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नीमच जिले की मनासा जनपद की 97 पंचायतों में कागजों पर लगे 19,400 पौधे

वास्तविकता में धरातल पर हकीकत कुछ और ही सच्चाई कर रही बयां, अंकुर उपवन योजना में लाखों खर्च, लेकिन अधिकांश पंचायतों में पौधे गायब होने के आरोप
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नीमच

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Mukesh Sharaiya

Jun 26, 2026

Neemuch Breaking News

इस तरह उजाड़ पड़ा क्षेत्र जहां हजारों पौधे लगाने का किया गया दावा।

नीमच. मध्यप्रदेश शासन की पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने की मंशा से संचालित अंकुर उपवन योजना मनासा जनपद क्षेत्र में सवालों के घेरे में नजर आ रही है। दस्तावेजों में मनासा जनपद की 97 पंचायतों में 19,400 पौधे रोपित दिखाए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इससे बिल्कुल अलग बताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों के अनुसार, इक्का-दुक्का पंचायतों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश पंचायतों में पौधे धरातल पर नजर ही नहीं आ रहे हैं।

अंकुर उपवन योजना पर प्रश्नचिह्न
जानकारी के मुताबिक, जनपद पंचायत मनासा के माध्यम से ग्राम पंचायतों में अंकुर उपवन योजना के तहत पौधरोपण, संरक्षण और देखरेख के नाम पर लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। योजना का उद्देश्य पंचायत स्तर पर हरित क्षेत्र विकसित करना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और गांवों में उपवन तैयार करना है, लेकिन कई पंचायतों में कागजों में पौधरोपण और जमीन पर पौधों की अनुपस्थिति ने पूरे क्रियान्वयन पर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

कागजों में 19,400 पौधे, जमीनी हकीकत पर सवाल
सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, मनासा जनपद क्षेत्र की 97 पंचायतों में कुल 19,400 पौधे लगाए जाने का रिकॉर्ड तैयार किया गया है। यदि प्रति पंचायत औसतन 200 पौधे मानें तो अधिकांश पंचायतों में उपवन विकसित होना चाहिए था, लेकिन कई स्थानों पर न तो पौधे दिखाई दे रहे हैं। न ही उनकी सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नजर आते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पौधरोपण सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया। अंकुर उपवन योजना के तहत पंचायतों में पौधों की खरीदीए गड्ढा खुदाई, रोपण, ट्री-गार्ड, पानी और रखरखाव जैसे मदों पर राशि खर्च की जाती है। मनासा जनपद में भी पंचायतों के माध्यम से इस योजना पर लाखों रुपए खर्च होने की बात सामने आ रही है। लेकिन यदि अधिकांश पंचायतों में पौधे ही नहीं हैं, तो यह खर्च किस आधार पर हुआ और उसकी भौतिक पुष्टि किस स्तर पर की गई यह बड़ा सवाल बन गया है।

इक्का-दुक्का पंचायतों को छोड़ अधिकांश जगह पौधे गायब
ग्रामीणों का कहना है कि कुछ पंचायतों में जरूर पौधरोपण दिखाई देता है, लेकिन अधिकांश पंचायतों में पौधे या तो लगाए ही नहीं गए या फिर रोपण के बाद उनकी देखरेख नहीं हुई, जिससे वे नष्ट हो गए। यदि ऐसा है तो संबंधित पंचायतों, जनपद स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों और निगरानी तंत्र की भूमिका भी जांच के दायरे में आती है। योजना को लेकर कई पंचायतो की शिकायत भी की गई है, लेकिन उन शिकायती कागजों पर कार्रवाई आज तक नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है की जनपद क्षेत्र में भौतिक सत्यापन की मांग उठने लगी है। जानकारों का कहना है कि 97 पंचायतों में लगाए गए 19,400 पौधों का पंचायतवार, सत्यापन, खर्च की जांच, पौधों की खरीदी के बिल, रोपण स्थल, फोटो और जियो-टैगिंग रिकॉर्ड की पड़ताल की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि योजना का लाभ वास्तव में धरातल पर पहुंचा या नहीं।

इनका कहना है
मनासा एसडीएम किरण आंजना ने कहा कि अंकुर उपवन योजना में क्या कार्य हुआ है। इसकी जांच करवा लेंगे।
जनपद पंचायत मनासा सीईओ आरिफ खान ने कहा कि योजना के तहत पंचायतों में पौधा रोपण किया गया है। यदि किसी पंचायत में पौधे नहीं लगे हैं या कोई कमी पाई जाती है तो जांच करके कार्रवाई की जाएगी।