PF latest News in Hindi : कई कंपनियों द्वारा कर्मचारियों का पीएफ न देने के मामले सामने आने के बाद ईपीएफओ सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है।
PF latest News in Hindi : अभी भी कई ऐसी कंपनियां संचालित हो रही हैं जो अपने कर्मचारियों को पीएफ नहीं दे रही हैं। इन कंपनियों पर कार्रवाई करने के लिए अब कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) कमर कसती हुई दिखाई दे रही है। नए नियम के अनुसार, पीएफ हड़पने वाली कंपनियों की जांच सीधे ईपीएफओ नहीं कर सकती है, इसलिए इस मामले का केस बनाकर उच्च अधिकारियों के पास भेजा गया है। उनकी अनुमति मिलते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल, मिली जानकारी के अनुसार एनसीआर में आने वाले गुरुग्राम जिले में 30 से अधिक कंपनियों को चिह्नित किया गया है, जो अपने कर्मचारियों के पीएफ अंशदान को ईपीएफओ में जमा नहीं कराती हैं। इसके साथ ही दावा किया जा रहा है कि गुरुग्राम में लगभग 13 हजार उद्योग पंजीकृत हैं, जबकि सैकड़ों कंपनियां बिना पंजीकरण के ही संचालित की जा रही हैं। इन कंपनियों में हजारों कर्मचारी काम करते हैं, जिनका पीएफ जमा नहीं किया जाता। अब ऐसी कंपनियों पर लगाम लगाने के लिए कर्मचारियों की ओर से ही ईपीएफओ में शिकायत दर्ज कराई गई है। कर्मचारियों ने शिकायत के माध्यम से इन डिफॉल्ट करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं, सीधे तौर पर कंपनियों की जांच के नियमों में बदलाव होने के कारण उच्चाधिकारियों की मदद ली जा रही है।
भारत में कर्मचारी भविष्य निधि (PF) काटना उन सभी कंपनियों और संस्थानों के लिए अनिवार्य है, जहां 20 या उससे अधिक कर्मचारी काम करते हैं। ऐसी कंपनियों को EPFO (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) में पंजीकरण कराना होता है और अपने कर्मचारियों के वेतन से हर महीने पीएफ की राशि काटकर जमा करनी होती है। इसके तहत कर्मचारी की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) का 12% पीएफ में कटता है और उतना ही योगदान नियोक्ता को भी देना होता है। इसके अलावा, जिन कंपनियों में 20 से कम कर्मचारी हैं, वे चाहें तो स्वेच्छा से EPFO में पंजीकरण कराकर पीएफ की सुविधा दे सकती हैं। वहीं, जिन कर्मचारियों की मासिक बेसिक सैलरी 15,000 रुपये या उससे कम है, उनके लिए पीएफ काटना अनिवार्य होता है। 15,000 रुपये से अधिक वेतन वालों का पीएफ नियोक्ता और कर्मचारी की सहमति से काटा जा सकता है।
पीएफ यानी भविष्य निधि (Provident Fund) नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए एक बचत योजना है, जिसमें कर्मचारी की सैलरी से हर महीने एक निश्चित राशि काटी जाती है और उतनी ही राशि कंपनी भी अपने हिस्से के रूप में जमा करती है। यह राशि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के पास सुरक्षित रहती है और उस पर सरकार द्वारा तय ब्याज मिलता है। पीएफ का मुख्य उद्देश्य कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा देना है। इसके अलावा नौकरी छोड़ने, सेवानिवृत्ति, या शादी, इलाज और मकान खरीद जैसी जरूरतों के लिए इसमें से आंशिक या पूरी निकासी की सुविधा भी मिलती है।