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West Bengal Election: बंगाल का असली ‘सिकंदर’ कौन? ममता, मोदी और शाह की रैलियों का इनसाइड डेटा आपको कर देगा हैरान!

Campaign: पश्चिम बंगाल चुनाव के प्रचार में टीएमसी और एनडीए के बीच जबरदस्त टक्कर देखने को मिली है। जानिए चुनाव जीतने के लिए ममता बनर्जी, पीएम मोदी और अमित शाह में से किसने सबसे ज्यादा रैलियां और रोड शो किए।

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Apr 29, 2026
ममता बनर्जी,अमित शाह और नरेंद्र मोदी ।( फोटो: पत्रिका)

Election Rallies: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दिलचस्प रहा। राजनीतिक दलों ने जनता का वोट हासिल करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के बीच कांटे की टक्कर रही है। इस सियासी गहमागहमी के बीच एक सवाल हर किसी के जेहन में है कि आखिर प्रचार के मैदान में किसने सबसे ज्यादा मेहनत की? चुनाव प्रचार में ममता बनर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की रैलियों और दौरों के आंकड़े एक बेहद दिलचस्प कहानी बयां करते हैं।

ममता बनर्जी: जमीन पर सबसे मजबूत पकड़

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस बार भी साबित किया कि बंगाल की राजनीति में उनकी सक्रियता का कोई सानी नहीं है। 'बंगाल की बेटी' के नारे के साथ उन्होंने चुनाव प्रचार की कमान पूरी तरह अपने हाथों में रखी। आंकड़ों पर गौर करें तो ममता ने पूरे प्रदेश में करीब 65 से 70 रैलियां और छोटी-बड़ी पदयात्राएं कीं। उनका मुख्य फोकस हर छोटे-बड़े इलाके में पहुंचकर मतदाताओं से सीधे जुड़ने और अपनी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने पर रहा।

अमित शाह: संगठन और रोड शो पर जोर

बीजेपी की तरफ से गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव प्रचार में पूरी जान फूंक दी। उन्होंने पारंपरिक रैलियों से ज्यादा भव्य रोड शो पर ध्यान केंद्रित किया। अमित शाह ने बंगाल के अलग-अलग जिलों में लगभग 25 से 30 कार्यक्रम किए। उनका मुख्य मकसद बीजेपी के जमीनी कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरना और राष्ट्रीय सुरक्षा व घुसपैठ जैसे अहम मुद्दों पर जनता का ध्यान अपनी ओर खींचना था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: बड़ी जनसभाओं का मास्टरस्ट्रोक

पीएम मोदी ने बीजेपी के प्रचार अभियान को एक राष्ट्रीय फलक दिया। उन्होंने राज्य में करीब 18 से 20 विशाल जनसभाओं को संबोधित किया। पीएम मोदी की रणनीति बिल्कुल साफ थी- चरणों के बीच के समय का इस्तेमाल करते हुए एक ही दिन में बड़ी रैलियां कर कई जिलों को एक साथ साधना। उन्होंने अपने भाषणों में 'डबल इंजन' सरकार के फायदे गिनाए और राज्य के ज्वलंत मुद्दों पर मौजूदा सरकार को आक्रामक तरीके से घेरा।

रैलियों की यह होड़ सिर्फ संख्या का खेल नहीं

इस धुआंधार प्रचार पर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रैलियों की यह होड़ सिर्फ संख्या का खेल नहीं है, बल्कि दोनों पार्टियों की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। टीएमसी ने स्थानीय नेता के तौर पर ममता बनर्जी को हर कोने तक पहुंचाया, तो वहीं बीजेपी ने अपने सबसे बड़े चेहरों को उतारकर यह संदेश दिया कि वे इस चुनाव को कितनी गंभीरता से ले रहे हैं। आम मतदाताओं का भी कहना है कि इस बार का चुनाव प्रचार पिछले कई चुनावों की तुलना में कहीं ज्यादा आक्रामक और तेज-तर्रार रहा।

अब फैसला पूरी तरह से बंगाल की जनता के हाथों में

प्रचार का शोर थमने के बाद अब फैसला पूरी तरह से बंगाल की जनता के हाथों में है। आज 29 अप्रैल को दूसरे चरण की वोटिंग भी चल रही है। इसके बाद सभी की निगाहें 4 मई 2026 को होने वाली मतगणना पर टिक गई हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव नतीजों में ममता बनर्जी का जमीनी प्रचार कमाल दिखाता है या फिर पीएम मोदी और अमित शाह की चुनावी रणनीति बंगाल में नया बदलाव लेकर आती है।

सोशल मीडिया पर भी एक अलग 'वर्चुअल युद्ध' लड़ा गया

इस बार के चुनाव प्रचार में एक और बात जिसने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा, वह थी अप्रैल की भीषण गर्मी। चिलचिलाती धूप और बढ़ते तापमान के बावजूद नेताओं ने रैलियों और रोड शो में कोई कमी नहीं आने दी। इसके अलावा, जमीन पर हो रही इन रैलियों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी एक अलग 'वर्चुअल युद्ध' लड़ा गया। रैलियों की भीड़ और नेताओं के बयानों को छोटे वीडियो, रील्स और व्हाट्सएप के जरिए लाखों लोगों के मोबाइल तक पहुंचाया गया, जिसने इस चुनाव को पूरी तरह से हाई-टेक बना दिया।

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