UGC Controversy: यूजीसी मामले में सुप्रीम कोर्ट की रोक के खिलाफ पिछड़े और अति पिछड़े वर्गों में नाराजगी देखी जा रही है। जेएनयू और दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किए, जबकि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
UGC Controversy: यूजीसी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है, जिसको लेकर पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग के लोगों के द्वारा इस फैसले का विरोध किया जा रहा है। चार दिन पहले दिल्ली के जेएनयू में ब्राह्मण विरोधी नारे लगाए गए और मंगलवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों ने भी जमकर विरोध किया। छात्रों का विरोध प्रदर्शन हिंसात्मक न हो इसके लिए भारी मात्रा में वहां पर पुलिस बल तैनात है।
आपको बता दें कि नए यूजीसी के नियम को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय के अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों के साथ उनके समर्थकों ने यूजीसी के नए नियम 2026 को लागू करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने “यूजीसी रेगुलेशन लागू करो” और “जय भीम” जैसे नारे लगाए। छात्रों का कहना था कि नए नियमों के लागू होने से उच्च शिक्षा में समानता और अवसर सुनिश्चित होंगे, जबकि इसे टालना या रोकना सामाजिक न्याय की भावना के खिलाफ है।
गौरतलब है कि चार दिन पहले जवाहर लाल नेहरु के साबरमती हॉस्टल के बाहर छात्रों ने जमकर बवाल काटा था। इसके साथ ही जेएनयू के छात्रों ने यूजीसी के नए नियमों पर लगी रोक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें ब्राह्मणवाद का प्रतीकात्मक पुतला भी फूंका गया। इस दौरान छात्रों ने “सामंती ब्राह्मणवादी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे” और “बीजेपी सरकार की असलियत सामने लाओ” जैसे नारे लगाए। प्रदर्शन स्थल पर लगाए गए कुछ बैनरों में आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल की भी चर्चा सामने आई, जिसे लेकर विवाद की स्थिति बन गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों को लेकर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने जनवरी 2026 से लागू हुए UGC Promotion of Equity Regulations, 2026 पर फिलहाल रोक लगा दी है और कहा है कि जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक 2012 के पुराने नियम ही लागू रहेंगे। कोर्ट का कहना है कि नए नियम साफ नहीं हैं और इनके गलत इस्तेमाल की संभावना है, जिससे समाज में बंटवारा बढ़ सकता है। इसी वजह से अदालत ने सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को तय की है।