1 मई 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Y सिक्योरिटी के लिए सरकार से लड़ रहे हरभजन सिंह, जनता झेल रही हर घंटे 3 मर्डर और 2 रेप

Y Security पर हरभजन सिंह और पंजाब सरकार की भिड़ंत से फिर उठा वही बड़ा सवाल- क्या जनता के पैसों से मिलने वाली सुरक्षा का बेजा इस्तेमाल रुकेगा?

4 min read
Google source verification
Harbhajan Singh Y Security Controversy, BJP MP Harbhajan

बीजेपी में शामिल होने के बाद हरभजन सिंह को केंद्र से सुरक्षा मिली है, वह पंजाब सरकार से मिली वाई श्रेणी की सुरक्षा फिर से हासिल करने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। (फोटो एआई के जरिए बनाया गया है)

हरभजन सिंह जब क्रिकेटर नहीं रहे तो नेता बन गए। आम आदमी पार्टी (आप) ने बना दिया। आप ने उन्हें पंजाब से राज्य सभा भेज दिया। क्यों भेजा, इसकी असली वजह किसी को पता नहीं है। भेजा तो सुरक्षा भी दी। वाई कैटेगरी (11 सुरक्षाकर्मियों वाली) की सुरक्षा। यह सुरक्षा जेड प्लस, जेड, वाई प्लस के बाद चौथी कैटेगरी की है। जानकार बताते हैं कि जेड प्लस और जेड कैटेगरी की सुरक्षा देने पर हर महीने क्रमशः लगभग 55 लाख और 45 लाख रुपये का खर्च आता है।

हाल ही में हरभजन ने पाला बदल लिया। वह उन छह सांसदों में शुमार हो गए, जो राघव चड्ढा की अगुआई में भाजपा में चले गए।

हरभजन ने पाला बदला तो पंजाब में आप की भगवंत मान सरकार ने भी रुख बदला। उन्हें दी गई सुरक्षा वापस ले ली। हालांकि, केंद्र सरकार ने तत्काल पंजाब और दिल्ली में उनकी सुरक्षा में सीआरपीएफ के जवान तैनात करा दिए। फिर भी, हरभजन पंजाब पुलिस द्वारा सुरक्षा वापस लिए जाने के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट चले गए। उन्होंने कहा कि जालंधर में उनके घर के बाहर प्रदर्शन हुए, दीवारों पर उन्हें 'गद्दार' लिखा गया। ऐसे में पंजाब पुलिस का कर्तव्य है कि उन्हें पहले की तरह सुरक्षा मुहैया कराती रहे।

30 अप्रैल को कोर्ट ने पंजाब सरकार को आदेश दिया कि वह सुनिश्चित करे कि पंजाब में हरभजन और उनके परिवार को किसी तरह का शारीरिक नुकसान नहीं पहुंचे। कोर्ट ने 12 मई की अगली तारीख दे दी।

यह पूरा घटनाक्रम सुनने-देखने में साधारण लग सकता है, लेकिन असल में असाधारण सवालों को जन्म देता है। क्या सांसद बनने का मतलब सुविधा लेना भर है? क्या सरकारें जनता के पैसे से दी जाने वाली सुरक्षा का गलत राजनीतिक इस्तेमाल कर रही हैं? वह भी आम जनता की सुरक्षा की कीमत पर?

सवाल यह भी उठता है कि पार्टियां आखिर किस आधार पर किसी को राज्य सभा भेजने का निर्णय लेती हैं? भाजपा सरकार ने रंजन गोगोई को सांसद मनोनीत किया। उन्होंने छह साल में न एक भी सवाल पूछा और न किसी बहस में हिस्सा लिया। औसत हाजिरी भी 53 प्रतिशत ही रही। हरभजन सिंह की संसद में औसत उपस्थिति 28 प्रतिशत रही है।

बतौर सांसद हरभजन सिंह का रिपोर्ट कार्ड

गतिविधि (Parliamentary Activity)हरभजन सिंह का आंकड़ा राष्ट्रीय औसत (National Average) पंजाब का औसत (State Average)
उपस्थिति (Attendance)28%79%75%
बहस में भागीदारी (No. of Debates)3133.960.7
पूछे गए प्रश्नों की संख्या (No. of Questions)172203.06281.14
निजी विधेयक (Private Member's Bills)01.22.4
18 अप्रैल, 2026 तक के ये आंकड़े पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के हवाले से हैं।

सुरक्षा की बात करें तो जनता परेशान है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) का ताजा आंकड़ा कहता है कि देश में हर 17वें मिनट एक मर्डर और 18वें मिनट रेप हो रहा है।

अपराध दो घटनाओं के बीच का अंतराल (समय)
हत्या (Murder)17 मिनट
बलात्कार (Rape)18 मिनट
अपहरण (Kidnapping, abduction)8 मिनट
आत्महत्या के लिए उकसाना (Abetment of suicide)56 मिनट
हत्या का प्रयास (Attempt to murder)8 मिनट
लापरवाही से मौत का कारण बनना (Causing death by negligence)3 मिनट
चोट पहुँचाना (Hurt)1 मिनट
जबरन वसूली और ब्लैकमेलिंग (Extortion & blackmailing)43 मिनट
विश्वासघात (Criminal breach of trust)23 मिनट
डकैती (Robbery)20 मिनट
सेंधमारी (Burglary)5 मिनट
जालसाजी, धोखाधड़ी और फरेब (Forgery, cheating & fraud)3 मिनट
चोरी (Theft)1 मिनट
बलात्कार का प्रयास (Attempted rape)3 घंटे 8 मिनट
दहेज मृत्यु (Dowry deaths)85 मिनट
छेड़छाड़ (Molestation)6 मिनट
पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता (Cruelty by husband or relatives)4 मिनट

