Bengal Political Battle 2026: नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद बीजेपी की नजर बंगाल पर रही है। इस राज्य को जीतने के लिए बीजेपी ने हर पैतरा चलाया, लेकिन अभी तक कोई सफलता नहीं मिल पाई।
Bengal Election 2026: बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले सभी राजनीतिक पार्टियों ने तैयारी तेज कर दी है। 2014 में पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के प्रधानमंत्री बनने के बाद बीजेपी का स्वर्णिम काल शुरू हो गया। असम से लेकर यूपी तक भाजपा ने अपनी सरकार बनाई। हालांकि एक राज्य जिसमें 2014 के बाद भी बीजेपी का जादू नहीं चल पाया, वह बंगाल था। जहां एक तरफ देश में और राज्यों में पीएम मोदी के चेहरे पर वोट डाले जा रहे थे, वहीं बंगाल में बीजेपी ने चुनाव जीतने के लिए हर संभव प्रयास किए। लेकिन जीत नहीं मिली।
पिछले दिनों केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा था कि 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बीजेपी की सरकार है। शाह ने आगे कहा कि पीएम मोदी और कार्यकर्ताओं के चेहरे पर तभी खुशी मिलेगी, जब 22वें राज्य बंगाल में पार्टी की सरकार बनेगी।
नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद बीजेपी की नजर बंगाल पर रही है। इस राज्य को जीतने के लिए बीजेपी ने हर पैतरा चलाया, लेकिन अभी तक कोई सफलता नहीं मिल पाई। ममता के गढ़ बंगाल को बीजेपी अभी तक नहीं भेद पाई है। हालांकि यहां पर बीजेपी ने चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया है और वोट प्रतिशत भी बढ़ा है।
पश्चिम बंगाल की लड़ाई दो खेमों में बंटी हुई नजर आ रही है, क्योंकि कांग्रेस और लेफ्ट लगभग खत्म हो गए हैं। अब लड़ाई ममता बनर्जी की टीएमसी और बीजेपी के बीच है। बीजेपी ने सीएम पर आरोप लगाया कि प्रदेश में ममता तुष्टिकरण की राजनीति करती हैं। वहीं, ममता आरोप लगाती है कि बीजेपी समाज को बांटने की राजनीति करती है और हिंदू-मुस्लिम करती है।
बीजेपी बंगाल का किला अभी तक नहीं भेद पाई है, इसके कई कारण हैं। पहला यह है कि बीजेपी के पास ममता बनर्जी जैसा दमदार चेहरा नहीं है। ममता बनर्जी बीजेपी पर बाहरी होने का आरोप लगाती रहती हैं। कई बार सीएम बनर्जी अपने भाषणों में कह चुकी हैं कि पार्टी के पास स्थानीय नेता नहीं है, इसलिए प्रचार के लिए बाहरी नेताओं को बुलाया जाता है।
पार्टी ने सुवेंदु अधिकारी को नेता प्रतिपक्ष बनाया है। बताया जाता है कि सुवेंदु अधिकारी को पार्टी के कई सीनियर नेता पसंद नहीं करते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने जीवनभर पार्टी की सेवा की है, लेकिन नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी को बनाया है, जो कि पहले टीएमसी और ममता बनर्जी के करीबी रहे हैं।
बीजेपी ने पार्टी नेताओं की इसी नाराजगी को दूर करने के लिए शमीक भट्टाचार्य को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर बड़ा दाव खेला है। बीजेपी हर राज्य में पीएम मोदी के नाम पर वोट मांगती है, लेकिन यह पैतरा बंगाल में अभी तक सफल नहीं हो पाया है।
बंगाल में करीब 30 फीसदी मुस्लिम आबादी है। प्रदेश की 294 सीटों में से करीब 120 सीटों पर मुस्लिम वोट बैंक निर्णायक भूमिका निभाता है। इसके अलावा 25 प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम आबादी 112 सीटों पर है और 20 फीसदी से ज्यादा 130 सीटों पर है। प्रदेश में 46 सीटों पर मुस्लिम वोट बैंक 50 फीसदी है। ऐसे में प्रदेश की करीब 120 से लेकर 140 सीटें ऐसी हैं जहां पर मुस्लिम वोट बैंक काफी प्रभाव डालता है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो इस वोट बैंक पर ममता बनर्जी का प्रभाव ज्यादा है क्योंकि कांग्रेस और लेफ्ट के कमजोर होने से यह वोट बैंक ममता की ओर खिसक गया है।
2011 के बाद से ही ममता बनर्जी के लिए मुस्लिम वोटर अहम फैक्टर बने हुए हैं। इन्हीं वोटों के सहारे लगातर तीन बार सत्ता हासिल की है और चौथी बार भी सत्ता में आना का प्रयास कर रहीं हैं। हालांकि मुस्लिमों को रिझाने के लिए कांग्रेस और लेफ्ट ने 2021 में आईएसएफ के साथ गठबंधन किया था, लेकिन इसके बाद भी मुस्लिम वोट को नहीं तोड़ पाए। लोकनीति और सीडीएस के आंकड़ों के मुताबिक पिछले विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को करीब 87 प्रतिशत मुसलमानों ने वोट दिया था।
लोकसभा चुनाव 2019 में बंगाल में बीजेपी ने 18 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया था। ऐसे में अटकलें लगाई जाने लगी कि प्रदेश में 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी उलटफेर कर सकती है। लेकिन राज्य में सत्ता बनाने से पार्टी दूर रही। हालांकि इस चुनाव में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया था और 77 सीटें जीतकर प्रदेश में दूसरी बड़ी पार्टी बनी।
बता दें कि बंगाल में 294 विधानसभा सीटें हैं। किसी भी दल को सरकार बनाने के लिए 148 सीटों की आवश्यकता होती है। ममता बनर्जी की पार्टी ने 213 सीटों पर जीत हासिल की थी और बीजेपी के खाते में 77 सीटें गईं।