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‘सिंघम’ IPS अजय पाल शर्मा के खिलाफ शिकायत, तत्काल हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

West Bengal Election: बंगाल चुनाव के बीच आईपीएस अजय पाल शर्मा पर पक्षपात के आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में उन्हें पुलिस ऑब्जर्वर पद से हटाने और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

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Apr 29, 2026
आईपीएस अजय पाल शर्मा (फोटो- Amitabh Chaudhary एक्स पोस्ट)

West Bengal Election: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में 142 सीटों पर वोटिंग हो रही है। चुनावों को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से पूरा कराने के लिए राज्य में हाल ही में आईपीएस अजय पाल शर्मा की नियुक्ति की गई थी। एनकाउंटर स्पेशलिस्ट शर्मा उत्तर प्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी है और ‘सिंघम ऑफ यूपी’ के नाम से जाने जाते है। लेकिन चुनावों से पहले ही शर्मा को पुलिस ऑब्जर्वर पद से हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर गई। याचिका में शर्मा पर चुनावी प्रक्रिया में अपेक्षित निष्पक्षता नहीं बरतने का आरोप लगाया गया है। याचिका के अनुसार शर्मा ने दक्षिण 24 परगना में तैनाती के बाद उम्मीदवारों पर दबाव बनाया और उन्हें डराने-धमकाने जैसी गतिविधियों में हिस्सा लिया, जिससे चुनावी माहौल प्रभावित हुआ है।

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शर्मा की मौजूदगी से चुनावी वातावरण दूषित हो रहा - याचिका

आईपीएस शर्मा के खिलाफ संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर की गई है, जो कि नागरिकों को अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट जाने की अनुमति देता है। आदित्य दास द्वारा दायर इस याचिका में कहा गया है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव नागरिकों का मूल अधिकार है और किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप इस अधिकार का उल्लंघन है। याचिका के अनुसार, शर्मा की मौजूदगी से चुनावी वातावरण दूषित हो रहा है और इससे जनता का भरोसा कमजोर पड़ रहा है।

शर्मा ने पक्षपातपूर्ण व्यवहार किया - याचिका

आरोपों में यह भी कहा गया है कि एक ऑब्जर्वर के रूप में उनका काम पूरी तरह तटस्थ रहकर चुनाव प्रक्रिया की निगरानी करना है, लेकिन कथित तौर पर उन्होंने इस भूमिका से हटकर पक्षपातपूर्ण व्यवहार किया। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मामले का संज्ञान लेने और आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है, ताकि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता बनी रहे।

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम का हवाला दिया

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया है कि चुनाव ऑब्जर्वर का दायित्व स्वतंत्र रूप से चुनाव की निगरानी करना और लोकतांत्रिक मानकों का पालन सुनिश्चित करना होता है। अगर कोई अधिकारी इस भूमिका से विचलित होता है, तो इससे पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है। याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि इस तरह के व्यवहार से चुनाव में बराबरी का अवसर खत्म होता है और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बाधित होती है। ऐसे में अदालत का हस्तक्षेप जरूरी बताया गया है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

142 सीटों पर हो रहे चुनाव

बता दें कि बंगाल में दूसरे और अंतिम चरण के लिए आज 142 सीटों पर मतदान हो रहा है। पहले चरण में रिकॉर्ड 93.2 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था, जिससे राजनीतिक दलों के बीच जीत के दावे और भी तेज हो गए हैं। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच मतदान प्रक्रिया पूरी कराई जा रही है। चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे, जिनके साथ अन्य राज्यों के परिणाम भी सामने आएंगे। इस बीच सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका ने चुनावी माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है, और अब सबकी नजर अदालत के फैसले पर टिकी है।

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