठिन लोग।”
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की स्थिति पर कहा कि हालात बेहद खराब रहे हैं। पिछले दो से तीन महीनों में 32,000 लोग मारे गए हैं। वे समझौता करना चाहते हैं, लेकिन समझौता ऐसा होना चाहिए जो सार्थक हो। वार्ता का यह ताजा दौर तेहरान और वाशिंगटन के बीच तनाव कम करने के कूटनीतिक प्रयासों के बीच हो रहा है। इसके साथ ही मध्य-पूर्व में अमेरिका की बड़ी सैन्य तैनाती भी पृष्ठभूमि में है। संभावित अमेरिकी हमलों की आशंका के चलते कई देशों ने अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह दी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इससे पहले कहा था कि वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के तरीके से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने दोहराते हुए कहा, “ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। हमने अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है। हम उनकी बातचीत के तरीके से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं। वे हमें वह देने के लिए तैयार नहीं हैं, जो हमें चाहिए। देखेंगे क्या होता है।”