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Bengal Politics: वाम मोर्चा और कांग्रेस की ‘एकला चलो’ से क्या ममता को होगा फायदा?

West Bengal Assembly Election 2026: कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 अकेले लड़ने का फैसला किया है और लेफ्ट फ्रंट से दूरी बना ली है। इससे वोटों के बंटवारे, मुस्लिम वोट बैंक में विभाजन, विपक्षी एकता के कमजोर होने और त्रिकोणीय मुकाबले (TMC–BJP–Congress/Left) की स्थिति बनने की संभावना है, जिसका सीधा फायदा ममता बनर्जी और बीजेपी को मिल सकता है।

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Feb 06, 2026
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी (Photo-IANS)

Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का फैसला किया है। इसके बाद प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। प्रदेश प्रभारी गुलाम अहमद मीर ने पार्टी के अकेले चुनाव लड़ने के फैसले पर कहा कि अलग दलों के साथ गठबंधन करने से जमीनी स्तर पर कांग्रेस का कार्यकर्ता हतोत्साहित हुआ है।

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लेफ्ट के साथ मिलकर लड़ा था चुनाव

बता दें कि कांग्रेस ने 2021 विधानसभा चुनाव लेफ्ट के साथ मिलकर लड़ा था। लेकिन इस बार अकेले चुनाव लड़ेगी। ऐसे में वाम दल भी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ सकती है। हालांकि टीएमसी के साथ कांग्रेस के गठबंधन को लेकर खबर सामने आई थी कि ममता ने पार्टी को महज 2 सीटों का ऑफर दिया था, जो कि अस्वीकार्य था। 

क्या पड़ेगा असर?

कांग्रेस और वाम दल (लेफ्ट फ्रंट) के अलग-अलग चुनाव लड़ने से प्रदेश की राजनीति पर सीधा असर पड़ेगा। 

1. वोटों का बंटवारा होगा

बंगाल में कांग्रेस और वाम दलों का परंपरागत वोट बैंक भी काफी हद तक एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। अब इस विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियां अकेले चुनाव लड़ती हैं, तो वोटों का बंटवारा होगा। जो ममता बनर्जी के खिलाफ वोट बैंक है, वह बंट जाएगा और सीधा फायदा सीएम ममता बनर्जी की पार्टी को होगा। 

2. BJP को अप्रत्यक्ष फायदा

जहां कांग्रेस-लेफ्ट मजबूत हैं, वहां अलग-अलग लड़ने से BJP को मुकाबले में आने का मौका मिलेगा। इसके अलावा कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला (TMC vs BJP vs Congress/Left) देखने को मिलेगा। कुछ सीटों पर BJP “डिवाइडेड वोट” से जीत सकती है।

3. कांग्रेस और लेफ्ट दोनों कमजोर दिखेंगे

दोनों पार्टियों के अलग-अलग चुनाव लड़ने से कांग्रेस और लेफ्ट कमजोर नजर आएंगे। वहीं राजनीतिक प्रभाव घटेगा। विपक्षी एकता को भी झटका लगेगा। हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर INDIA गठबंधन की बात होती है, लेकिन बंगाल में अलग लड़ना संदेश देगा कि “विपक्ष एकजुट नहीं है”। इससे जनता में भरोसा कमजोर होगा।

मुस्लिम वोट बैंक का क्या होगा?

प्रदेश में करीब 27 से 30 प्रतिशत मुस्लिम हैं। यदि दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ते हैं, तो मुस्लिम वोट बैंक पर असर पड़ेगा। दोनों दलों का मुस्लिम वोट बैंक भी एक जैसा है। ऐसे में बिखराव होगा और सीधा फायदा ममता और बीजेपी को होगा। कुल मिलाकर, एकजुट रणनीति न होने पर मुस्लिम वोट बैंक की राजनीतिक ताकत कमजोर पड़ सकती है।

चुनाव वर्षकुल सीटेंकांग्रेस सीटेंटिप्पणी
200629421कांग्रेस कमजोर प्रदर्शन
201129442गठबंधन के साथ बढ़ा प्रदर्शन
201629444कांग्रेस ने कुछ सुधार किया
20212940भारी गिरावट, कोई सीट नहीं जीती

44 से जीरों पर पहुंची कांग्रेस

प्रदेश में कांग्रेस का प्रदर्शन 2006 से 2016 तक लगातार बढ़ता गया, लेकिन 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी। 2016 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 44 सीटों पर जीत दर्ज की थी, लेकिन 2021 के चुनाव में पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली। 

बता दें कि कांग्रेस ही नहीं, वाम दल को भी 2021 के चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली। वहीं, 2016 के विधानसभा चुनाव में 32 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वाम दल का प्रदर्शन भी पिछले चुनाव में जीरो रहा। 

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