West Bengal Politics: मुर्शिदाबाद में हुमायूं कबीर ने 'मिशन बाबरी' का आगाज कर दिया है। योगी आदित्यनाथ के 'कयामत' वाले बयान के बीच 1200 हाफिज और हजारों समर्थकों के साथ मस्जिद निर्माण की ईंट रखी गई।
Humayun Kabir: पश्चिम बंगाल की राजनीति में 2026 के विधानसभा चुनाव (West Bengal Election 2026) से पहले एक नया और बड़ा धार्मिक मोड़ आ गया है। पूर्व टीएमसी विधायक और अब जनता उन्नयन पार्टी (JUP) के अध्यक्ष हुमायूं कबीर (Humayun Kabir) ने अपने विवादित 'मिशन बाबरी' को धरातल पर उतारना शुरू कर दिया है। 11 फरवरी 2026 को मुर्शिदाबाद के रेजीनगर में बाबरी मस्जिद (Mission Babri Masjid) जैसी दिखने वाली एक भव्य मस्जिद का निर्माण कार्य आधिकारिक रूप से शुरू हो गया। इस आयोजन में हुमायूं कबीर ने अपनी सियासी ताकत का भी जम कर प्रदर्शन किया। सुबह 10 बजे से ही करीब 1200 हाफिजों और मौलवियों ने कुरान का पाठ किया। इसके बाद दोपहर 12 बजे हजारों लोगों की मौजूदगी में औपचारिक रूप से मस्जिद की पहली ईंट रखी गई। कबीर का दावा है कि यह मस्जिद हूबहू अयोध्या की बाबरी मस्जिद जैसी होगी और इसे बनाने में करीब 50 से 55 करोड़ रुपये की लागत आएगी। करीब 7 बीघा जमीन पर बन रही इस मस्जिद में एक साथ 10,000 लोग नमाज पढ़ सकेंगे। कबीर ने ऐलान किया है कि यह काम अगले दो बरसों में पूरा कर लिया जाएगा।
यह पूरा घटनाक्रम सिर्फ एक इमारत बनाने तक सीमित नहीं है। जानकारों का मानना है कि इसके जरिये हुमायूं कबीर बंगाल के मुस्लिम बहुल इलाकों, खासकर मुर्शिदाबाद और मालदा में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं। जहां एक तरफ टीएमसी ने इस मुद्दे से खुद को अलग कर लिया है, वहीं बीजेपी इसे ममता सरकार की तुष्टीकरण की राजनीति का परिणाम बता रही है।
इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी अपने चरम पर है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 10 फरवरी को बाराबंकी की एक रैली में हुमायूं कबीर के इस प्रोजेक्ट पर तीखा हमला बोला था। योगी ने कहा था, "बाबरी मस्जिद अब कभी नहीं बनेगी, कयामत तक नहीं।"इस पर पलटवार करते हुए हुमायूं कबीर ने निर्माण शुरू होने के मौके पर कहा, "यह मुर्शिदाबाद है, अयोध्या नहीं। यहां हमारे काम को कोई हाथ नहीं लगा सकता। अगर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मंदिर बन सकता है, तो हम अपनी जमीन पर मस्जिद क्यों नहीं बना सकते? यह मस्जिद बनकर रहेगी।"
हुमायूं कबीर ने साफ कर दिया है कि उनका निशाना 2026 का विधानसभा चुनाव है। उन्होंने ऐलान किया है कि उनकी पार्टी 135 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। टीएमसी से सस्पेंड होने के बाद कबीर अब मुस्लिम वोटों को एकजुट करके ममता बनर्जी के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश में हैं। उन्होंने विरोधियों को खुली चुनौती दी है कि अगर उन्हें रोका गया, तो वे सत्ता समीकरण बदल देंगे। फिलहाल, इस मस्जिद के निर्माण को लेकर स्थानीय प्रशासन और सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
मस्जिद निर्माण के शोर के बीच हुमायूं कबीर के परिवार पर कानूनी शिकंजा भी कसता जा रहा है। हाल ही में एक ड्रग्स मामले में उनकी बेटी के ससुर की 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति जब्त की गई है। इसके अलावा, मस्जिद के लिए आ रहे 55 करोड़ रुपये की फंडिंग पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप लग रहे हैं कि पैसा मिडिल ईस्ट और बांग्लादेश के रास्तों से आ रहा है। हालांकि, कबीर ने इसे विरोधियों की साजिश करार दिया है।