
VB-G RAM G Scheme: केंद्र सरकार की प्रस्तावित ग्रामीण रोजगार योजना विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जीरामजी) लागू होने से पहले ही कई राज्यों ने इसके प्रमुख प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता चक्रधर बुद्धा को आरटीआइ के तहत मिली जानकारी के अनुसार 13 राज्यों ने 60:40 केंद्र-राज्य फंडिंग व्यवस्था, मजदूरी दर, कृषि सीजन में प्रस्तावित 60 दिन के गैर-कार्यकाल (ब्लैकआउट पीरियड) और लंबित भुगतानों को लेकर केंद्र को सुझाव और आपत्तियां भेजी हैं। सबसे अधिक आपत्ति प्रस्तावित फंडिंग मॉडल पर सामने आई है। अहम बात यह है कि भाजपा शासित बिहार और मध्यप्रदेश ने भी इसकी समीक्षा की मांग की है, जबकि झारखंड ने 40 फीसदी राज्य अंश वहन करने में कठिनाई जताई है। उत्तराखंड ने मजदूरी मद का पूरा खर्च केंद्र से देने और सिक्किम ने लागत साझेदारी पर पुनर्विचार का सुझाव दिया है।
आरटीआइ दस्तावेज के अनुसार बिहार ने दैनिक मजदूरी 255 से बढ़ाकर 413 रुपए और जम्मू-कश्मीर ने 272 से 311 रुपए करने का प्रस्ताव दिया है। झारखंड, पंजाब और उत्तराखंड ने भी स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप मजदूरी बढ़ाने की मांग की है। वहीं झारखंड, पंजाब, कर्नाटक और तेलंगाना ने 60 दिन के गैर-कार्यकाल पर पुनर्विचार का आग्रह किया है। लगभग सभी राज्यों ने मनरेगा के तहत मजदूरी, सामग्री और प्रशासनिक मद के लंबित भुगतान समय पर जारी करने की मांग भी उठाई है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि वीबी-जीरामजी योजना को राज्यों और संबंधित पक्षों से पर्याप्त परामर्श किए बिना आगे बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि इस योजना को लेकर केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि भाजपा शासित कई राज्य भी अपनी आपत्तियां जता रहे हैं। उनके अनुसार मध्यप्रदेश, बिहार और उत्तराखंड ने अतिरिक्त वित्तीय बोझ, ब्लैकआउट अवधि और योजना के अन्य प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं। जयराम रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान का गृह राज्य मध्यप्रदेश भी इस योजना के वित्तीय ढांचे पर पुनर्विचार की मांग कर रहा है। उन्होंने इसे इस बात का संकेत बताया कि योजना के कई पहलुओं को लेकर राज्यों के बीच असहमति और चिंताएं बनी हुई हैं।