
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन की आहट बशीरहाट से घोजाडांगा बॉर्डर की ओर बढ़ते ही महसूस होने लगती है। कभी चहल-पहल से भरा रहने वाला यह इलाका अब कुछ शांत और सतर्क दिखता है। ऑटो रिक्शे आज भी स्टैंड पर खड़े हैं, लेकिन उनमें बैठने वाली सवारियाँ कम हो गई हैं। स्थानीय लोग कहते हैं कि बॉर्डर पर बढ़ी निगरानी, सख्त जांच और तेज़ी से हो रही फेंसिंग ने यहाँ का माहौल पूरी तरह बदल दिया है। हालांकि यह बदलाव कितना स्थायी होगा, इसका जवाब वक्त ही देगा।
भारत-बांग्लादेश की करीब 4,096.7 किलोमीटर लंबी इंटरनेशनल बॉर्डर का सबसे बड़ा हिस्सा करीब 2,216.7 किलोमीटर पश्चिम बंगाल से होकर गुज़रता है। लंबे समय से घुसपैठ और तस्करी इस इलाके की बड़ी चुनौती रही है। इन्हीं कारणों से घोजाडांगा बॉर्डर को सबसे संवेदनशील सीमाओं में गिना जाता है। यहाँ आज भी ट्रकों के पहिए थमे नहीं हैं। पत्थर, गिट्टी और अन्य वैध सामान दोनों देशों के बीच आ-जा रहे हैं, लेकिन अब हर वाहन और हर चेहरे की बारीकी से जांच होती है। सीमा पर सुरक्षा बलों की बढ़ी मौजूदगी साफ बताती है कि यहाँ सिर्फ सरहद ही नहीं, भरोसे की भी चौकसी हो रही है।
घोजाडांगा और बशीरहाट सेक्टर वर्षों से घुसपैठ और तस्करी की चुनौती झेलते रहे हैं। यही वजह है कि अब इस सरहद पर चौकसी पहले से कहीं ज़्यादा कड़ी कर दी गई है। खासकर नदी से लगे हिस्से, जहाँ सुरक्षा हमेशा सबसे कठिन परीक्षा रही है, वहाँ दिन-रात निगरानी जारी है। मोटरबोट लहरों को चीरती हुई गश्त करती हैं, थर्मल इमेजर और नाइट विज़न उपकरण अंधेरे को भी भेदते हैं, जबकि इलेक्ट्रॉनिक निगरानी प्रणाली फेंसिंग से दूर छूटे हर कोने पर चौबीसों घंटे नज़र रखे हुए है। ये सब इसलिए किया जा रहा है जिससे फेंसिंग न होने वाले हिस्सों से भी घुसपैठ नहीं हो सके।
केंद्र के साथ पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने के बाद बॉर्डर सुरक्षा को लेकर साझा रणनीति पर काम तेज़ हुआ है। बंगाल सरकार ने बंगाल बॉर्डर फेंसिंग प्रोजेक्ट के लिए बीएसएफ को 600 एकड़ ज़मीन सौंपने की तैयारी है। अब तक सरकार ने चिकन नेक समेत विभिन्न जिलों की 142.79 एकड़ ज़मीन सौंपी है। उत्तर 24 परगना, नदिया, मुर्शिदाबाद और कूचबिहार में फेंसिंग के लिए भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया तेज़ की गई है। जिन जगहों पर फेंसिंग होनी है, वहाँ सफेद झंडे लगाए जा रहे हैं। कई जगह इसका विरोध भी देखने को मिला है। सरकार का लक्ष्य है कि जिन स्थानों पर ज़मीन उपलब्ध है, वहाँ जल्द से जल्द फेंसिंग का निर्माण पूरा किया जाए।
फेंसिंग को लेकर कई जगह बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) ने आपत्ति जताई है। यही वजह है कि असम में करीब 4 किलोमीटर बॉर्डर में फेंसिंग काम नहीं हो सका है। असम के धुबरी, दक्षिण सालमारा-मानकाचार, कछार और श्रीभूमि जिलों की 267.5 किलोमीटर लंबी भारत-बांग्लादेश बॉर्डर में से 228.541 किलोमीटर हिस्से पर कंटीली बाड़ लगाने का काम पूरा हो चुका है। 34.609 किलोमीटर हिस्सा नदियों के दायरे में आता है।