नई दिल्ली

दिल्ली में बड़े ‘खेल’ का खुलासा! जांच में सामने आई पुलिस की लापरवाही, इन अफसरों पर गिर सकती गाज

Vasant Kunj Police Station: दिल्ली के वसंत कुंज थाने से 680 जरूरी दस्तावेज गायब हो गए। इनमें 47 चार्जशीट, 544 अनट्रेस रिपोर्ट और 92 कैंसिलेशन रिपोर्ट शामिल हैं।
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680 important documents missing from Vasant Kunj police station in Delhi
दिल्ली के वसंत कुंज थाने से गायब हो गए दस्तावेज।

Vasant Kunj Police Station: दिल्ली में ऑडिट के दौरान बड़े 'खेल' का खुलासा हुआ है। इसके बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मचा है। पुलिस अफसरों ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग का मामला दर्ज कराया है। इसके बाद जांच अधिकारियों पर निलंबन और बर्खास्तगी की तलवार लटक रही है। फिलहाल अधिकारियों ने सभी जांच अधिकारियों को बुलाया है। ताकि इस मामले का हल निकाला जा सके। पुलिस सूत्रों का कहना है कि थाने के मालखाने से दस्तावेजों का गायब होना मामूली लापरवाही नहीं है। यह सभी दस्तावेज पुलिस रिकॉर्ड के लिए बेहद जरूरी थे।

दिल्ली के वसंत कुंज थाने का मामला

दरअसल, दिल्ली के वसंत कुंज थाने के मालखाने से विभिन्न मामलों से जुड़ी करीब 680 फाइलें गायब हो गई हैं। इसका खुलासा ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है। इसके बाद अधिकारियों में हड़कंप की स्थिति बन गई। आनन-फानन में फाइलों की खोजबीन में बड़ा स्टाफ लगाया गया, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली। इसके बाद एक इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी की शिकायत पर वसंत कुंज थाने में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की FIR दर्ज की गई। यह फाइलें जिन जांच अधिकारियों के लिए जारी की गई थीं, पुलिस अधिकारियों ने उन्हें बुलाया है। ताकि मामले की सच्चाई सामने आ सके।

680 फाइलें गायब होने से मचा हड़कंप

दिल्ली पुलिस के सूत्रों का कहना है कि आमतौर पर जांच अधिकारी संबंधित फाइलों को अपने साथ घर लेकर चले जाते हैं। जो बाद में मिल जाती हैं, लेकिन इस बार काफी खोजबीन के बाद भी ये फाइलें नहीं मिलीं। इससे हड़कंप मचा हुआ है। इस मामले की जांच के लिए एक इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी को लगाया गया है। इसके पहले सभी जांच अधिकारियों को गुम फाइलें खोजने के लिए कहा गया था, लेकिन अभी तक फाइलों का कुछ पता नहीं चला है। पुलिस सूत्रों ने ये भी बताया कि ये सभी केस फाइलें, पुलिस रिकॉर्ड, अदालत के रिकॉर्ड और ई-कोर्ट ऐप में खोजी गईं, लेकिन सफलता नहीं मिली।

जांच अधिकारियों पर लटकी कार्रवाई की तलवार

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने HT को बताया कि काफी कोशिशों के बाद भी फाइलों का कुछ पता नहीं चला है। इसलिए अब सभी संबंधित जांच अधिकारियों को बुलाया गया है। ताकि वे इस मामले में अपनी जानकारी दें। अब जांच अधिकारियों से पूछा जाएगा कि फाइलें कैसे गायब हो गईं। अगर फाइलें नहीं मिलीं तो मजबूरन प्रशासनिक कार्रवाई करनी होगी। यह मामला जांच अधिकारियों द्वारा सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग का माना जाएगा। इसके लिए जवाबदेही तय करने के लिए गहन जांच की जरूरत है। यह फाइलें पुलिस रिकॉर्ड के लिए बहुत जरूरी हैं। फिलहाल अज्ञात लोगों पर आपराधिक विश्वासघात का मुकदमा दर्ज कराया गया है।

FIR में क्या लिखा गया?

इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी की तहरीर पर मामले में FIR दर्ज की गई है। इसमें लिखा गया है "सरकारी काम के उद्देश्य से यह प्रस्तुत किया जाता है कि पुलिस स्टेशन के रिकॉर्ड की जांच के बाद यह पाया गया है कि 47 चार्जशीट, 544 अनट्रेस रिपोर्ट और 92 कैंसिलेशन फाइलों समेत कुल 680 जरूरी दस्तावेज मालखाने से गायब हैं। इन सभी फाइलों को न्यायिक कार्रवाई के लिए संबंधित अदालतों को भेजने के लिए संबंधित जांच अधिकारियों के लिए जारी किया गया था। इनकी RC यानी रसीद/रिकॉर्ड थाने में मौजूद है।"

क्या हो सकती है कार्रवाई?

अगर किसी पुलिस स्टेशन से कोई जरूरी दस्तावेज गायब हो जाता है तो यह एक बहुत गंभीर अपराध है। ऐसे में दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाती है, क्योंकि यह सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सबूत मिटाने जैसा है। सबसे पहले दस्तावेज के गायब होने की एफआईआर (FIR) दर्ज की जाती है, जिसके बाद एक विभागीय जांच शुरू होती है। इस जांच में यह पता लगाया जाता है कि क्या यह गलती से हुआ, लापरवाही थी या जानबूझकर किया गया कृत्य था। जांच में दोषी पाए जाने पर, पुलिस अधिकारी को निलंबित किया जा सकता है या नौकरी से निकाला जा सकता है।

इन धाराओं के तहत की जाती है कार्रवाई

ऐसे मामलों को भारतीय दंड संहिता (IPC) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत देखा जाता है। दस्तावेज गायब करने वाले पुलिस अधिकारी पर आईपीसी की धारा 201 (सबूत मिटाना) और धारा 409 (भरोसे का आपराधिक उल्लंघन) के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है। इन धाराओं के तहत, दोषी को 7 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है। यदि यह साबित हो जाता है कि दस्तावेज़ किसी रिश्वत या भ्रष्टाचार के मकसद से गायब किया गया था, तो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी कार्रवाई होती है, जिसमें और भी कड़ी सजा का प्रावधान है। यह कार्रवाई सुनिश्चित करती है कि कानून और न्याय व्यवस्था की पवित्रता बनी रहे।

Updated on:
22 Sept 2025 11:27 am
Published on:
22 Sept 2025 11:27 am