फ्लाइट के बोर्डिंग पास पर 'आरआर' देखकर अक्सर ही लोगों को घबराहट हो जाती है। क्या होता है इसका मतलब और क्या इसे देखकर चिंता करना सही है? आइए जानते हैं।
फ्लाइट पकड़ने से ठीक पहले अगर आपके बोर्डिंग पास पर ‘आरआर’ लिखा दिख जाए, तो घबराहट होना स्वाभाविक है। कई यात्रियों को लगता है कि कहीं उनका सामान या यात्रा संदिग्ध तो नहीं। लेकिन हकीकत में यह एक सामान्य सुरक्षा प्रक्रिया है। ‘आरआर’ का मतलब होता है 'रैंडम रिव्यू' या 'रैंडम रेफरल' यानी आपको अतिरिक्त जांच के लिए रैंडम तरीके से चुना गया है। यह प्रक्रिया भारत के विमानन सुरक्षा ढांचे का हिस्सा है और इसका उद्देश्य सुरक्षा को मज़बूत बनाना है, न कि किसी यात्री को परेशान करना।
बोर्डिंग पास पर 'आरआर' आने का यह मतलब नहीं है कि आप संदेह के दायरे में हैं। ‘आरआर’ का मतलब यह नहीं कि आपने कुछ गलत किया है। यह पूरी तरह से एक रैंडम प्रक्रिया है, जिसमें कुछ यात्रियों को अतिरिक्त जांच के लिए चुना जाता है। यह चयन किसी व्यक्ति के व्यवहार, टिकट या पहचान पर आधारित नहीं होता।
एयरपोर्ट सिस्टम एक एल्गोरिदम के ज़रिए यात्रियों का चयन करता है। इसका उद्देश्य सुरक्षा में अनिश्चितता बनाए रखना है, ताकि कोई भी संभावित खतरा रोका जा सके। आमतौर पर कुल यात्रियों में से 2% से भी कम लोग ही इस प्रक्रिया में आते हैं।
ऐसे यात्रियों को अतिरिक्त फ्रिस्किंग, बैगेज जांच या दस्तावेज सत्यापन से गुज़रना पड़ सकता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर बोर्डिंग गेट या तय सुरक्षा क्षेत्र में होती है लेकिन ज़्यादा समय नहीं लेती। इसके लिए समय से पहले एयरपोर्ट पहुंचना और सहयोग करना ज़रूरी है।
नहीं, यह प्रक्रिया घरेलू उड़ानों पर भी लागू हो सकती है, हालांकि यह प्रक्रिया इंटरनेशनल फ्लाइट्स के लिए ज़्यादा देखी जाती है। भारत के सभी बड़े एयरपोर्ट्स पर यह नियम लागू है और इसका मकसद अवैध सामान या मुद्रा के परिवहन को रोकना है।