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काउंटिंग से पहले कई पार्टियों की ‘धड़कनें’ तेज, बंगाल-तमिलनाडु समेत पांच प्रदेशों में वोटों की गिनती आज

Assembly Election Counting Day: सुबह आठ बजे से वोटाें की गिनती शुरू होगी और दोपहर तक परिणामों की तस्वीर साफ होगी। लेकिन मतगणना से पहले सियासी दलों और उनके नेताओं की ‘धडक़नें’ तेज हो गई हैं।

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May 04, 2026
पांच प्रदेशों के फैसले का दिन: दलों की ‘धड़कनें’ तेज (इमेज सोर्स: पत्रिका)

Assembly Election Results 2026: पांच प्रदेशों, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुदुचेरी के विधानसभा चुनावों के नतीजे सोमवार को सामने आएंगे। सुबह आठ बजे से वोटाें की गिनती शुरू होगी और दोपहर तक परिणामों की तस्वीर साफ होगी। चुनाव में लोगों की रेकॉर्डतोड़ भागीदारी के बाद होने वाली मतगणना के लिए चुनाव आयोग ने पुख्ता व्यवस्था व सुरक्षा इंतजाम किए हैं। मतगणना से पहले सियासी दलों और उनके नेताओं की ‘धडक़नें’ तेज हो गई हैं। ये नतीजे सिर्फ राज्यों की सरकारें नहीं बनाएंगे बल्कि पश्चिम बंगाल व तमिलनाडु के परिणाम देश की आगे की राजनीतिक तस्वीर व दिशा तय करेंगे।

बंगाल चुनाव पर लोगों की खास नजर है। भाजपा ने बंगाल में पूरा जोर लगाया है जिसके नतीजों से पार्टी व नेतृत्व की अथॉरिट पर असर होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के कई चुनावी दौरे किए और गृह मंत्री अमित शाह ने वहां पड़ाव ही डाल दिया था। यदि ममता बनर्जी चौथी बार चुनाव जीतती हैं तो विपक्षी इंडिया गठबंधन की राजनीति में उनका दबदबा बढ़ेगा जो कांग्रेस के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। तमिलनाडु में सीएम स्टालिन की डीएमके की वापसी उन्हें विपक्ष का बड़ा नेता बनाएगी वहीं दमदार तरीके से राजनीतिक अखाड़े में उतरे अभिनेता विजय की टीवीके का प्रदर्शन राज्य की राजनीति में बरसों बाद उभरे तीसरे दल का भविष्य तय करेगा। इस चुनाव के परिणाम तय करेंगे कि पश्चिम बंगाल के बाद केरल में वामपंथियों का अंतिम गढ़ बचेगा या नहीं। कांग्रेस के लिए इस चुनाव में केरल व असम में ही उम्मीदें हैं जहां वह मुख्य मुकाबले में है। तमिलनाडु में वह डीएमके के साथ गठबंधन में है वहीं बंगाल में अकेले लड़कर उसके लिए खाता खोलने की चुनौती है।

नतीजे राज्य के, असर देश पर...

पश्चिम बंगाल: ममता बनर्जी पर रेफरेंडम

टीएमसी: जीती तो ममता बनर्जी का राष्ट्रीय व विपक्ष की राजनीति में कद बढ़ेगा, हारने पर राजनीतिक व कानूनी चुनौतियां बढ़ेंगी।

    भाजपा: जीती तो बंगाल में स्थायी विकल्प उभरेगा, राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती। हारे तो अथॉरिटी कमजोर, विपक्ष मजबूत व आक्रामक होगा।

    तमिलनाडु: स्टालिन की परीक्षा, विजय फैक्टर पर नजर

    डीएमके-कांग्रेस: पार्टी जीती तो स्टालिन और मजबूत होंगे, विपक्ष की केंद्रीय राजनीति में भूमिका बढ़ेगी। कांग्रेस चाहेगी सत्ता में भागीदारी, हारे तो टीवीके का प्रभाव रोकना मुश्किल

      एआइएडीएमके-भाजपा: जीते तो टुकड़ों में बंटी जयललिता की विरासत एकजुट होगी, भाजपा की दक्षिण में बड़ी एंट्री से लाभ। हारे तो एआइएडीएमके का अस्तित्व खतरे में, भाजपा को बनानी होगी नई रणनीति।

      टीवीके: अभिनेता विजय की सफलता से बदलेंगे प्रदेश की राजनीति के समीकरण, हारे तो पार्टी बचाना मुश्किल।

      केरल: वामपंथ का अंतिम गढ़ दांव पर, कांग्रेस की उम्मीदें

      एलडीएफ: वाम मोर्चा जीता विपक्ष की राजनीति में भूमिका बढ़ेगी, हारे तो देश में आखिरी गढ़ ध्वस्त, सीएम विजयन की राजनीतिक पारी होगी समाप्त। भाजपा का प्रसार रोकने की चुनौती

      यूडीएफ: जीते तो 10 साल बाद कांग्रेस की सत्ता में वापसी, सरकार बनने से पार्टी को मनोवैज्ञानिक लाभ, तीसरी बार हारे तो नेतृत्व पर सवाल, राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की राजनीति में पार्टी की भूमिका पर असर होगा।कम हाेगी। गुटबाजी बढ़ेगी।व संगठन की का फायदा: सत्ता में वापसी, दक्षिण में कांग्रेस को नई ताकत

      भाजपा: वोट शेयर व सीट नहीं बढ़ी तो रणनीति पर सवाल, सीटें बढ़ीं तो प्रसार का मिलेगा मौका, बहुमत नहीं मिलने पर भूमिका।

      असम: हिमंता की प्रतिष्ठा, कांग्रेस की वापसी दांव पर

        भाजपा: चुनाव हिमंता के नेतृत्व पर रेफरेंडम, जीते तो कद बढ़ेगा, भाजपा में उनकी भूमिका बढ़ेगी, हारे तो
        पार्टी में उनके विरोधी हावी होंगे, पूर्वोत्तर में भाजपा राजनीतिक पकड़ ढीली, घुसपैठ नैरेटिव को झटका।

        कांग्रेस: जीते तो 10 साल बाद सत्ता में वापसी, संगठन में नई ऊर्जा, पूर्वाेत्तर में फिर मजबूती की उम्मीद, हारे तो नेतृत्व, खासकर टिकट स्क्रीनिंग कमेटी की प्रमुख प्रियंका गांधी, पर सवाल। विपक्ष की राजनीति में कांग्रेस होगी कमजोर।

        पुदुचेरी: छोटा प्रदेश, बड़ा संकेत

          एनडीए (भाजपा-एआईएनआरसी): पुन: जीते तो दक्षिण में राजनीतिक पकड़ का विस्तार, छोटे राज्यों में मजबूती का संदेश, हारे तो दक्षिण में स्वीकार्यता पर सवाल

          कांग्रेस-डीएमके गठबंधन: वापसी से मनोबल मजबूत, तमिलनाडु की राजनीति पर भी असर, हारे तो प्रदेश में पार्टी के अस्तित्व को खतरा।

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