AIMIM Delhi: दिल्ली में AIMIM विवादों में घिर गई है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शोएब जामई पर आरोप है कि उन्होंने मृतकों के नाम पर सोशल मीडिया के जरिए चंदा जुटाया, लेकिन पीड़ितों तक मदद नहीं पहुंची। मामले की शिकायत पुलिस तक पहुंच गई है।
AIMIM Delhi: देश की राजधानी दिल्ली में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) एक बार फिर से विवादों में है। इस बार किसी नेता का भड़काऊ बयान, या किसी को लेकर आपत्तिजनक बयान नहीं दिया गया, बल्कि इस पर पार्टी पर मुर्दों के नाम पर चंदा खाने का आरोप लगा है। दरअसल, पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष शोएब जामई एक गंभीर विवाद के केंद्र में आ गए हैं, जहां उन पर मृतकों की आड़ में सोशल मीडिया के माध्यम से चंदा उगाही करने के संगीन आरोप लगे हैं। पीड़ितों का दावा है कि उनके नाम पर फंड तो जुटाया गया, लेकिन सहायता राशि उन तक कभी नहीं पहुंची।
आपको बता दें कि यह पूरा विवाद 7 मार्च को चांदनी चौक के कबाड़ व्यापारी मोहम्मद अरीब की हत्या के बाद उपजा। इस दुखद घटना के तुरंत बाद, शोएब जामई अपने साथियों के साथ शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देने उनके घर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि मुलाकात के दौरान एक वीडियो रिकॉर्ड किया गया, जिसे बाद में जामई के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से सार्वजनिक कर दिया गया। हैरानी की बात तब सामने आई जब उस वीडियो के साथ चंदा जुटाने के लिए एक QR कोड भी चस्पा पाया गया। पीड़ित परिवार का स्पष्ट दावा है कि वह कोड 'सादिया फातिमा' नामक किसी अज्ञात महिला के खाते से जुड़ा था, जिससे उनका दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है। परिवार ने यह भी साफ किया कि इस तरह की किसी भी आर्थिक मदद या फंड जुटाने की मुहिम के बारे में उनसे न तो अनुमति ली गई और न ही उन्हें कोई पूर्व सूचना दी गई थी।
मृतक अरीब के भाई, मोहम्मद अदीब ने 19 मार्च को सेंट्रल दिल्ली के डीसीपी कार्यालय में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। इस लिखित शिकायत में उन्होंने शोएब जामई पर बेहद संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि उनके परिवार की संवेदनशीलता और बिना किसी पूर्व अनुमति के उनके भाई की मौत को चंदा जुटाने का जरिया बनाया गया। अदीब के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल किए गए उस संदिग्ध QR कोड के माध्यम से करीब 7 से 8 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि एकत्रित की गई है। परिजनों ने इसे न केवल एक भ्रामक कृत्य करार दिया, बल्कि एक शोकाकुल परिवार की मजबूरी का अनुचित लाभ उठाने की कोशिश भी बताया।