Bengal Politics: पश्चिम बंगाल के कालीगंज में बम ब्लास्ट में अपनी 9 साल की बेटी को खोने वाली सबीना यास्मीन अब सीपीआई (एम) के टिकट पर चुनाव लड़ेंगी। इंसाफ की तलाश में राजनीति में उतरीं सबीना का कहना है कि अब उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं बचा है।
Assembly Bypolls: पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में होने वाले विधानसभा उपचुनाव (Assembly Bypolls) में एक नया और बेहद भावुक चेहरा सामने आया है। कालीगंज विधानसभा सीट से सीपीआई-एम (CPIM candidate) ने 38 साल की सबीना यासमीन को अपना उम्मीदवार (Election ticket) बनाया है। सबीना वही अभागी मां हैं, जिन्होंने बीते साल सत्ताधारी पार्टी की विजय रैली के दौरान हुए एक देसी बम धमाके (Bomb blast) में अपनी 9 साल की मासूम बेटी तमन्ना को खो दिया था। राजनीति के दांव-पेंच (Bengal Politics) से दूर रहने वाली सबीना अब अपनी बेटी के इंसाफ की गुहार लेकर चुनावी मैदान (Election campaign) में उतर चुकी हैं। उनका कहना है कि उनकी बेटी तो राजनीति (Political rivalry) का मतलब भी नहीं जानती थी। अब एक मां के तौर पर उनके पास खोने के लिए कुछ भी नहीं बचा है और वह अपनी आखिरी सांस तक न्याय के लिए (Justice for daughter) लड़ेंगी ।
सबीना का कहना है कि वे बीते नौ महीनों से दर-दर भटक रही हैं और संघर्ष कर रही हैं। जब स्थानीय स्तर पर चुनाव के नतीजे आए थे, तब उनके इलाके के कई घरों पर हमले हुए थे। सबीना की शादी महज 14 साल की उम्र में हो गई थी और वो कभी स्कूल भी नहीं गईं। लेकिन अब पार्टी के समर्थक और नेता चाहते हैं कि वो विधायक बनें और खुद अपने दम पर न्याय की यह लड़ाई लड़ें।
पिछले साल 23 जून को टीएमसी की विजय यात्रा निकल रही थी। मुलुंडी गांव में चौथी कक्षा में पढ़ने वाली 9 साल की तमन्ना अपने घर के बरामदे में खड़ी थी। मुलुंडी को वामपंथियों का गढ़ माना जाता है। उसी वक्त वहां एक देसी बम आकर फटा। इस धमाके में गंभीर रूप से घायल तमन्ना ने दम तोड़ दिया। इस घटना ने सबीना को अंदर तक तोड़ दिया था। बेटी के हमलावरों को खुलेआम घूमते देख उन्होंने न्याय के लिए अपनी आवाज बुलंद करने की ठानी।
सबीना को टिकट दिए जाने से सीपीआई एम ( CPI M ) के कुछ स्थानीय कार्यकर्ता नाराज हैं। उन्होंने हाल ही में स्थानीय पार्टी दफ्तर में तोड़फोड़ भी की। हालांकि, वाम मोर्चा के वरिष्ठ नेता इसे बहुत मामूली बात बता रहे हैं। पार्टी नेतृत्व ने सबीना को 'शहीद बच्ची की मां' करार दिया है। वे सबीना के लिए कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों से भी समर्थन मांग रहे हैं ताकि उन्हें इंसाफ मिल सके।
सबीना यासमीन के चुनाव लड़ने के फैसले पर आम लोगों में गहरी सहानुभूति देखने को मिल रही है। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर लोग एक मां के इस जज्बे की सराहना कर रहे हैं। वहीं, टीएमसी ने इस पर अभी सधी हुई प्रतिक्रिया दी है और मामले को कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस सबीना को अपना समर्थन देती है या नहीं। साथ ही, चुनाव आयोग इस सीट पर होने वाले प्रचार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर क्या कदम उठाता है, क्योंकि सबीना के परिवार ने दोबारा हमले की आशंका जताई है।
इस चुनाव में मुख्य मुद्दा अब विकास से हटकर 'राजनीतिक हिंसा और कानून-व्यवस्था' पर केंद्रित हो गया है। पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद होने वाली हिंसा एक पुरानी समस्या रही है, जो इस घटना के जरिए एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है