
Delhi Administrative Reshuffle: क्या दिल्ली के सरकारी विभागों में सालों से एक ही कुर्सी पर जमे अधिकारियों का एकाधिकार अब खत्म होने जा रहा है? दिल्ली सरकार के वित्त एवं लेखा विभाग से आई एक बड़ी खबर तो इसी तरफ इशारा कर रही है। सरकार ने प्रशासनिक गलियारों में एक बड़ा सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए 52 बड़े अधिकारियों का एक झटके में तबादला कर दिया है।
इस फेरबदल की टाइमिंग और इसके पीछे की रणनीति को लेकर अब चर्चाएं तेज हैं। तबादलों के साथ ही सरकार ने बेहतर परफॉर्मेंस दिखाने वाले 19 अधिकारियों को प्रमोशन का इनाम भी दिया है, जिससे साफ है कि सरकार 'परफॉर्म करो या बाहर जाओ' की नीति पर काम कर रही है।
इस पूरे फेरबदल के पीछे दिलचस्प गणित काम कर रहा था। दरअसल, सरकार के रडार पर ऐसे अधिकारी थे जो पिछले 5 या उससे ज्यादा सालों से एक ही जगह टिके हुए थे। प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि एक ही सीट पर लंबे समय तक रहने से काम में एक ठहराव आ जाता है और कई बार सिस्टम में कमियां पनपने लगती हैं।
इसी 'कंफर्ट जोन' को तोड़ने के लिए सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया। इस लिस्ट में 23 डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स और 29 सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर्स शामिल हैं, जिन्हें तत्काल प्रभाव से नई जगह भेज दिया गया है। वहीं, काम को नई ऊर्जा देने के लिए 19 सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर्स को प्रमोट कर डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स की कुर्सी सौंपी गई है।
इस बड़े एक्शन के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के तेवर बेहद कड़े नजर आ रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कह दिया है कि जनता के पैसों का हिसाब-किताब रखने वाले विभाग में किसी भी तरह की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
'इस बदलाव का सीधा मकसद विभाग में नई एनर्जी लाना और पारदर्शिता को बढ़ाना है। सरकारी फाइलों और योजनाओं के क्रियांवयन में कोई ढिलाई नहीं होनी चाहिए। जनता को एक जवाबदेह और पारदर्शी सिस्टम देना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।'
सरकार के इस फैसले को केवल रूटीन ट्रांसफर के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसके दूरगामी परिणाम होने वाले हैं।
वित्तीय प्रबंधन में तेजी: नए अधिकारियों के आने से रुकी हुई फाइलें तेजी से आगे बढ़ेंगी।
भ्रष्टाचार पर लगाम: सीटों के बदलने से किसी भी तरह के 'नेक्सस' या सांठगांठ की गुंजाइश खत्म होगी।
योजनाओं का सही क्रियान्वयन: बजट का सही इस्तेमाल समय पर हो सकेगा, जिससे आम जनता को सीधे फायदा पहुंचेगा।
सरकार ने सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी अधिकारी बिना किसी बहानेबाजी के तुरंत अपनी नई पोस्टिंग संभालें। अब देखना यह होगा कि इस प्रशासनिक सर्जरी के बाद दिल्ली सरकार के कामकाज की रफ्तार में कितना सुधार आता है।