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Cockroach Janata Party के समर्थन में अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव सहित कई बड़े नेता, बोले- ‘हम युवाओं की मांगों के साथ हैं’

Cockroach Janta Party Protest: जंतर-मंतर पर हुए CJP प्रदर्शन को अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव, उद्धव ठाकरे, रोहित पवार और महुआ मोइत्रा का समर्थन मिला। विपक्षी नेताओं ने युवाओं की मांगों का समर्थन करते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की मांग उठाई।

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भारत

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Anurag Animesh

Jun 06, 2026

Cockroach Janta Party

Cockroach Janta Party Protest (Image: CJP/X)

Cockroach Janta Party Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को कई विपक्षी दलों और नेताओं का समर्थन मिला है। परीक्षा संबंधी कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर हुए इस आंदोलन के समर्थन में आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे, एनसीपी (शरद पवार गुट) के नेता रोहित पवार और तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा खुलकर सामने आए हैं।

इन नेताओं ने कहा कि देश के युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और सरकार को उनकी मांगों पर ध्यान देना चाहिए।

केजरीवाल ने केंद्र सरकार को घेरा

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कॉकरोच आंदोलन देश के युवाओं के भीतर मौजूद गहरे गुस्से और निराशा की अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन को राष्ट्रविरोधी बताने के बजाय केंद्र सरकार को युवाओं की समस्याओं और मांगों पर ध्यान देना चाहिए।

केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी युवाओं की मांगों का समर्थन करती है और उनके साथ खड़ी है। उन्होंने प्रधानमंत्री से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल पद से हटाने की मांग भी की।

AAP प्रमुख ने कहा कि सरकार को आंदोलन कर रहे युवाओं की आवाज सुननी चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए।

अखिलेश यादव ने कहा- बदलाव की दस्तक सुनाई दे रही

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि युवाओं की यह आवाज सत्ता तक पहुंचनी चाहिए।

उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि देश का नौजवान अब अपने अधिकारों और भविष्य के लिए खुलकर आवाज उठा रहा है। अखिलेश ने कहा कि बदलाव दरवाजे पर दस्तक दे रहा है और अब युवाओं ने भी इंकलाब का बिगुल फूंक दिया है।

उन्होंने केंद्र सरकार से शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों का स्थायी समाधान निकालने की मांग की।

उद्धव ठाकरे ने युवाओं को बताया देश का भविष्य

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं को कमतर नहीं आंकना चाहिए।

उन्होंने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और भीषण गर्मी में अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरना उनकी गंभीर चिंता को दर्शाता है। ठाकरे ने कहा कि NEET पेपर लीक जैसी घटनाओं ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों को प्रभावित किया है।

रोहित पवार ने उठाई जवाबदेही की मांग

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेता रोहित पवार ने कहा कि प्रदर्शन में युवाओं की भारी भागीदारी यह दिखाती है कि परीक्षा प्रबंधन और शिक्षा व्यवस्था को लेकर असंतोष लगातार बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि NEET और अन्य परीक्षाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए और शिक्षा मंत्री को जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

महुआ मोइत्रा ने भी किया समर्थन

तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने भी आंदोलन का समर्थन किया और इसे आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

हालांकि कांग्रेस के भीतर इस आंदोलन को लेकर अलग-अलग राय सामने आई है। कुछ नेताओं ने इसे प्रतीकात्मक आंदोलन बताया, जबकि पार्टी का आधिकारिक रुख छात्रों के हितों और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर संघर्ष जारी रखने का रहा।

क्यों हो रहा है यह आंदोलन?

कॉकरोच जनता पार्टी का यह प्रदर्शन NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और CBSE मूल्यांकन प्रणाली को लेकर उठे सवालों के विरोध में आयोजित किया गया था।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो।

जंतर-मंतर पर जुटे हजारों छात्र-युवा

शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में छात्र, प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी, युवा और अभिभावक पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान कई लोग तिरंगा झंडा और डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीरें लेकर भी नजर आए।

आंदोलन का नेतृत्व CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने किया। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की।

विपक्षी नेताओं के समर्थन के बाद यह आंदोलन अब केवल छात्रों का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है।