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मुस्लिम बहुल सीट पर BJP की बड़ी जीत, बंगाल के अल्पसंख्यक वोटबैंक में बड़ी सेंधमारी या महज चुनावी संयोग?

West Bengal Politics: 70 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाले रेजीनगर विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी की बड़ी जीत ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह अल्पसंख्यक वोट बैंक में वास्तविक बदलाव का संकेत है, या फिर यह बिखरे हुए विपक्ष और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों का नतीजा है?
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Oct 10, 2026
BJP candidate Shakharav Sarkar
BJP candidate Shakharav Sarkar (Photo-IANS)

West Bengal Bypoll Results: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के ठीक चार महीने बाद हुए दो विधानसभा उपचुनावों के नतीजों ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। नंदीग्राम और मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जबरदस्त जीत ने न केवल विधानसभा में पार्टी की ताकत को 209 तक पहुंचा दिया है, बल्कि पारंपरिक चुनावी समीकरणों को भी हिलाकर रख दिया है। विशेष रूप से रेजीनगर सीट, जहां लगभग 70 प्रतिशत मतदाता मुस्लिम समुदाय से आते हैं, वहां भाजपा की 75,816 वोटों के भारी अंतर से मिली जीत ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह बंगाल के अल्पसंख्यक वोट बैंक में किसी स्थायी बदलाव की शुरुआत है या फिर विपक्ष के बिखराव के कारण हुआ कोई अस्थायी चुनावी उलटफेर।

रेजीनगर में बड़ा बदलाव: वोट शेयर 27% से बढ़कर 63% हुआ

मुर्शिदाबाद के रेजीनगर निर्वाचन क्षेत्र में BJP उम्मीदवार शंकरव सरकार ने आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के गुलाम नबी आजाद को 75,816 वोटों से हराया। जहां BJP को 1,29,914 वोट मिले, वहीं उसके निकटतम प्रतिद्वंद्वी को केवल 54,098 वोट ही मिल सके। ठीक चार महीने पहले हुए आम चुनावों की तुलना में इस निर्वाचन क्षेत्र में BJP का वोट शेयर 27 प्रतिशत से बढ़कर 63 प्रतिशत हो गया। इसी तरह, नंदीग्राम में BJP की हंसिरानी रथ ने कांग्रेस के मिलन प्रधान को 1,22,753 वोटों के ऐतिहासिक अंतर से हराया, जहां भाजपा का वोट शेयर 50 प्रतिशत से बढ़कर 76 प्रतिशत हो गया।

अब अल्पसंख्यक BJP के साथ - सीएम शुभेन्दु अधिकारी

सीएम शुभेन्दु अधिकारी ने इन नतीजों का श्रेय मुस्लिम वोटरों की सोच में आए बदलाव को दिया है। उनका दावा है कि भाजपा को रेजीनगर में लगभग 60 प्रतिशत और नंदीग्राम में करीब 80 प्रतिशत अल्पसंख्यक वोट मिले। मुख्यमंत्री के अनुसार, CPI(M) और ममता बनर्जी ने पहले अल्पसंख्यकों के मन में यह डर पैदा किया था कि BJP उन्हें भगा देगी, लेकिन सरकार बनने के बाद बंगाली बोलने वाले मुसलमानों को एहसास हुआ कि BJP का एजेंडा सिर्फ विकास है। मुख्यमंत्री ने रेजीनगर में पुल, अस्पताल और कॉलेज जैसी परियोजनाओं का भी जिक्र किया।

शंकरव सरकार ने जीत का श्रेय विकास और पार्टी कार्यकर्ताओं को दिया

रेजीनगर से जीतने के बाद BJP विधायक शंकरव सरकार ने अपनी सफलता का श्रेय पार्टी और बूथ स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को दिया। उन्होंने कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं थी, बल्कि पार्टी के चुनाव चिह्न और संगठन की जीत थी। जब उनसे पूछा गया कि मुस्लिम बहुल इलाके के मतदाताओं ने BJP को इतना जबरदस्त समर्थन क्यों दिया, तो उन्होंने बंगाल की राजनीति के विभिन्न चरणों का जिक्र किया।

शंकरव सरकार ने कहा कि बंगाल का राजनीतिक मिजाज हमेशा सत्ता और विकास के साथ रहा है। जिस तरह अल्पसंख्यक कांग्रेस के दौर में बिधान चंद्र रॉय और सिद्धार्थ शंकर रॉय के साथ खड़े थे, वाम मोर्चा के शासन के दौरान ज्योति बसु और बुद्धदेव भट्टाचार्य का समर्थन किया और बाद में ममता बनर्जी के साथ जुड़े, उसी तरह अब वे विकास, कॉलेजों, पुलों और औद्योगिक पार्कों के लिए BJP के साथ आ गए हैं, जिसका नेतृत्व राज्य में शुभेन्दु अधिकारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह नतीजा उन लोगों के लिए एक तमाचा है जो सिर्फ सांप्रदायिक राजनीति करते हैं।

क्या विपक्षी बिखराव ने BJP का रास्ता आसान किया?

रेजीनगर और नंदीग्राम के नतीजों को समझने के लिए विपक्ष की स्थिति पर गौर करना जरूरी है। विपक्षी दलों के बीच बेहतर तालमेल की कमी और कई उम्मीदवारों के मैदान में होने से चुनावी मुकाबले पर असर पड़ा। 15 साल तक सत्ता में रहने के बाद, तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी झगड़ों ने राजनीतिक माहौल में संगठन के स्तर पर एक खालीपन पैदा कर दिया।

नंदीग्राम में ममता बनर्जी के गुट का समर्थन मिलने के बावजूद, कांग्रेस उम्मीदवार जमीनी स्तर पर बेहतर तालमेल नहीं बना पाए। वहीं, रेजीनगर में कांग्रेस उम्मीदवार को सिर्फ 6,168 वोट मिले। इसके अलावा, हुमायूं कबीर के सीट छोड़ने के बाद उनके बेटे की हार से यह साबित हुआ कि किसी नेता का निजी प्रभाव अपने-आप उनके उत्तराधिकारी को नहीं मिल जाता।

क्या बंगाल के मुस्लिम वोटबैंक में सचमुच बदलाव आया है?

रेजीनगर का नतीजा BJP के लिए राजनीतिक रूप से अहम है, लेकिन क्या यह अल्पसंख्यक समुदाय के रुख में किसी स्थायी या लंबे समय तक चलने वाले बदलाव का संकेत है? यह बात आने वाले नगर निकाय चुनावों और भविष्य के आम चुनावों में ही पूरी तरह साफ हो पाएगी। फिलहाल, विपक्ष के बिखराव और सत्ताधारी पार्टी के मजबूत संगठनात्मक ढांचे का फायदा उठाकर, BJP ने उस धारणा को तोड़ दिया है कि मुस्लिम बहुल सीटें उसकी पहुंच से बाहर थीं।

Updated on:
10 Oct 2026 09:00 am
Published on:
10 Oct 2026 09:00 am