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बदला-बदला बंगाल, बीजेपी के रंग में रंगे शहर-गांव

West Bengal In BJP Colours: पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने के बाद राज्य बदल गया है। शहर-गांव अब बीजेपी के रंग में रंगे नज़र आ रहे हैं।
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Jul 10, 2026
BJP flags
बीजेपी के झंडे (File Photo)

पश्चिम बंगाल (West Bengal) में एक समय ऐसा था जब किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि राज्य में किसी दिन बीजेपी (BJP) की सरकार बनेगी, लेकिन इस साल हुए विद्यानसभा चुनाव में बीजेपी ने बंपर जीत के साथ पहली बार राज्य में सरकार बनाई और शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) सीएम बने। बीजेपी की सरकार बनने के बाद राज्य में बहुत कुछ बदल गया है। कोलकाता की तंग गलियों से लेकर उत्तर और दक्षिण बंगाल के गांवों तक राजनीतिक माहौल बदलता नज़र आ रहा है। कभी तृणमूल कांग्रेस - टीएमसी (Trinamool Congress - TMC) के झंडों और ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के पोस्टरों से सजे रहने वाले क्लब, चौराहे और मोहल्ले अब बीजेपी के झंडों के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और सीएम मुख्यमंत्री शुभेंदु के पोस्टरों से सजे दिखाई दे रहे हैं।

बीजेपी के रंग में रंगे शहर-गांव

बंगाल की सियासत हमेशा से देश के दूसरे राज्यों से अलग रही है। यहाँ सत्ता की असली ताकत सिर्फ विधानसभा या पंचायतों में नहीं, बल्कि स्थानीय क्लबों और ‘पाड़ा (मोहल्ला) क्लबों’ में भी दिखाई देती है। बीजेपी के सत्ता में आने के बाद इन क्लबों पर उसका प्रभाव तेज़ी से बढ़ा है। इसकी झलक ममता के पुराने राजनीतिक गढ़ कालीघाट में साफ दिखाई देती है। कालीघाट में दीवारों पर टीएमसी के पुराने नारे और पेंटिंग अब भी मौजूद हैं, लेकिन गलियों, बाजारों और मोहल्लों में बीजेपी के झंडे, बैनर और पोस्टर की मौजूदगी ज़्यादा नज़र आती है। पूरे राज्य में ज़्यादातर शहरों और गांवों में ऐसा ही देखने को मिल रहा है। बंगाल में अब शहर और गांव बीजेपी के रंग में रंगे नज़र आ रहे हैं।

क्लब का रंग बदलना मतलब बंगाली मानुष का भरोसा बदलना

बदलाव की दूसरी तस्वीर कोलकाता से करीब 70 किलोमीटर दूर उत्तर 24 परगना के बशीरहाट रेलवे स्टेशन के बाहर दिखाई दी। विधानसभा चुनाव में यहाँ टीएमसी ने जीत ज़रूर दर्ज की, लेकिन स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने स्थित एक प्रमुख क्लब अब पूरी तरह बीजेपी के रंग में रंगा नज़र आ रहा है। यहाँ पीएम मोदी और सीएम शुभेंदुके बड़े पोस्टर लगे हैं। स्टेशन के बाहर ऑटो चालक नंदू बनर्जी ने इस बारे में बात करते हुए कहा, "यह बदलाव सिर्फ झंडे और पोस्टर का नहीं है। यहाँ क्लब ही इलाके की राजनीतिक ताकत का सबसे बड़ा संकेत माना जाता है। चुनाव नतीजों के बाद यहाँ हिंसा और गोलीबारी भी हुई थी। ऐसे में क्लब का रंग बदलना, बंगाली मानुष का भरोसा बदलना है।"