तमिलनाडु चुनाव में बड़ा उलटफेर देखने को मिला। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को कोलाथुर सीट से हार का सामना करना पड़ा। टीवीके उम्मीदवार वीएस बाबू ने करीब 8,795 वोटों से जीत दर्ज की। राज्य में टीवीके ने शानदार जीत दर्ज की और सबसे बड़ी पार्टी बन गई।
Who Is V S Babu: पांच राज्यों के चुनाव परिणाम के बाद सबसे बड़ा उलटफेर बंगाल के साथ-साथ तमिलनाडु में भी देखा गया। चुनाव के दौरान इस बात की उम्मीद की जा रही थी कि तमिलनाडु में एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली DMK सरकार राज्य में वापसी कर सकती है। लेकिन नतीजों के दिन ऐसा कुछ हुआ जिसकी उम्मीद भी नहीं की गई थी। DMK सत्ता से बाहर तो हो गई, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन भी अपना चुनाव हार गए। टीवीके के उम्मीदवार वीएस बाबू ने एमके स्टालिन को चुनाव में हराकर 'जायंट किलर' बन गए। मतगणना की शुरुआत से ही तस्वीर कुछ अलग नजर आने लगी थी। शुरुआती में कुछ राउंड के बाद ही वीएस बाबू ने बढ़त बनाई और फिर पूरे समय आगे ही रहे। अंत में स्टालिन को 8 हजार से ज्यादा मतों से हार का सामना करना पड़ा।
अगर वीएस बाबू की बात करें, तो उनका राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है। 75 साल के बाबू पहले डीएमके पार्टी से ही विधायक रहे हैं। साल 2006 में बाबू डीएमके से विधायक बने थे। उस समय उन्होंने बड़ी जीत दर्ज की थी। पार्टी में उन्हें कई जिम्मेवारी भी दी गई थी। लेकिन बाद में पार्टी के अंदर मतभेद बढ़े और उन्हें जिम्मेदारियों से हटा दिया गया। इसके बाद उन्होंने एआईएडीएमके का दामन थामा। यहां भी कई साल तक पार्टी का काम किया लेकिन फिर 2026 में विजय की पार्टी टीवीके में शामिल हो गए। उन्हें पार्टी की ओर से चुनावी मैदान में एमके स्टालिन के सामने उतार भी दिया गया। जहां उन्होंने 'जायंट किलर' बनकर सीएम और अपने पहले के पार्टी प्रमुख को ही चुनाव में हरा दिया।
इस साल तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में एक्सपर्ट्स यह मान रहे थे कि टीवीके चुनाव में बढ़िया सीट हासिल कर सकती है। लेकिन टीवीके के इस जीत का अंदेशा लोगों को नहीं थी। अंतिम परिणाम के बाद TVK 108 सीटों पर जीत दर्ज करके सबसे बड़ी पार्टी बन गई। DMK 59 सीटों के साथ DMK दूसरे स्थान पर रही। वहीं AIADMK के खाते में 47 सीटें गई। कांग्रेस को 5 सीटें मिली।
गौर करने वाली बात यह भी है कि इस बार मतदान काफी ज्यादा हुआ। 23 अप्रैल को एक ही चरण में हुए चुनाव में करीब 85.10 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई। करूर जिले में तो 92 फीसदी से ज्यादा लोगों ने मतदान किया, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।