
संसद में शिवसेना के सांसदों की संख्या बढ़ने पर NDA मे एकनाथ शिंदे की ताकत बढ़ेगी (Photo-IANS)
Shiv Sena Split: ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के बाद अब उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के टूटने की चर्चा तेज है। बताया जा रहा है कि 9 में से 6 सांसद एकनाथ शिंदे के संपर्क में है और जल्द ही शिवसेना में विलय कर सकते है। इनमें संजय दिना पाटिल, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टीकर, ओमराजे नाइक निंबालकर, संजय जाधव और भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल हैं। वहीं अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे अब भी उद्धव ठाकरे के साथ हैं।
यदि छह सांसद शिंदे गुट में शामिल होते हैं तो लोकसभा में उनके सांसदों की संख्या बढ़कर 13 हो जाएगी, जिससे वे महाराष्ट्र से सबसे बड़े संसदीय दलों में शामिल हो जाएंगे। माना जा रहा है कि इसका असर महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है, क्योंकि एनडीए लगातार अपने संख्याबल को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
बता दें कि यदि उद्धव गुट के 6 सांसद शिवसेना में शामिल होते है तो शिंदे की बार्गेनिंग पावर भी बढ़ जाएगी। इस समय मोदी कैबिनेट में फेरबदल की भी चर्चा चल रही है। ऐसे में अटकलें लगाई जा रही है कि शिंदे गुट के सांसदों को कैबिनेट में जगह मिल सकती है और महत्वपूर्म मंत्रालय भी मिल सकता है। इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार में भी शिंदे गुट को अधिक प्रभावशाली विभाग मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लोकसभा सांसदों के बाद उद्धव गुट के विधायक भी अलग राह पकड़ सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, विधानसभा में उनके 20 में से करीब 14 विधायक भी पाला बदल सकते हैं।
एक वरिष्ठ शिवसेना नेता ने कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद कई लोगों ने शिंदे को नकारना शुरू कर दिया था। लेकिन शिंदे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब लोग सोचते हैं कि लड़ाई खत्म हो गई है, तब भी वह पासा पलटना जानते हैं। शिंदे ने एक शानदार चाल चली है।
लोकसभा में नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के 12 सांसद है और छठी सबसे बड़ी पार्टी है। वहीं एनडीए की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है। इसके अलावा एकनाथ शिंदे की पार्टी के 7 सांसद है। यदि उद्धव गुट के 6 सांसद शिवसेना में शामिल हो जाते है, तो पार्टी में सांसदों की संख्या 13 हो जाएगी, जो कि जदयू से ज्यादा है। इस तरह वह सदन में शिवसेना के जदयू से ज्यादा सांसद हो जाएंगे।
उद्धव ठाकरे के लिए यह झटका इसलिए भी बड़ा है क्योंकि उनकी पार्टी के अंदर से ही उन्हें और आदित्य ठाकरे को पूरे महाराष्ट्र में सक्रिय होने की सलाह दी जाती रही है। आदित्य ने हाल ही में राज्यभर का दौरा शुरू किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर संगठन को फिर से खड़ा करने के लिए शायद उनके पास पर्याप्त समय नहीं है। शिंदे गुट का दावा है कि उद्धव के कुछ विधायक भी भविष्य में उनके साथ आ सकते हैं।
Published on:
19 Jun 2026 09:51 am
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