
नीमच. जिला चिकित्सालय एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही के आरोपों को लेकर चर्चा में है। इस बार मामला एक प्रसूता महिला के उपचार से जुड़ा है, जहां ऑपरेशन के बाद डॉक्टर द्वारा लिखे गए जरूरी इंजेक्शन पूरी रात मरीज को नहीं लगाए गए। घटना सामने आने के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
ऑपरेशन बाद इंजेक्शन भरा, लेकिन लगाया नहीं
बताया गया कि मनासा क्षेत्र के ग्राम अलहेड़ निवासी सीमा धनगर को प्रसव के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 22 जून को उनका ऑपरेशन हुआ था। ऑपरेशन के बाद चिकित्सकों द्वारा निर्धारित दवाइयों और इंजेक्शनों का नियमित रूप से दिया जाना आवश्यक था। आरोप है कि बुधवार रात करीब 9 बजे नर्सिंग स्टाफ मरीज के बेड पर तीन इंजेक्शन और एक दवा की बोतल रखकर चला गया। परिजनों ने कई बार स्टाफ को इंजेक्शन लगाने की याद दिलाई, लेकिन इसके बावजूद पूरी रात कोई कर्मचारी वापस नहीं आया। सुबह जब परिजनों ने देखा कि इंजेक्शन और दवाएं उसी स्थिति में रखी हुई हैं, तो उन्होंने अस्पताल प्रशासन के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया। परिजनों का आरोप है कि यदि समय पर दवाएं नहीं दी जातीं तो मरीज की हालत गंभीर हो सकती थी। उन्होंने इसे सीधे तौर पर नर्सिंग स्टाफ की घोर लापरवाही बताया। प्रसूता सीमा धनगर ने बताया कि ऑपरेशन के बाद उन्हें टांकों में दर्द और उठने-बैठने में परेशानी हो रही है। ऐसे समय में चिकित्सकीय निर्देशानुसार उपचार मिलना बेहद जरूरी था, लेकिन पूरी रात दवाएं नहीं दिए जाने से उन्हें मानसिक और शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि यदि ऐसी लापरवाही किसी गंभीर मरीज के साथ हो जाए तो उसके परिणाम बेहद घातक हो सकते हैं।
हां, हुई है लापरवाही, देंगे नोटिस
मामले की शिकायत अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. महेंद्र पाटिल तक पहुंची। उन्होंने घटना को गंभीर बताते हुए स्वीकार किया कि रात में इंजेक्शन भरकर रख दिए गए थे, लेकिन मरीज को लगाए नहीं गए। उन्होंने कहा कि ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ को तलब कर कारण पूछा जाएगा। साथ ही संबंधित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सिविल सर्जन ने यह भी स्वीकार किया कि जिला अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ की कमी बनी हुई है। सीमित कर्मचारियों के साथ व्यवस्थाएं संचालित की जा रही हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि स्टाफ की कमी किसी भी प्रकार की लापरवाही का औचित्य नहीं बन सकता। मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस घटना ने जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि अस्पताल में उपचार और निगरानी व्यवस्था को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन सुधार के दावे धरातल पर नजर नहीं आते।