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12 साल बाद पश्चिमी घाट को मिलेगी सुरक्षा, मोदी सरकार ‘इकोलॉजिकली सेंसिटिव एरिया’ की घोषणा के लिए तैयार

Ecologically Sensitive Area: भारत का पश्चिमी घाट जैव विविधिता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। इस इलाके को कानूनी सुरक्षा देने के लिए सरकार जल्द ही 'इकोलॉजिकली सेंसिटिव एरिया' की घोषणा कर सकती है। पढे़ं पूरी खबर...

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Jun 22, 2026
India's Western Ghats
भारत का पश्चिमी घाट (फोटो- X- @incredibleindia)

Western Ghats: केंद्र की मोदी सरकार 12 साल बाद पश्चिमी घाट के संवेदनशील इलाकों को सुरक्षा देने के लिए कानून बनाने जा रही है। पश्चिमी घाट के तीन राज्यों में जल्द ही इकोलॉजिकली सेंसेटिव एरिया की घोषणा की जाएगी। साथ ही, इसे लेकर अधिसूचना जारी होने वाली है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के मुताबिक जिन जिन राज्यों में ESA को लेकर सहमति बन गई है। वहां अलग-अलग नोटिफिकेशन निकाला जाएगा।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व इसरो चेयरमैन के. कस्तूरीरंगन की अगुवाई वाली कमेटी ने साल 2013 के आधार पर मोदी सरकार को 6 राज्यों के में 56,000 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा जमीन को 'इकोलॉजिकली सेंसेटिव एरिया' घोषित करने का प्रस्ताव दिया है।

साल 2014 में ड्राफ्ट नोटिफिकेशन लेकर आई थी मोदी सरकार

ESA को लेकर मोदी सरकार 2014 में ड्राफ्ट नोटिफिकेशन लेकर आई थी, लेकिन तब से लेकर अब तक इसमें पांच बार बदलाव किए गए हैं, लेकिन अभी तक सभी राज्य सरकारों के साथ केंद्र सरकार की असहमति पूरी तरह से दूर नहीं हो पाई है। गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा में बात लगभग पक्की हो चुकी है। तमिलनाडु में भी ज्यादा विवाद नहीं है। मामला केरल और कर्नाटक में फंसा हुआ है। केरल चाहता है कि उसके इलाके को और कम किया जाए, जबकि कर्नाटक की सरकार इस पूरे प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर रही है।

साल 2024 में जारी छठे और आखिरी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में कुल 56,825.7 वर्ग किलोमीटर इलाके को ESA के तौर पर चिन्हित करने का प्रस्ताव था। यह कस्तूरीरंगन के मूल प्रस्ताव से छोटा है, जिसमें चिन्हित भूमि करीब 60,000 वर्ग किलोमीटर थी। नए ESA को लागू करने में गुजरात सबसे आगे है। राज्य ने 449-470 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को ESA घोषित करने पर सहमति जता दी है। महाराष्ट्र ने करीब 17,340 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को ESA घोषित करने पर हामी भरी है।

'पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986' के तहत इलाके को बचाने में होगी आसानी

जब ESA अन्य राज्यों में कानूनी रूप लेगा तो 'पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986' के तहत पश्चिमी घाट के नाजुक और जैव-विविधता वाले इलाके को बचाने में आसानी होगी। उन गतिविधियों पर रोक लगेगी जिनसे इस इलाके के संवेदनशील पर्यावरण को खतरा हो सकता है। इसके साथ ही, नई माइनिंग और पत्थर निकालने वाले प्रोजेक्ट, थर्मल पावर प्लांट, प्रदूषण फैलाने वाली 'रेड-कैटेगरी' की इंडस्ट्रीज व अन्य पर कड़ी पाबंदियां भी लगाई जाएंगी।

क्या है पश्चिमी घाट?

भारत का पश्चिमी घाट गुजरात से शुरू होकर केरल तक जाता है। पश्चिमी घाट दुनिया के आठ प्रमुख जैव विविधता हॉटस्पॉट में शामिल है। इसमें इसमें पेड़-पौधों और जानवरों की सैकड़ों प्रजातियां पाई जाती हैं, जिसके कारण यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर का दर्जा दिया है। यह भारत के लगभग 1,600 किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई है। घने जंगल होने की वजह से कार्बन डाइऑक्साइड सोखते हैं और ऑक्सीजन देते हैं। वहीं, मॉनसून पैटर्न को स्थिर रखने में मदद करते हैं। यह कृष्णा, गोदावरी, कावेरी, मांडवी, पेरियार और शरावती जैसी पश्चिम की ओर बहने वाली कई नदियों का स्रोत भी है, इसलिए इसे प्रायद्वीपीय भारत का 'वॉटर टावर' कहा जाता है।

Published on:
22 Jun 2026 07:28 am
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