West Bengal Chunav: बंगाल चुनाव 2026 की मतगणना से पहले चुनाव आयोग सख्त है। 294 सीटों पर ऑब्जर्वर तैनात किए गए हैं, 200 CAPF कंपनियां और तीन लेयर सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है।
पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों से पहले ही माहौल को काबू में रखने के लिए चुनाव आयोग ने इस बार नया एक्शन प्लान बनाया है।
4 मई को होने वाली मतगणना को लेकर आयोग ने साफ कर दिया है कि किसी भी तरह की गड़बड़ी या हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी वजह से सुरक्षा और निगरानी के ऐसे इंतजाम किए गए हैं, जो पहले कम ही देखने को मिले हैं।
294 विधानसभा सीटों के लिए तैनात सभी जनरल ऑब्जर्वरों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे मतगणना शुरू होने से पहले ही अपने-अपने केंद्रों पर मौजूद रहें।
सुबह 8 बजे जब वोटों की गिनती शुरू होगी, उससे पहले उन्हें काउंटिंग हॉल में पहुंचना होगा और पूरी प्रक्रिया खत्म होने तक वहीं रहना होगा।
इतना ही नहीं, जीत का प्रमाण पत्र उम्मीदवार को सौंपे जाने तक उनकी जिम्मेदारी बनी रहेगी। आयोग ने साफ किया है कि किसी भी तरह की गड़बड़ी के लिए ऑब्जर्वर भी जवाबदेह होंगे।
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के दफ्तर के मुताबिक, ऑब्जर्वरों को हर गतिविधि की जानकारी लगातार देनी होगी। यह अपडेट कोलकाता में बने केंद्रीय कंट्रोल रूम और जिलों के कंट्रोल रूम तक भेजी जाएगी। इससे किसी भी समस्या पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी।
मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। सबसे अंदर वाले घेरे यानी काउंटिंग रूम में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की करीब 200 कंपनियां तैनात रहेंगी।
इसके अलावा दो और सुरक्षा घेरे होंगे, एक केंद्र के अंदर और दूसरा बाहर। इस तरह कुल तीन स्तर की सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।
इस बार सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मतगणना केंद्रों की संख्या भी घटा दी गई है। पूरे राज्य में सिर्फ 77 काउंटिंग सेंटर बनाए गए हैं। इसका मकसद है कि सुरक्षा बलों को एक जगह केंद्रित किया जा सके और निगरानी ज्यादा मजबूत रहे।
मतगणना केंद्रों में प्रवेश के लिए भी सख्त नियम लागू किए गए हैं। सिर्फ अधिकृत अधिकारी, कर्मचारी, उम्मीदवार और राजनीतिक दलों के एजेंट ही अंदर जा सकेंगे।
पहचान पत्र की जांच तीन चरणों में होगी। पहले दो चरणों में मैन्युअल जांच होगी, जबकि तीसरे चरण में क्यूआर कोड स्कैन किया जाएगा। इसके बाद ही किसी को अंदर जाने की अनुमति मिलेगी।
2021 के चुनाव के बाद हुई हिंसा को देखते हुए इस बार आयोग पहले से ज्यादा सतर्क है। मतगणना के बाद भी हालात बिगड़ने की आशंका को ध्यान में रखते हुए राज्य में 700 कंपनियां केंद्रीय बलों की तैनात रखने का फैसला किया गया है। ये बल अगले आदेश तक राज्य में बने रहेंगे।
चुनाव आयोग का मकसद साफ है कि मतगणना पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष हो। सख्त नियमों और भारी सुरक्षा के जरिए यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि जनता का फैसला बिना किसी दबाव या गड़बड़ी के सामने आए।