
अजित डोभाल के बीजिंग दौरे पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने सवाल उठाए। (फोटो सोर्स-IANS)
Ajit Doval China Visit: भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर एक बार फिर बातचीत शुरू होने जा रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल सोमवार को चीन की राजधानी बीजिंग पहुंच गए हैं। मंगलवार को वह चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों की 25वें दौर की बैठक में हिस्सा लेंगे।
डोभाल की यह यात्रा ऐसे समय हुई है, जब भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ समय से सुधार की कोशिश चल रही है। दोनों देश सीमा पर तनाव कम करने और बातचीत के जरिए आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन डोभाल के चीन पहुंचते ही भारत में सियासी बयानबाजी भी शुरू हो गई।
कांग्रेस नेता और सांसद पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार की चीन नीति पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद सुलझाने के लिए जो विशेष प्रतिनिधि व्यवस्था बनाई गई थी, उसका मकसद सिर्फ सीमा पर तनाव को संभालना नहीं, बल्कि विवाद का समाधान निकालना था।
खेड़ा ने सवाल उठाया कि आखिर बातचीत अब सीमा विवाद के स्थायी समाधान की जगह सिर्फ स्थिति को संभालने तक क्यों सीमित होती जा रही है।
उन्होंने 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प का भी जिक्र किया और उस समय सरकार के रुख पर सवाल उठाए। कांग्रेस का कहना है कि लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश से जुड़े सीमा मुद्दों पर सरकार को अपनी स्थिति देश के सामने साफ रखनी चाहिए।
कांग्रेस के आरोपों पर बीजेपी विधायक राम कदम ने केंद्र सरकार का बचाव किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने दुनिया के कई देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत किए हैं।
कदम ने भारत की आर्थिक ताकत का भी जिक्र किया और कहा कि आज भारत की दुनिया में पहले के मुकाबले ज्यादा मजबूत स्थिति है। उनके मुताबिक, दूसरे देशों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना भारत के हित में है।
अजित डोभाल भारत की ओर से और वांग यी चीन की ओर से सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधि हैं। दोनों देशों ने इस स्तर की बातचीत के लिए यह व्यवस्था शुरू की थी, ताकि सीमा विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सीधे उच्चस्तर पर बातचीत हो सके।
मंगलवार को होने वाली 25वें दौर की बातचीत में सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ तनाव कम करने के तरीकों पर चर्चा हो सकती है। दोनों देशों के बीच 2020 के गलवान विवाद के बाद लंबे समय तक तनाव की स्थिति रही है।
अब नजर इस बात पर है कि बीजिंग में होने वाली बातचीत सिर्फ रिश्तों को सामान्य करने तक सीमित रहती है या सीमा विवाद को लेकर कोई ठोस रास्ता भी निकलता है। यही वजह है कि डोभाल की इस यात्रा पर भारत में राजनीतिक दलों से लेकर आम लोगों तक की नजर बनी हुई है।
Updated on:
24 Aug 2026 04:01 pm
Published on:
24 Aug 2026 04:01 pm
