
Raw Material costlier in Indian Pharma Industries: ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले का असर अब दुनिया भर के देशों पर दिखाई देने लगा है। एक तरफ पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देश ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं, वहीं भारत भी इससे अछूता नहीं है। हालांकि भारत के सामने तेल और गैस की किल्लत के अलावा एक और संकट दस्तक दे रहा है। दरअसल, इस जंग का असर अब भारतीय दवा उद्योग पर भी पड़ने लगा है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के कारण भारतीय फार्मास्यूटिकल सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ रहा है। इसके चलते दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है। फार्मास्यूटिकल उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि युद्ध की वजह से की स्टार्टिंग मैटेरियल (KSM) और एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट (API) की कीमतें बढ़ने लगी हैं।
KSM और API दवाएं बनाने के लिए बेहद जरूरी घटक होते हैं। डॉलर में उतार-चढ़ाव, वैश्विक तनाव और आपूर्ति में आ रही दिक्कतों के कारण इनकी कीमतों में उछाल आया है। रिपोर्ट में संबंधित अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर जंग लंबी चली तो इन महत्वपूर्ण कच्चे माल की कमी हो सकती है, क्योंकि कई ट्रेडर नए ऑर्डर लेने से बच रहे हैं।
फार्मास्यूटिकल उद्योग में अधिकांश दवाओं का व्यापार डॉलर में होता है। युद्ध की स्थिति के बीच डॉलर के मजबूत होने से आयात की लागत बढ़ जाती है। एक और कारण सॉल्वैंट्स (विलायक) की कीमतों में बढ़ोतरी है। पिछले कुछ दिनों में सॉल्वैंट्स की कीमतों में 20–25 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
इसके अलावा लॉजिस्टिक्स से जुड़ी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। सुरक्षा चिंताओं और प्रमुख समुद्री मार्गों के प्रभावित होने से कंटेनरों-जहाजों की आवाजाही में देरी हो रही है या वे रास्ते में फंसे हुए हैं। इसका सीधा असर कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में दिखाई दे रहा है।