
Avadh Ojha statement: आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और चर्चित शिक्षक अवध ओझा का एक बयान इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान उन्होंने देश की राजनीति, पाकिस्तान, लोकतंत्र और मुसलमानों को लेकर कई ऐसी बातें कहीं, जिन पर अब राजनीतिक बहस तेज हो गई है। खास तौर पर उनका यह बयान सबसे ज्यादा चर्चा में है कि 'देश के 22 करोड़ मुसलमान मोदी सरकार गिराने के लिए नमाज पढ़ रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा।'
यह टिप्पणी उन्होंने एक यूट्यूब पॉडकास्ट में ऑपरेशन सिंदूर और देश के मौजूदा राजनीतिक माहौल पर पूछे गए सवाल के जवाब में की। बातचीत के दौरान ओझा ने कहा कि नेताओं को जनता से तालियां बटोरने का तरीका अच्छी तरह पता है। उनके मुताबिक अगर कोई नेता आर्थिक मुद्दों या राष्ट्रीय आय पर भाषण दे तो लोगों की दिलचस्पी कम रहती है, लेकिन जैसे ही पाकिस्तान का जिक्र होता है, भीड़ उत्साह के साथ तालियां बजाने लगती है।
ओझा ने कहा कि आज हमारे देश में पाकिस्तान और मुसलमानों के नाम पर राजनीति चमकाना बहुत आसान हो गया है। उनका मानना है कि भारत को पाकिस्तान जैसे कमजोर देश से उलझकर अपनी ताकत बर्बाद नहीं करनी चाहिए, बल्कि चीन जैसे बड़े और ताकतवर देशों से मुकाबला करने पर ध्यान देना चाहिए। इसी दौरान उन्होंने मुसलमानों का जिक्र करते हुए व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि करोड़ों लोग नमाज पढ़ रहे हैं, लेकिन सरकार नहीं बदल रही। उन्होंने इसे लेकर तंज कसते हुए कहा कि शायद उन्हें खुद समझ नहीं आ रहा कि आखिर उनकी दुआ क्यों कबूल नहीं हो रही।
पॉडकास्ट में अवध ओझा ने अपनी चुनावी हार पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वह खुद को हारा हुआ उम्मीदवार नहीं मानते, बल्कि "रनर" मानते हैं। उनका दावा था कि पटपड़गंज सीट पर चुनाव लड़ने के दौरान शुरुआत में पार्टी के कई कार्यकर्ता नाराज थे, लेकिन उन्होंने सभी के घर जाकर मुलाकात की और धीरे-धीरे उनका भरोसा जीत लिया।
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी हार का सबसे बड़ा कारण उनके प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चुनाव प्रचार था। ओझा के मुताबिक प्रधानमंत्री के प्रचार और उनके सार्वजनिक व्यवहार का स्थानीय मतदाताओं पर असर पड़ा, जिससे चुनावी समीकरण बदल गए। उन्होंने यह भी बताया कि शुरुआत में कई लोगों ने उन्हें चुनाव नहीं लड़ने की सलाह दी थी और यहां तक कहा था कि उनकी जमानत भी जब्त हो सकती है, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने मैदान नहीं छोड़ा।
अवध ओझा के इस पूरे बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग उनके बयान को राजनीतिक व्यंग्य बता रहे हैं, जबकि कई यूजर्स इसे विवादित और भड़काऊ करार दे रहे हैं। फिलहाल इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा लगातार जारी है।