अपराध के ये आंकड़े भयावह हैं। पुलिस लोगों को इससे नहीं बचा पा रही। पुलिस की संख्या जरूरत के हिसाब से काफी कम है। जाहिर है, ऐसे में उस पर काम का दबाव भी खूब है। 1 जनवरी, 2024 के आंकड़ों के मुताबिक देश में पुलिस के 27.55 लाख पद स्वीकृत थे, जबकि इनकी वास्तविक संख्या 21.62 लाख थी।

पुलिस बल के एक आदमी पर 2023 में 506.47 लोगों की सुरक्षा का भार था। सरकार ने यह आंकड़ा कुल मंजूर पदों (खाली पदों को भी शामिल करते हुए) की संख्या के आधार पर दिया है। साथ ही, ध्यान रहे कि यह आंकड़ा राष्ट्रीय स्तर का है। राज्यों के स्तर पर जाएं तो कई राज्यों में यह संख्या 600 पार भी है।

पुलिस बल के एक जवान/अफसर पर कितने लोगों की सुरक्षा का बोझ

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश (States/UTs)प्रति पुलिस व्यक्ति जनसंख्या (Population Per Police Person)
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (A & N Islands)79.31
नागालैंड (Nagaland)83.94
लद्दाख (Ladakh)84.60
मणिपुर (Manipur)92.25
सिक्किम (Sikkim)100.92
अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh)104.25
मिजोरम (Mizoram)110.81
त्रिपुरा (Tripura)140.31
गोवा (Goa)145.88
जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir)148.03
चंडीगढ़ (Chandigarh)176.53
मेघालय (Meghalaya)205.45
लक्षद्वीप (Lakshadweep)214.95
दिल्ली (Delhi)229.05
हरियाणा (Haryana)342.88
पंजाब (Punjab)361.51
छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh)370.25
पुडुचेरी (Puducherry)373.60
हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh)383.36
तेलंगाना (Telangana)443.68
झारखंड (Jharkhand)479.60
आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh)483.39
उत्तराखंड (Uttarakhand)504.98
असम (Assam)514.39
महाराष्ट्र (Maharashtra)534.57
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh)551.47
गुजरात (Gujarat)579.98
केरल (Kerala)581.27
तमिलनाडु (Tamil Nadu)581.47
पश्चिम बंगाल (West Bengal)597.49
कर्नाटक (Karnataka)602.02
ओडिशा (Odisha)635.61
मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh)695.32
राजस्थान (Rajasthan)697.99
बिहार (Bihar)749.65
दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव (Dadra and Nagar Haveli and...)924.86
ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट की ताजा रिपोर्ट में दिया गया 1 जनवरी, 2024 को राज्यवार प्रति पुलिस पर निर्भर आबादी (Population per police person) का आंकड़ा।

ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट के आंकड़ों के मुताबिक पुलिस-जनसंख्या अनुपात (प्रति लाख आबादी पर) 2023 में 197.44 था, जो 2022 में 196.88 था। 1.4.2014 को यह आंकड़ा 139.76 था।

एक लाख की आबादी पर कहां कितनी पुलिस

राज्य/केंद्र शासित प्रदेशप्रति लाख जनसंख्या पर पुलिस
दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव108.12
बिहार131.40
राजस्थान143.27
मध्य प्रदेश143.82
ओडिशा158.24
कर्नाटक166.11
पश्चिम बंगाल167.37
तमिलनाडु171.38
केरल172.04
गुजरात172.42
उत्तर प्रदेश181.33
महाराष्ट्र187.07
असम194.41
उत्तराखंड198.03
आंध्र प्रदेश206.87
झारखंड208.51
तेलंगाना225.39
हिमाचल प्रदेश260.85
पुडुचेरी267.67
छत्तीसगढ़270.08
पंजाब276.62
हरियाणा291.64
दिल्ली436.58
लक्षद्वीप465.22
मेघालय486.74
चंडीगढ़566.48
जम्मू और कश्मीर675.53
गोवा685.58
त्रिपुरा712.73
मिजोरम902.41
अरुणाचल प्रदेश953.27
सिक्किम990.80
मणिपुर1,084.80
लद्दाख1,182.06
नागालैंड1,191.26
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह1,260.85
ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट की ताजा रिपोर्ट में दिया गया 1 जनवरी, 2024 को राज्यवार प्रति लाख आबादी पर स्वीकृत पुलिस बल (Police per lakh population) का आंकड़ा।

वीआईपी सुरक्षा और पुलिस

पुलिस की कम संख्या और आम लोगों के लिए कम उपलब्धता के बावजूद बड़ी संख्या में पुलिस और सुरक्षा बलों का इस्तेमाल वीआईपी सुरक्षा में किया जा रहा है। 2024 में सीआरपीएफ के 86वें स्थापना दिवस (27 जुलाई) पर सरकार ने बतया था कि 5.68 फीसदी सीआरपीएफ जवान वीआईपी की सुरक्षा में लगे हैं।

ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक वीआईपी की सुरक्षा के लिए पूरे देश में कुल 65,246 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। राष्ट्रीय स्तर पर, प्रति वीआईपी सुरक्षा के लिए औसतन 3.4 पुलिस कर्मी तैनात हैं। पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक 3,005 वीआईपी को सुरक्षा दी गई है। पंजाब दूसरे स्थान पर है। पंजाब में 2,476 व्यक्तियों को सुरक्षा मिली है।