
Mahanadi Water Dispute: ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद को सुलझाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य दोनों राज्यों के बीच महानदी के पानी को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद पर चर्चा करना और इसके समाधान के रास्ते तलाशना है।
दिल्ली रवाना होने से पहले रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि दोनों राज्य इस विवाद पर केंद्रीय जल आयोग (CWC) के फैसले को स्वीकार करने के लिए सहमत हैं। उन्होंने कहा कि महानदी के पानी को लेकर ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच कई वर्षों से विवाद चला आ रहा है और इसी मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में बैठक हो रही है। साय ने कहा कि दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने CWC को पत्र लिखकर कहा है कि राज्यों के हित में आयोग जो भी फैसला करेगा, हम दोनों उसे स्वीकार करेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों में बीजेपी की सरकार होने के कारण इस मुद्दे पर समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर है।
इससे पहले 31 अगस्त को महानदी विवाद के समाधान की दिशा में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्य सचिवों तथा जल संसाधन विभाग के सचिवों ने नई दिल्ली में बैठक की थी। आधिकारिक बयान के अनुसार, बैठक में दोनों राज्यों के लोगों के हित में आपसी सहमति से समाधान निकालने की जरूरत पर जोर दिया गया था।
वहीं, 24 जुलाई को ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने महानदी विवाद को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की थी। उन्होंने केंद्र के सहयोग से आपसी बातचीत के जरिए विवाद का समाधान निकालने पर जोर दिया था। बैठक में राज्य के महाधिवक्ता और विकास आयुक्त समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
महानदी जल विवाद को लेकर ओडिशा सरकार ने 2016 में अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 की धारा 3 के तहत केंद्र सरकार के सामने शिकायत दर्ज कराई थी। ओडिशा ने केंद्र से इसी कानून की धारा 4(1) के तहत महानदी और उसके बेसिन से जुड़े जल विवाद के निपटारे के लिए एक ट्रिब्यूनल गठित करने की मांग की थी। यह विवाद महानदी के पानी के बंटवारे और उसके इस्तेमाल को लेकर ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच लंबे समय से चला आ रहा है।