
नीमच. नीमच जिले के कुकड़ेश्वर में इन दिनों सूर्यवंशी कुमरावत तंबोली समाज के इतिहास, परंपरा और गौरव को समेटे एक बेहद भव्य और भावनात्मक आयोजन चल रहा है। समाज के पारंपरिक वंशावली लेखक (राव जी) द्वारा वंशावली पोथी वाचन का कार्य पूरे विधि-विधान के साथ किया जा रहा है। इस अनूठे आयोजन में समाज के सभी गोत्रों के परिवार बढ़-चढकऱ हिस्सा ले रहे हैं। इस कार्य का मुख्य उद्देश्य समाज के लोगों को उनके मूलए पूर्वजों के नाम, और वंश की उत्पत्ति के गौरवशाली इतिहास से अवगत कराना है।
पोथी में दर्ज है परिवार के वंश की जानकारी
रावमानसिंह अपनी प्राचीन पोथियों के माध्यम से हर परिवार की पीढिय़ों का ब्यौरा पढकऱ सुना रहे हैं। इस वाचन के दौरान समाजजन अपने उन पूर्वजों के बारे में भी जान पा रहे हैं, जिनके नाम समय के साथ स्मृतियों से ओझल हो गए थे। समाज का क्या इतिहास है और मूल निकास कहा से हुआ, वंश की उत्पत्ति, सभी गोत्रों के मूल पुरुष और उनके कुल की परंपराओं के बारे में, यह सभी जानकारी प्रामाणिकता के साथ राव जी द्वारा दी जाती है इसी के साथ परिवारों में हुए नए जन्म, विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों की प्रविष्टियां इस पोथी में दर्ज कर रिकॉर्ड को अपडेट किया जा रहा है।
वंशावली करती है समाज को जोडऩे का काम
नगर में रहने वाले सूर्यवंशी कुमरावत तंबोली समाज के 500 से अधिक परिवार हैं। परिवारों के लिए यह अवसर किसी उत्सव से कम नहीं है। पिछले एक माह से प्रतिदिन शाम के समय में सामाजिक मूल कार्य पान की पनवाड़ी और अपने नित्य काम पूरा कर समस्त परिवारजन के साथ एक स्थान पर एकत्रित होकर रावमानसिंह का स्वागत सत्कार करने के पश्चात कुल की जानकारी प्राप्त कर रहे है। आज के आधुनिक युग में जहां लोग अपनी जड़ों को भूलते जा रहे हैं, ऐसे समय में रावमानसिंह द्वारा किया जा रहा यह वंशावली वाचन समाज को आपस में जोडऩे और अपनी समृद्ध विरासत पर गर्व करने का एक अनूठा जरिया है। इससे पारिवारिक रिश्ते और सामाजिक ताना-बाना और अधिक मजबूत हो रहा है।
मध्यप्रदेश और राजस्थान में अधिक समाजजन
रावमानसिंह ने बताया कि पोथी वाचन करते हुए मुझे आज 25 दिन हो चुके है। श्री सूर्यवंशी कुमरावत तंबोली समाज धर्मशाला में समाज की देख रेख में सभी साधन संपन्न, समाज बंधुओं ने ठहरने उत्तम व्यवस्था की है। नगर में अब तक 100 परिवार ने वंशावली वाचन लेखन का लाभ लिया है। आगामी महीने डेढ़ महीने तक और चलने का मेरा अनुमान है। उन्होंने बताया कि पूर्व में मेरे परिवार से मेरे काका, दादा यह कार्य करते थे। अभी करीब चार पांच साल से मैं श्री सूर्यवंशी कुमरावत तंबोली समाज में पोथी वाचन कर रहा हूं। तंबोली समाज के सम्पूर्ण राजस्थान, मध्य प्रदेश में मालवा क्षेत्र के यजमान मेरे पास है।