
मुंबई में बारिश। फोटो-एएनआई
मुंबई। महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटों में हुई मूसलाधार बारिश ने कई इलाकों में अचानक बाढ़, नदियों के उफान और इमारतों के ढहने जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। इस बीच मुंबई में बारिश के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आ रहे हैं। दरअसल अल-नीनो के असर से भारत में कमजोर मानसून की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन जून के आखिर से 8 जुलाई तक मुंबई शहर में जमकर बारिश हुई और पुराने रिकॉर्ड टूट गए।
जुलाई के पहले सप्ताह में ही मुंबई में हुई जोरदार बारिश ने पूरे महीने के औसत कोटे को भर दिया। दक्षिण मुंबई के कोलाबा मौसम केंद्र में 791 मिलीमीटर और सांताक्रूज केंद्र में 879 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। कोलाबा में यह आंकड़ा जुलाई के सामान्य मासिक औसत 768.5 मिलीमीटर से भी ज्यादा रहा। 2 से 6 जुलाई के बीच पांच दिनों में 750 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश हुई, जो इस अवधि के सामान्य औसत से दोगुनी से भी अधिक है। 5 जुलाई को कई इलाकों में 225 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश दर्ज की गई, जबकि सांताक्रूज में 24 घंटे में 268 मिलीमीटर पानी बरसा, जो पिछले 15 साल में जुलाई महीने की दूसरी सबसे ज्यादा 24 घंटे की बारिश रही।
इस बीच मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अरब सागर का तेजी से बढ़ता तापमान और जलवायु परिवर्तन ने अल-नीनो के सामान्य असर को काफी हद तक बदल दिया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बार अरब सागर का पानी सामान्य से काफी ज्यादा गर्म है। इससे समुद्र से लगातार नमी मिलती रही और बारिश वाले बादल बार-बार बनते रहे। दूसरी ओर बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र पश्चिम की ओर बढ़े और दोनों समुद्री क्षेत्रों से मिली नमी पश्चिमी भारत में एक साथ पहुंची। पश्चिमी घाट से टकराने पर यही नमी तेज और लगातार बारिश में बदल गई।
वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) की ओर से बुधवार को जारी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 1 जून से अब तक राज्य में 62 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 पशुओं की भी जान गई है। स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (एसईओसी) के अनुसार, पिछले 24 घंटों में राज्य के तटीय और पश्चिमी जिलों में अत्यधिक बारिश दर्ज की गई। सबसे ज्यादा असर ठाणे और पालघर में देखने को मिला। इस दौरान ठाणे में 196.9 मिमी, पालघर में 185.4 मिमी, रायगढ़ में 134.1 मिमी, मुंबई उपनगर में 125.0 मिमी और पुणे में 69.4 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
रिपोर्ट के अनुसार, 1 जून से अब तक हुई कुल बारिश के आधार पर लगभग सभी जिले 'लार्ज एक्सेस' (सामान्य से बहुत अधिक बारिश) की श्रेणी में पहुंच चुके हैं। पालघर में सामान्य से 457.3 प्रतिशत और पुणे में 435.4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, पिछले पांच सप्ताह में हुई 62 मौतों में सबसे अधिक जानें इमारतों और दीवारों के ढहने तथा आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में गई हैं। संरचनाओं के ढहने से 25 लोगों की मौत हुई और 41 लोग घायल हुए। ये घटनाएं मुख्य रूप से नासिक, ठाणे, और मुंबई उपनगर में हुईं। वहीं बिजली गिरने की घटनाओं में 23 लोगों की मौत और 17 लोग घायल हुए।
राज्य में हुई 200 पशुओं की मौत में से 181 की मौत बिजली गिरने के कारण हुई। इसके अलावा भूस्खलन और मलबा खिसकने की घटनाओं में 6 लोगों की मौत और 4 लोग घायल हुए। इन घटनाओं का सबसे ज्यादा असर सिंधुदुर्ग, रत्नागिरी, रायगढ़, सतारा और पुणे के पहाड़ी इलाकों में देखने को मिला। पेड़ गिरने की घटनाओं में 6 लोगों की जान गई, जबकि बाढ़ के कारण 2 लोगों की मौत हुई। हाल की घटनाओं में मुंबई उपनगर में दीवार गिरने से एक व्यक्ति घायल हुआ, जबकि रत्नागिरी में पेड़ गिरने से दो लोग घायल हो गए।
लगातार बारिश के कारण राज्य की कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इसके चलते कई निचले इलाकों के गांवों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है और प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (आईएनसीओआईएस) ने महाराष्ट्र के पूरे समुद्री तट के लिए मध्यरात्रि तक रेड अलर्ट जारी किया है। आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने लोगों को समुद्र तट के पास होने वाली सभी मनोरंजक गतिविधियां पूरी तरह बंद रखने की सलाह दी है। साथ ही छोटी मछली पकड़ने वाली नौकाओं और व्यावसायिक नावों को भी समुद्र में न जाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
Updated on:
08 Jul 2026 05:24 pm
Published on:
08 Jul 2026 05:21 pm
