Bengal Qurbani Row: पश्चिम बंगाल में ईद से पहले कुर्बानी पर सियासी विवाद तेज है, AJUP विधायक हुमायूं कबीर ने सरकार को खुली चेतावनी दी है।
Humayun Kabir attack on CM Suvendu: पश्चिम बंगाल में ईद-उल-जुहा से पहले कुर्बानी और गोहत्या को लेकर नया सियासी विवाद खड़ा हो गया है। आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख और राज्य के विधायक हुमायूं कबीर ने सरकार के हालिया पशु वध प्रतिबंध को चुनौती दी है। कबीर ने कहा कि कुरान में कुर्बानी का आदेश है और प्रशासन धार्मिक प्रथाओं में दखल न दे।
कबीर ने मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी को चेतावनी देते हुए कहा, हम कानून का सम्मान करते हैं, लेकिन कुर्बानी होगी। कुरान में जो लिखा है, उसका पालन होगा। मुख्यमंत्री आग के साथ खेल रहे हैं, जो उनके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। मुस्लिम समुदाय कुर्बानी के मुद्दे पर समझौता नहीं करेगा।
कबीर ने राज्य सरकार के 1950 के पशु वध नियंत्रण अधिनियम के तहत लगाए गए प्रतिबंधों को खारिज किया। उन्होंने कहा, सरकार मुसलमानों को बीफ न खाने का नियम बना सकती है, लेकिन अनुष्ठानिक कुर्बानी जारी रहेगी। हम किसी भी आपत्ति को स्वीकार नहीं करेंगे।
विधायक ने इसे 1400 साल पुरानी परंपरा बताते हुए कहा कि जब तक दुनिया है, गाय, बकरी और ऊंट की कुर्बानी जारी रहेगी। उन्होंने सड़क पर नमाज पर लगी पाबंदियों पर नाराजगी जताई और ईद के लिए पर्याप्त जगह की मांग की। साथ ही कबीर ने कहा अगर व्यवस्था नहीं होगी, तो सड़कों पर पूजा की भी अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।
पश्चिम बंगाल सरकार ने 13 मई को अधिसूचना जारी कर सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध पर प्रतिबंध लगाया है। नियम तोड़ने पर 6 महीने तक की जेल या 1,000 रुपये जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। हालांकि, कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगाने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा, गाय की कुर्बानी ईद-उल-जुहा का हिस्सा नहीं है और इस्लाम में यह कोई धार्मिक आवश्यकता नहीं।
बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि यह मामला कानून लागू करने और अवैध बूचड़खानों को रोकने का है। वहीं, बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने दावा किया कि गोहत्या का इस्लाम से कोई संबंध नहीं है।