
मां की मौके पर मौतए बेटे की इलाज के दौरान तोड़ा दम, सिस्टम हुआ लाचार, एम्बुलेंस के अभाव में घायल को निजी वाहन से किया रेफर
नीमच. जिले की सिंगोली तहसील मुख्यालय पर वार्ड क्रमांक 13 में स्थित एक मकान में सो रहे मां-बेटे पर तीन मंजिला मकान की छत काल बनकर गिरी। तीनों मंजिलों की छत का मलबा गिरने से मां की उसके नीचे दबकर मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसकी कोटा मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत हुई।
हादसे वाले दिन दूसरे कमरे में सोए थे मां-बेटे
सोमवार शाम को हुई बरसात के बाद बिजली गुल होने के बीच मकान में पानी टोकने लगा था। जिस स्थान पर प्रतिदिन मां बेटे सोते थे सोमवार को वहां न सोते हुए दूसरे कमरे में सोने गए जहां काल बनकर यमराज दोनों का इंतजार कर रहे थे। मृत नीलेश का बड़ा भाई रवि धनोतिया लगभग 35 वर्ष हमेशा की तरह उसी कमरे में सो गया था। रात करीब सवा 12 बजे मकान की छत भरभराकर गिर गई। इससे घर में सो रही सौसर बाई पति प्रभुलाल धनोतिया उम्र करीब 62 वर्ष की मलबे में दबकर मौके पर ही मौत हो गई जबकि नीलेश पिता प्रभुलाल धनोतिया 32 वर्ष के सिर व हाथ पैर में गंभीर चोटे आई थी। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों की सहायता से मलबे में दबे दोनों मां-बेटे को बड़ी मशक्कत के बाद मलबे से बाहर निकाला। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां डॉ. ईतेश व्यास ने सौसरबाई को मृत घोषित कर दिया। गंभीर घायल निलेश का प्राथमिक उपचार कर तत्काल रेफर किया। कोटा मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान अल सुबह मौत हो गई।
अखबार बांटकर चलाता था नीलेश घर
दुर्घटना की जानकारी मिलने पर वार्ड क्रमांक 13 स्थित मकान पर तहसीलदार प्रेमशंकर पटेल, प्रभारी सीएमओ कपिलसिंह राजावत, प्रभारी राजस्व निरीक्षक प्रकाश शुक्ला सहित नगर परिषद के कर्मचारी पहुंचे। नीलेश धनोतिया सुबह सुबह अखबार बांटने का काम करता था। दिन में मेडिकल स्टोर पर मजदूरी का काम करके अपना घर चलाता था। बड़ा भाई होटलों पर सफाई कार्य करता था। बताया जा रहा है कि नीलेश पिछले करीब 3 साल से नगर परिषद अध्यक्षए उपाध्यक्ष और सीएमओ से अपने मकान की मरम्मत करवाने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत राशि स्वीकृत करवाने के हेतु आवेदन-निवेदन कर चक्कर काट रहा था। शासन के सिस्टम का हवाला देकर नगर परिषद के जिम्मेदार लोगों ने उसकी सहायता नहीं की। परिणाम दर्दनाक हादसे के रूप में सामने आया। इसमें नीलेश और उसकी मां को अपनी जान गंवानी पड़ी।
जीते जी नहीं मिला पीएम आवास, मरने पर नौ लाख
नीलेश धनोतिया ने पीएम आवास योजना में दो बार आवेदन किया, लेकिन भ्रष्ट सिस्टम के चलते उसकी न तो रसीद दी ओर न ही अनुनय विनय के बाद उसे आवास योजना का लाभ ही मिला पाया। मौत के बाद कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने हादसे में मृत दोनों मां-बेटे के चार-चार लाख और एक लाख रुपए मकान मरम्मत के लिए स्वीकृत किए हैं। एक बार फिर हादसे के बाद प्रशासन ने मुआवजे के नाम का मलहम लगाकर जिम्मेदारी की इतिश्री कर ली। लोगों का कहना है कि जीते जी आर्थिक मदद नहीं मिली अब करने के बाद लाखों रुपए किस काम के। हादसे में मृत मां बेटे के बाद घर में बचे इकलौते शख्स रवि धनोतिया मंद बुद्धि और नासमझ है। अब यह नौ लाख उसके किस काम में आएंगेए जब उसका पूरा घर ही उजड़ गया। अगर समय रहते ढाई लाख मिल जाते तो परिवार पर यह वज्रपात नहीं होता और मां-बेटे भी जीवित होते।
मकान मरम्मत के लिए सभी से किया था निवेदन
नीलेश धनोतिया, उसके अखबार एजेंट और मेडिकल व्यवसाई ने मकान की मरम्मत के लिए राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक संगठन के लोगों से भी कई बार विनती की थी। इसके बावजूद बेरहम प्रशासनिक व्यवस्था ने तो जिम्मेदारी से मुंह फेरे रखा। जहां एक ओर बड़े बड़े धार्मिक आयोजनों में नाम पर करोड़ों रुपए फूंक दिए गए वहीं दूसरी ओर मां-बेटे की मौत ने समाज के मुंह पर करारा तमाचा जड़ा है। इसकी गूंज नगर में चर्चा का विषय बनी हुई है।
दोपहर तीन बजे एक साथ निकली मां बेटे की शवयात्रा
नीलेश की कोटा में उपचार के दौरान मौत हो गई जिसे लेकर सुबह से ही नगर में माहौल गमगीन हो गया। तीन बजे बेटे की लाश आने के बाद दोनों की शव यात्रा उनके निवास से निकली। मिलनसार नीलेश ष्रफ्तारष् के नाम से पहचान रखने वाले अखबार वेंडर को नगर के प्रबुद्धजनों, समाजजनों ने शिरकत कर श्रद्धांजलि दी। विधायक ओमप्रकाश सकलेचा ने भी सिंगोली मुक्तिधाम पहुंचकर दोनों मृत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित की।
दुर्भाग्य कि घायल को निजी वाहन से करना पड़ा रेफर
करीब 15 हजार की आबादी वाले सिंगोली नगर में दो शासकीय एम्बुलेंस सेवा है जिसमें एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की है तो दूसरी नगर परिषद द्वारा संचालित सांसद द्वारा प्रदत्त एम्बुलेंस है। देर रात में स्वास्थ्य केंद्र की एम्बुलेंस डिलीवरी के मरीज को छोडऩे गई थी। ऐसे में आपातकालीन वाहन की स्टीयरिंग पाइप फूटनेे पर नगर परिषद और स्वास्थ विभाग एक दूसरे पर अनदेखी का ठीकरा फोड़ते नजर आए। ऐसे में एम्बुलेस देखरेख के अभाव में धूल खा रही है। बताया जा रहा है कि नगर परिषद द्वारा एंबुलेंस का मेंटेनेंस नहीं करवाने के कारण एम्बुलेंस बंद पड़ी है। ऐसे में आए दिन हो रहे छोटे बड़े हादसों में मरीजों को निजी वाहन से रेफर किया जा रहा है जिसका आर्थिक बोझ भी कई बार मरीजों के परिवार को वहन करना पड़ता है।