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EWS quota: गरीब का बच्चा IAS-IPS बने, इसके लिए मोदी सरकार ने बनाया था सिस्टम, पैसे वालों ने किया घपला

EWS reservation civil services: सिविल सेवा की परीक्षा में EWS कोटे से पास होने वाले अभ्यर्थियों के पात्रता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर...

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UPSC (फोटो- IANS)

EWS quota UPSC: मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान 7 जनवरी 2019 को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 10 फीसदी आरक्षण कोटे को मंजूरी दी। 8 व 9 जनवरी को संसद में इसे पारित किया गया। 14 जनवरी 2019 को यह लागू हो गया। EWS कोटा संसद के 103वें संवैधानिक संशोधन के तहत आया। इसमें अनुच्छेद 15 (6) और 16 (6) जोड़े गए। इसका मकसद सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों (वार्षिक आय ₹8 लाख से कम) को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में 10% आरक्षण देकर आर्थिक असमानता दूर करना, बिना जाति के आधार पर गरीबों को अवसर प्रदान करना है। यह मौजूदा 50% आरक्षण से अलग, आर्थिक आधार पर पहला बड़ा कदम था।

EWS कोटे का उठाया फायदा

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के तहत आने वाले कई अभ्यर्थियों ने 2025 की सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की है। सुरक्षा गार्ड व रेवले कुली के बच्चों ने सबसे बड़े इम्तिहान में सफलता पाई, लेकिन इस कोटे से आने वाले कई अभ्यर्थी ऐसे हैं। जिनकी सामाजिक और आर्थिक पृष्ठि भूमि बिल्कुल अलग है। EWS कोटे का लाभ लेते हुए वे अभ्यर्थी भी चयनित हुए, जो IIT, DU और निजी स्कूलों व कोचिंग सेंटरों में पढ़ें। इन निजी कोचिंग सेंटरों की फीस लाखों में है।

EWS कोटे को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा

सिविल सेवा परीक्षा 2025 में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए निर्धारित 10 फीसदी आरक्षण के तहत कुल 104 उम्मीदवारों का चयन हुआ। इंडियन एक्सप्रेस की इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट के मुताबिक UPSC 2025 में कई ऐसे अभ्यर्थी पास हुए जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर नहीं थी। सोशल मीडिया पर भी EWS कोटे के तहत चयनित अभ्यर्थियों के डिटेल्स भी वायरल हुए। इसके बाद से संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के कुछ हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि EWS प्रमाणपत्र जारी करने के नियमों को सख्त बनाने और पात्रता जांच परख की प्रक्रिया को मजबूत व पारदर्शी करने की जरूरत है।

67 उम्मीदवार ऐसे जिन्होंने महंगी फीस देकर पढ़ाई की

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक EWS कोटे के 104 में से 67 ऐसे उत्तीर्ण अभ्यर्थी हैं, जिन्होंने दिल्ली और दूसरे शहरों के जाने-माने कोचिंग इंस्टीट्यूट में पढ़ाई की। जहां की फीस सालाना 2.50 लाख रुपए से अधिक है। वहीं, कई उत्तीर्ण अभ्यर्थी मल्टीनेशनल कंपनी में भी काम कर चुके हैं। जहां उनकी सालाना आमदनी भी अपर मीडिल क्लास लेवल की थी।

कम से कम 67 उम्मीदवारों ने दिल्ली और दूसरे शहरों के जाने-माने कोचिंग इंस्टीट्यूट में पढ़ाई की, जिनमें 'वाजीराम एंड रवि', 'वाजीराव एंड रेड्डी' और 'दृष्टि IAS' शामिल हैं। इन जगहों पर सालाना फ़ीस 2.65 लाख रुपये तक हो सकती है।

कुल मिलाकर, 104 में से कम से कम 84 उम्मीदवारों ने सिविल सर्विस की फॉर्मल कोचिंग ली। इनमें से कई ने 'फ़ोरम IAS', 'नेक्स्ट IAS', 'किंगमेकर्स IAS' और 'UPSC वाला' जैसे कई इंस्टीट्यूट में पढ़ाई की। इस गिनती में वे लोग शामिल नहीं हैं जिन्होंने सरकार या यूनिवर्सिटी द्वारा चलाए जा रहे प्रोग्राम में हिस्सा लिया था। कम से कम 46 उम्मीदवारों ने नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) और लखनऊ, रायपुर और जयपुर जैसी राज्य की राजधानियों के प्राइवेट स्कूलों से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की।

मजदूर और सिक्योरिटी गार्ड के बच्चे भी हुए पास

हालांकि, उसी लिस्ट में ऐसे उम्मीदवार भी शामिल हैं। जो इस स्कीम के मकसद के हिसाब से सही हैं। एक उम्मीदवार सेना के रिटायर्ड जवान (अब सिक्योरिटी गार्ड) का बेटा है। दूसरा उम्मीदवार स्कूल बस कंडक्टर का बेटा है। एक महिला उम्मीदवार रेलवे कुली की बेटी हैं।

लोगों का कहना है कि महंगी कोचिंग लेने और प्राइवेट स्कूलिंग का खर्च उठाने वाले EWS कोटे का नाजायज फायदा उठा रहे हैं। इसमें सुधार की जरूरत है। उनका कहना है कि अगर अच्छी आर्थिक स्थिति वाले लोग इस फायदे को हथिया लेते हैं, तो EWS आरक्षण का पूरा मकसद ही खत्म हो जाएगा।

बता दें कि EWS आरक्षण 10% है, लेकिन पात्र आबादी इससे कहीं ज्यादा है, इसलिए प्रतिस्पर्धा अधिक रहती है। आंकड़े अनुमानित हैं क्योंकि आय/संपत्ति की सटीक जनगणना नहीं है। आंकड़े समय के साथ बदलते रहते हैं। 2019 की एक रिपोर्ट के मुताबिक 5.15 करोड़ परिवार EWS कोटे में आते हैं।