
West Bengal Minister Tapas Roy: तृणमूल कांग्रेस के नेता अरूप बिस्वास ने एचडीएफसी बैंक की कोलकाता शाखा को लिखे पत्र में पार्टी के संकटग्रस्त खाते को फ्रीज करने की मांग की है। तृणमूल के कोषाध्यक्ष के रूप में बिस्वास ने पत्र लिखकर पार्टी के संसदीय और विधायी निकायों में फूट का मुद्दा उठाया। उन्होंने पार्टी के खाते में सभी वित्तीय लेनदेन रोकने की मांग की। उन्होंने लिखा, 'यह सर्वविदित है कि पार्टी के निर्वाचित प्रतिनिधियों की एक बड़ी संख्या, जिनमें 28 सांसदों में से 20 और 60 विधायकों में से 58 शामिल हैं, या तो पार्टी छोड़ चुके हैं या खुले तौर पर विद्रोह कर चुके हैं। अरूप बिस्वास की इस मांग ने एक और विवाद पैदा कर दिया है।
पश्चिम बंगाल के मंत्री तापस रॉय ने टीएमसी नेता अरूप बिस्वास पर तंज कसा है। बीजेपी नेता ने कहा कि जिसके पास भी जबरन वसूली का पैसा है, वही 'कोषाध्यक्ष' है। टीएमसी में ऐसे कई कोषाध्यक्ष हैं। राज्य मंत्री तापस रॉय ने कहा कि इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। टीएमसी आपस में लड़ रही है, इसका क्या मतलब है। उनकी राजनीति गंदी है और यह कोई नई बात नहीं है।
ममता बनर्जी के PSO को हटाए जाने पर TMC सांसद सौगत रॉय ने कहा कि हाल ही में उन्होंने दो सुरक्षाकर्मियों को बुलाया जो लंबे समय से ममता के साथ हैं और उनसे पूछताछ की। हो सकता है कि उन्हें बदल दिया जाए। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं। इसलिए हम इसे राज्य की ओर से बहुत ही गैर-दोस्ताना कदम मानते हैं।
TMC के अंदर राजनीतिक मतभेद पर कहा कि जो लोग अलग हुए हैं, वे अपने साथ 100 लोग भी नहीं जुटा पाएंगे। इसलिए उनका कोई महत्व नहीं है। इनमें से कोई भी सांसद अपने दम पर 10,000 वोट भी नहीं पा सकता।
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा हटाए जाने पर पश्चिम बंगाल के मंत्री तापस रॉय ने कहा कि सुरक्षाकर्मियों का तबादला या प्रतिस्थापन किया गया होगा।
बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा से हारने के बाद से तृणमूल पार्टी आंतरिक कलह से जूझ रही है। ममता बनर्जी की पार्टी जो 15 साल से सत्ता में रही इस बार करारी हार का सामना करना पड़ा। 294 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा के 200 से अधिक सीटें जीतने के मुकाबले उसे केवल 80 सीटें ही मिलीं। हार के तुरंत बाद तृणमूल सांसदों और विधायकों के एक समूह ने पार्टी पर हमला करना शुरू कर दिया। बनर्जी के नेतृत्व और उनके भतीजे पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के हाथों में सत्ता के केंद्रीकरण की आलोचना की।