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केरल: गठबंधनों की बिछी बिसात, ध्रुवीकरण की तैयारी

-भाजपा के बढ़ते जनाधार से तीन मोर्चों में सियासी संग्राम के आसार -आखिरी किला बचाने के लिए सीपीएम भी चल रही हिंदुत्व कार्ड शादाब अहमद नई दिल्ली। केरल विधानसभा चुनाव की परंपरागत तौर पर वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के बीच घूमने वाली सियासत अब त्रिकोणीय मुकाबले की ओर बढ़ती दिख […]

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-भाजपा के बढ़ते जनाधार से तीन मोर्चों में सियासी संग्राम के आसार

-आखिरी किला बचाने के लिए सीपीएम भी चल रही हिंदुत्व कार्ड

शादाब अहमद

नई दिल्ली। केरल विधानसभा चुनाव की परंपरागत तौर पर वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के बीच घूमने वाली सियासत अब त्रिकोणीय मुकाबले की ओर बढ़ती दिख रही है। भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए इस बार खुद को एक मज़बूत तीसरे विकल्प के तौर पर स्थापित करने की कोशिश में जुटा है। ऐसे में सत्ताधारी सीपीएम के सामने न केवल सत्ता में वापसी, बल्कि देश में अपना एकमात्र शासित राज्य बचाए रखने की बड़ी चुनौती है। इसके लिए सीपीएम ने भाजपा की राह पर चलते हुए हिंदुत्व कार्ड चल कर ध्रुवीकरण की सियासत को आगे बढ़ा दिया है।

एलडीएफ: सत्ता विरोधी लहर से पार पाने की जद्दोजहद

मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व में एलडीएफ लगातार दूसरे कार्यकाल में है। केरल की राजनीति में यह अपवाद ही रहा है कि कोई गठबंधन लगातार दो बार सत्ता में लौटे। हालांकि एलडीएफ सरकार ने बाढ़, कोरोना और आर्थिक संकट जैसे मुद्दों पर प्रशासनिक सख्ती और कल्याणकारी योजनाओं के जरिए अपनी छवि मजबूत करने की कोशिश की है, लेकिन सत्ता विरोधी माहौल, भ्रष्टाचार के आरोप और आंतरिक असंतोष उसके लिए बड़ी बाधा बन सकते हैं। सीपीएम के लिए यह चुनाव महज़ एक राज्य की सत्ता का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने का भी सवाल है। यही वजह है कि केरल में कांग्रेस के परंपरागत जनाधार रहे बहुसंख्यक हिंदू समुदाय में माकपा ने घुसपैठ की रणनीति बनाई है। इसके तहतसीपीएम के कुछ नेता बयान दे रहे हैं कि यदि यूडीएफ चुनाव जीतती है तो मुस्लिम लीग प्रभावी रूप से राज्य का संचालन करेगी। खुद मुख्यमंत्री विजयन भी कांग्रेस और गांधी परिवार पर जमात-ए-इस्लामी का समर्थन लेने का आरोप लगा चुके हैं।

यूडीएफ: वापसी की रणनीति, कांग्रेस पर टिकी निगाहें

लोकसभा चुनाव 2024 के बाद स्थानीय निकाय चुनाव में मिली अच्छी जीत से कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ सत्ता में जोश का माहौल है। यही वजह है कि वापसी के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है। कांग्रेस की कोशिश है कि स्थानीय मुद्दों, बेरोजग़ारी, महंगाई और शासन से जुड़ी विफलताओं को चुनावी हथियार बनाया जाए। हालांकि पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर सवाल बने हुए हैं। सांसद शशि थरूर के बयान चर्चा में है। जबकि नेतृत्व को लेकर कई नेता अपना दाव ठोक रहे हैं। लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी खुद सक्रिय है। केरल में संगठन की समस्या निपटने के लिए स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष वरिष्ठ नेता मधुसूदन मिस्त्री को बनाया है तो वरिष्ठ पर्यवेक्षक के तौर पर सचिन पायलट को भेजा है।

एनडीए: गुजरात की तर्ज पर केरल जीत का मॉडल

लोकसभा चुनाव में भाजपा का वोट करीब 20 फीसदी तक पहुंचा और हाल में तिरुवनंतपुरम नगर निगम में अपनी ऐतिहासिक जीत हासिल की। पिछली दिनों केरल का दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस जीत की तुलना 1987 में गुजरात के अहमदाबाद नगर निगम की जीत से की। उन्होंने कहा कि अहमदाबाद में मिली जीत के बाद भाजपा ने कभी गुजरात में मुडक़र नहीं देखा। इसी तर्ज पर केरल में इतिहास दोहराने की तैयारी भाजपा कर रही है। गृह मंत्री अमित शाह भी कह चुके हैं 20 फीसदी वोट 40 फीसदी बदलने में देर नहीं लगती है। भाजपा धार्मिक ध्रुवीकरण, विकास और केंद्र सरकार की योजनाओं को ज़मीन पर उतारने के साथ अपने सहयोगी दलों के गठबंधन से कर रही है। हाल में ट्वेंटी-20 पार्टी को एनडीए में शामिल करवाया गया है। हालांकि पिछले दिनों इसाई समुदाय के गिरजाघरों पर हमले से भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी होती दिख रही है।

2021 के विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन

कुल सीटें-140

गठबंधनजीती सीटेंवोट प्रतिशत
एलडीएफ 99 45.43
यूडीएफ 41 39.47
एनडीए 0 12.41

2024 लोकसभा चुनाव नतीजे

कुल सीटें-20

गठबंधनजीती सीटेंवोट प्रतिशत
एलडीएफ 1 33.60
यूडीएफ 18 45.21
एनडीए 1 19.24