असम विधान सभा चुनाव को लेकर सियासी बिसात बिछने लगी है। असम कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष व सांसद गौरव गोगोई अपने सहयोगियों के साथ मिलकर सीएम हिमंत को घेरने के लिए सियासी बिसात बिछाने में जुटे हुए हैं। पढ़ें पूरी खबर...
असम में बीजेपी बीते दस साल से काबिज है, कांग्रेस राज्य में अपनी खोई हुई सियासी जमीन वापस पाने की कोशिश में लगी हुई है। ऐसे में कांग्रेस के पूर्व सीएम तरुण गोगोई के बेटे व जोरहाट से सांसद गौरव गोगोई सीएम हिमंता को सीएम पद से हटाने के लिए रणनीति तैयार करने में जुटे हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस पार्टी अपने दो मुख्य सहयोगियों रायजोर दल और असम जातीय परिषद के साथ रणनीति तैयार कर रही है।
दरअसल, कांग्रेस पार्टी किसान नेता अखिल गोगोई की नेतृत्व वाली रायजोर दल और लुरिनज्योति गोगोई की अगुवाई वाली असम जातीय परिषद के साथ गठजोड़ बनाकर भाजपा और सीएम हिमंता शर्मा के खिलाफ सियासी बिसात बिछा रही है। अखिल और लुरिनज्योति ने बीते कुछ सालों में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत की है। दोनों ही नेता एंटी CAA प्रोटेस्ट के दौरान सुर्खियों में आए थे। उनकी अपील ने असम के लोगों में अच्छा खासा असर किया था। अब वह कांग्रेस के साथ मिलकर आगामी चुनाव का रुख बदलने में जुट गए हैं।
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि न तो रायजोर दल और न ही AJP बड़ी संख्या में सीटें जीत सकते हैं, लेकिन दोनों ही दल बड़ी तादाद में वोट ट्रांसफर जरूर करा सकते हैं। खासकर उन सीटों पर जहां कांग्रेस और बीजेपी की मजबूत सीधी टक्कर होने की संभावना अधिक है। स्थानीय मीडिया में छपी खबरों के अनुसार, प्रदेश कांग्रेस नेताओं का यहां तक मानना है कि अगर कांग्रेस इन पार्टियों के साथ अच्छा तालमेल बिठा पाती है, तो वह बीजेपी से मुकाबला करने के लिए एक मजबूत ताकत बन सकते हैं।
इसके साथ ही, नए सहयोगियों के आने से राज्य में मुस्लिम अल्पसंख्यकों का बड़े पैमाने पर रुझान भी कांग्रेस की तरफ मुड़ सकता है। दिलचस्प बात है कि राज्य में मुसलमानों की आबादी 34 फीसदी है। बीते चुनाव में मुस्लिम मतदाता कांग्रेस से खिसकर बदरुद्दीन अजमल की पार्टी AIUDF की ओर चले गए थे। इससे मुस्लिम वोट बैंक का बिखराव हुआ था और इसका सीधा-सीधा फायदा भाजपा को मिला।
असम की राजनीति को समझने वालों का कहना है कि कांग्रेस सांसद व प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई, अखिल और लुरिनज्योति गोगोई के साथ बेहतर तालमेल बैठा पाते हैं तो पार्टी पिछली बार की तुलना में बेहतर कर सकती है। उन्होंने कहा कि 2021 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी गठबंधन और कांग्रेस खेमे के बीच वोट प्रतिशत का अंतर बहुत ज़्यादा नहीं था। अभी बहुत सारी चीजें बदल रही हैं, लेकिन अगर विपक्षी गठबंधन जल्दी से सब कुछ ठीक कर लेता है, तो वह कड़ी चुनौती दे सकता है।
संसद के शीतकालीन सत्र में प्रियंका के प्रदर्शन के बाद उनकी भूमिका को विस्तार देने के लिए पार्टी के भीतर चर्चा हुई। बाद में गांधी परिवार की सहमति से ही प्रियंका को लेकर पार्टी ने बड़े फैसले किए हैं। उन्हें असम विधानसभा चुनाव की स्क्रीनिंग कमेटी का चेयरमैन बनाया गया है। दरअसल, पार्टी के अंदर ऐसा मानना है कि प्रियंका गांधी संग कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष व सांसद गौरव गोगोई संग रिश्ते बेहतर है। दोनों में सामंजस्य होने का फायदा भी पार्टी को आगामी विधानसभा चुनाव में मिलेगा।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा जिस तरह गांधी परिवार, खासकर राहुल गांधी पर हमला करते हैं, उससे असम विधानसभा चुनाव पार्टी के साथ नेहरू-गांधी परिवार की निजी सियासी लड़ाई बन चुकी है। कांग्रेस असम चुनाव को हर हाल में जीतना चाहती है।
हाल में एक एजेंसी द्वारा किए गए ओपिनियन पोल के मुताबिक आगामी असम विधानसभा चुनाव में NDA को इस चुनाव में 90 सीटें मिलने का अनुमान है। ओपिनियन पोल में भाजपा को 126 सदस्यीय विधानसभा में 69 से 74 सीटें जीतने का अनुमान लगाया गया है। असम गण परिषद आठ से ग्यारह सीटें जीत सकती है, जबकि बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट को आठ से दस सीटें मिलने का अनुमान है।
जबकि, कांग्रेस 25 से 29 सीटें जीतेगी, जबकि ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट, यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल, रायजोर दल, असम जातीय परिषद और सीपीआई (एम) जैसी छोटी पार्टियां शून्य पर सिमट सकती हैं। वोट शेयर के मामले में, भाजपा को 39 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है, जो कांग्रेस के 37 प्रतिशत वोटों से थोड़ा सा अधिक है।
इस सर्वे को लेकर भाजपा सीएम हिमंता ने कहा कि इन अनुमानों का जश्न मनाने का समय अभी नहीं आया है। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण रिपोर्ट आ रही हैं और वे हमें अच्छी स्थिति में दिखा रही हैं, लेकिन मेरा मानना है कि सर्वेक्षण का समय अभी नहीं आया है।