MP News: फर्जी हुस्न के जाल ने ली युवक की जान तो सामने आई पुलिस-अपराधी के गठजोड़ की सच्चाई....।
MP News: मध्यप्रदेश के नीमच जिले के जावद में एक युवक के सुसाइड केस में जो खुलासा हुआ है उसने पुलिस और अपराधी के गठजोड़ की कलई खोल दी है। युवक के सुसाइड का ये केस सिर्फ एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि पुलिस और अपराधियों के खतरनाक मिलन की वह काली कहानी है जिसने पूरे जिले की कानून व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इंस्टाग्राम पर लड़कियों के नाम से फर्जी आईडी बनाकर युवकों को फंसाने और ब्लैकमेल करने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ तो पुलिस भी दंग रह गई, क्योंकि इस गिरोह का मुखिया पंकज धनगर खुद को पुलिसिया रुतबा दिखाते हुए सालों से खुलेआम घूम रहा था।
अपराधी पंकज और पुलिस के खतरनाक मिलन की कहानी बताने से पहले 18 साल के मोहित के बारे में जानना बेहद जरूरी है। मनासा थाने के ग्राम बर्डिया जागीर के रहने वाले मोहित ने दो दिन पहले सोमवार 8 दिसंबर को खुदकुशी कर ली थी। पुलिस की तफ्तीश में पता चला कि 7 दिसंबर की रात दो व्यक्ति सफेद कार से गांव पहुंचे थे। मृतक मोहित को फर्जी इंस्टाग्राम पर महिला आईडी से हुई चैटिंग दिखाकर डराया-धमकाया था। उससे रुपए की मांग की गई थी। दोनों ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर मोहित को प्रताड़ित किया था। जिसके कारण मोहित दबाव में आ गया और उसे लगा कि माता-पिता की बदनामी होगी लिहाजा उसने जान दे दी। पुलिस ने मोहित सुसाइड केस का खुलासा 10 दिसंबर को किया और आरोपी पंकज धनगर और कैलाश रेगर ग्राम भाठखेड़ी थाना मनासा को गिरफ्तार किया। मुख्य आरोपी पंकज धनगर है जिसने निकिता के नाम से आईडी बनाकर मोहित को फंसाया था। इतना ही नहीं आरोपी इसी तरह से मंदसौर रतलाम में भी वारदात कर चुके हैं।
निकिता बनकर मोहित को फंसाने वाले पंकज धनगर की गिरफ्तारी के बाद उसके पुलिस के साथ गठजोड़ का सच भी सामने आया है। पंकज की हथियार हाथ में लिए हुए और पुलिस की वॉकी-टॉकी के साथ व कई अधिकारियों व पुलिसकर्मियों के साथ तस्वीरें सामने आई हैं। ये तस्वीरें केवल दिखावे के लिए नहीं थीं बल्कि ये यह संदेश देने के लिए थीं कि उसे कोई छू नहीं सकता है। मुखबिर होने का नाम लेकर वह खुद को पुलिस का खास आदमी बताता घूमता था और इसी की आड़ में उसने अपराध का साम्राज्य खड़ा कर दिया। पंकज ‘निकिता’ नाम से फर्जी आईडी बनाकर मासूम युवकों को फंसाने की घिनौनी साजिशें रचता और फिर वसूली करते समय खुद को कभी लड़की का भाई तो कभी पुलिस अधिकारी बताता । उसका साथी कैलाश रेगर भी इस खेल में उसका साथ देता था।
यह खुलासा जितना अपराधियों को बेनकाब करता है, उतना ही पुलिस तंत्र पर भी प्रहार करता है। क्योंकि अपराधी पुलिस की वॉकी-टॉकी लेकर घूम रहा था, हथियारों के साथ उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर थीं, कई पुलिसकर्मियों के साथ सेल्फियां थीं। क्या पुलिस को ये सब दिखाई नहीं दिया ? इतना ही नहीं क्या पुलिस ये भी नहीं समझ पाई कि जिसे वो मुखबिर कहकर संरक्षण दे रही है वो कानून के साथ खिलवाड़ कर रहा है।
घटना के बाद डीआईजी निमिष अग्रवाल ने व्हाट्सएप ग्रुप में सार्वजनिक रूप से निर्देश जारी किए हैं जिनमें लिखा है- “किसी भी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी को ऐसे संदिग्ध व्यक्तियों, मुखबिरों या अपराधियों के साथ फोटो खिंचवाने की अनुमति न दी जाए। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।” यह आदेश बताता है कि पुलिस अब अपने ही तंत्र में छिपे खतरों को पहचानने लगी है।