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Shab-e-Qadr 2025: शब-ए-कद्र क्या है, मुसलमानों के लिए क्यों है यह रात खास, जानें इसका महत्व

Shab-e-Qadr 2025: मुस्लिम समुदाय के लिए शब-ए-कद्र की रात का बहुत महत्व है। इस दिन ज्यादातर मस्जिदों में कुरान की तिलावत पूरी होती है। इस रात को मुस्लिम लोग रात को जाग कर इबादत करते है।

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Mar 27, 2025

Shab-e-Qadr 2025: रमजान का पाक महीना पूरा होने जा रहा है। इस दौरान मुस्लिम समाज के लोग रोजा रख रहे है और अल्लाह की इबादत कर रहे है। वर्तमान में रमजान का आखिरी अशरा (अंतिम दस दिन का चरण) चल रहा है। इस अशरे में कुछ रातें बहुत महत्वपूर्ण होती है। जिसे शब-ए-क्रद के नाम जाना जाता है। ध्यान रहे कि रमजान महीने के 21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं या 29वीं तारीख की रात को शब ए कद्र माना जाता है। हालांकि, इसकी सटीक तारीख निश्चित नहीं है, लेकिन ज्यादातर उलेमा 26वें रमजान और 27वीं रात को शब ए कद्र मनाते है।

आज है शब-ए-कद्र

बता दें कि गुरुवार यानि आज रमजान महीने का 26वां रोजा और 27वीं रात है। इसलिए ज्यादातर जगहों पर आज शब-ए-कद्र मनाई जाएगी। शब-ए-कद्र की रात का मुस्लिम लोग अपने गुनाहों के लिए तौबा मांगते है।

क्या होता है शब-ए-कद्र को

मुस्लिम समुदाय के लिए शब-ए-कद्र की रात का बहुत महत्व है। इस दिन ज्यादातर मस्जिदों में कुरान की तिलावत पूरी होती है। इस रात को मुस्लिम लोग रात को जाग कर इबादत करते है। ऐसा माना जाता है कि इस रात के दौरान फरिश्ते धरती पर उतरते हैं । 

मस्जिदों में की जाती है रौशनी

मुस्लिम लोग इस रात को दुआ, नमाज और कुरान पाक की तिलावत में व्यतीत करते है। शब-ए-कद्र की रात को मस्जिदों में रौशनी की जाती है और मुस्लिम इलाकों में भी रौशनी होती है। इस रात का विशेष महत्व इसलिए है, क्योंकि कुरान के अनुसार इसी रात को अल्लाह ने कुरान को पहले नाजिल किया था, और फिर इसे पैगंबर मुहम्मद तक पहुंचाया गया। कुरान में सूरह अल-क़द्र (97वां अध्याय) में इस रात की महिमा का वर्णन है, जिसमें कहा गया है कि यह रात "हज़ार रातों से बेहतर" है।

गरीबों की करें मदद

दरगाह हजरत मीर कुर्बान अली के सज्जादानशीन डॉ.सय्यद हबीब उर रहमान नियाजी ने बताया कि रमजान के आखिरी अशरे में एतिकाफ करना पैगंबर ए इस्लाम की सुन्नत है। माल की जकात अदा करें, सदका-ए-फित्र दे और गरीबों की ज्यादा से ज्यादा मदद करें, ताकि वे भी ईद की खुशियों में शामिल हो सकें।

शब-ए-कद्र सबसे खुशनसीब रात

जयपुर शहर मुफ्ती मोहम्मद जाकिर नोमानी ने बताया कि रमजान में पांच रातें ऐसी आती हैं, जब अपने अल्लाह से खूब दुआएं करनी चाहिए। इन रातों में मुस्लिम समाज के लोग मस्जिदों में और महिलाएं व बच्चे घरों में जाग कर इबादत करते हैं। इन्हीं में से एक रात शब-ए-कद्र होती है, जिसे पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब ने सबसे खुशनसीब रात बताया है।

Published on:
27 Mar 2025 12:43 pm
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