
बंगाल में बना नया इतिहास पुरुषों से आगे निकलीं महिलाएं (AI फोटो)
West Bengal Elections: पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव सिर्फ वोटों का नहीं, बल्कि महिलाओं की ताकत का बड़ा प्रदर्शन बन गया। लंबी कतारों में खड़ी महिलाओं की तस्वीरें इस चुनाव की सबसे मजबूत कहानी बनकर सामने आईं। रिकॉर्ड तोड़ मतदान के बीच एक बात साफ दिखी, महिलाएं अब सिर्फ वोटर नहीं, बल्कि चुनाव की दिशा तय करने वाली ताकत बन चुकी हैं।
पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में कुल मतदान 92.47% तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे ज्यादा है। इसमें महिलाओं की भागीदारी 93.24% रही, जबकि पुरुषों का मतदान 91.74% दर्ज हुआ। यानी महिलाओं ने एक बार फिर पुरुषों को पीछे छोड़ दिया। साल 2021 के चुनाव में कुल मतदान 82.3% था, जहां महिलाओं का आंकड़ा 81.75% और पुरुषों का 81.37% था। इस बार दोनों में बढ़ोतरी हुई, लेकिन महिलाओं की बढ़त और मजबूत हो गई।
अगर पिछले 15 साल के आंकड़ा देखें तो 2011 के बाद से एक बड़ा बदलाव आया है। 2011 का चुनाव इसलिए भी अहम था क्योंकि इसी साल 34 साल पुरानी वाम सरकार का अंत हुआ और ममता बनर्जी की अगुवाई में नई सरकार बनी। उस चुनाव में कुल मतदान 84.72% था और महिलाओं का मतदान 84.45% रहा, जो उस समय रिकॉर्ड था। इसके बाद से हर चुनाव में महिलाएं लगातार आगे रही हैं। सिर्फ 2014 लोकसभा चुनाव एक ऐसा अपवाद रहा, जब पुरुषों का वोट प्रतिशत थोड़ा ज्यादा था।
साल 2016 में विधानसभा चुनाव में महिलाओं का मतदान 83.13% रहा, जो पुरुषों से ज्यादा था। साल 2019 लोकसभा चुनाव में भी यही ट्रेंड जारी रहा। 2024 लोकसभा चुनाव में तो यह अंतर और बढ़ गया, जहां महिलाओं का मतदान 80.16% और पुरुषों का 78.2% रहा। स्पष्ट है कि बंगाल में महिलाओं की भागीदारी अब स्थायी रूप से ज्यादा हो चुकी है।
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के पीछे सरकारी योजनाओं की बड़ी भूमिका है। ममता बनर्जी सरकार ने महिलाओं को ध्यान में रखकर कई योजनाएं शुरू कीं। कन्याश्री योजना के जरिए लड़कियों की पढ़ाई को बढ़ावा दिया गया। रुपाश्री योजना के तहत शादी के लिए आर्थिक मदद दी जाती है। वहीं लक्ष्मी भंडार योजना के जरिए महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जा रही है, जिसे अब बढ़ाकर 1500 रुपये कर दिया गया है। इन योजनाओं ने महिलाओं को सीधे तौर पर जोड़ने का काम किया है।
पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के ज्यादा मतदान की एक वजह रोजगार के लिए बाहर जाना भी है। बड़ी संख्या में युवा पुरुष काम के लिए दूसरे राज्यों में रहते हैं, जिससे वे हर चुनाव में वोट नहीं डाल पाते। इसके उलट महिलाएं स्थानीय स्तर पर मौजूद रहती हैं और मतदान करती हैं।
यह बदलाव सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं है। पूरे देश में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। साल 2009 से 2019 के बीच महिला वोटरों की हिस्सेदारी 47.73% से बढ़कर 48.09% हो गई। अब कई राज्यों में महिलाएं न सिर्फ बराबरी कर रही हैं, बल्कि पुरुषों से ज्यादा मतदान भी कर रही हैं।
अगर पुराने आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर पूरी तरह अलग थी। साल 1962 में कुल मतदान 55% था, जहां पुरुषों का मतदान 61.77% और महिलाओं का सिर्फ 47.43% था। धीरे-धीरे यह अंतर कम हुआ और साल 2009 तक महिलाओं का आंकड़ा पुरुषों के करीब पहुंच गया। 2011 के बाद यह अंतर पलट गया और महिलाएं आगे निकल गईं।
Updated on:
01 May 2026 05:02 pm
Published on:
01 May 2026 05:01 pm
बड़ी खबरें
View Allराष्ट्रीय
ट्रेंडिंग
