
Aircraft Maintenance: एयर इंडिया का बोइंग 787 बेड़ा अब डिजिटल मैनेज होने वाला है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने एयर इंडिया के बोइंग 787 बेड़े के लिए इलेक्ट्रॉनिक टेक्निकल लॉगबुक (ETL) को मुख्य टेक्निकल डॉक्यूमेंट के तौर पर इस्तेमाल करने और बोइंग 777 बेड़े में भी इसे लागू करने की अनुमति दे दी है।
इससे ऑपरेशनल परफॉर्मेंस, सुरक्षा, विश्वसनीयता और सस्टेनेबिलिटी को मजबूत करने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने की एयर इंडिया की प्रतिबद्धता को बढ़ावा मिलेगा। वहीं एयर इंडिया एक टेक्नोलॉजी-सक्षम, आधुनिक ग्लोबल एयरलाइन के तौर पर स्थापित होगी।
डीजीसीए से मंजूरी मिलने के साथ ही एयर इंडिया अपने पूरे B787 वाइडबॉडी बेड़े में इलेक्ट्रॉनिक टेक्निकल लॉगबुक अपनाने वाली पहली एयरलाइनों में से एक बन गई है, जिससे पूरे बेड़े में ETL लागू हो गया है। इलेक्ट्रॉनिक टेक्निकल लॉगबुक पारंपरिक पेपर-आधारित मेंटेनेंस रिकॉर्ड की जगह एक सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म लेती है, जिससे एयरक्राफ्ट के मेंटेनेंस और इंजीनियरिंग गतिविधियों का प्रबंधन तेजी से और ज़्यादा सटीक व कुशल तरीके से हो पाता है।
इस डिजिटल सिस्टम से मेंटेनेंस इंजीनियरों और ऑपरेशनल टीमों के बीच रियल-टाइम जानकारी साझा करने की सुविधा मिलेगी, जिससे सभी टीमों के बीच तालमेल बेहतर होता है। खराबी की रिपोर्टिंग और उसे ठीक करने की प्रक्रिया तेज होती है और एयरक्राफ्ट के डिस्पैच की विश्वसनीयता बढ़ती है।
ETL प्लेटफॉर्म बेहतर डेटा इंटीग्रिटी, ट्रेसेबिलिटी और रेगुलेटरी अनुपालन भी सुनिश्चित करता है, साथ ही एडवांस्ड एनालिटिक्स भी देता है जो प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस और इंजीनियरिंग से जुड़े सही फैसले लेने में मदद करते हैं। इसके अलावा, पेपरलेस सिस्टम कागज की खपत को काफी कम करता है, जो एयर इंडिया के सस्टेनेबिलिटी लक्ष्यों में मदद करेगा।
एयर इंडिया के इंजीनियरिंग और मेंटेनेंस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट जेरेमी यू जिन किट ने कहा कि हमारे वाइडबॉडी बोइंग बेड़े में इलेक्ट्रॉनिक टेक्निकल लॉगबुक को लागू करना इंजीनियरिंग, फ्लाइट ऑपरेशन्स, डिजिटल टेक्नोलॉजी टीमों, OEM पार्टनर्स और रेगुलेटर के बीच मिलकर किए गए काम को फिर से साबित करता है।
पेपर-आधारित प्रक्रियाओं को रियल-टाइम डिजिटल जानकारी से बदलकर, हम ऑपरेशनल दक्षता में सुधार कर रहे हैं, मेंटेनेंस गवर्नेंस को मजबूत कर रहे हैं, रेगुलेटरी अनुपालन को बेहतर बना रहे हैं और अपनी इंजीनियरिंग और ऑपरेशन्स टीमों में त्वरित फैसले लेने में सक्षम हो रहे हैं।