विपक्ष के विरोध के बावजूद सीबीआई और ईडी प्रमुखों का कार्यकाल बढ़ाने वाला विधेयक आज लोकसभा में पास हो गया है। इस विधेयक का उद्देश्य सीबीआई और ईडी प्रमुखों का कार्यकाल 2 साल से बढ़ाकर 5 साल करना है।
नई दिल्ली। विपक्ष के विरोध के बावजूद सीबीआई और ईडी प्रमुखों का कार्यकाल बढ़ाने वाला विधेयक आज लोकसभा में पास हो गया है। अब सरकार इसे राज्यसभा में पास कराने पर जोर देगी। बता दें कि इस विधेयक का उद्देश्य सीबीआई और ईडी प्रमुखों का कार्यकाल 2 साल से बढ़ाकर 5 साल करना है। संसद में यह विधेयक पेश करते हुए सरकार ने सीबीआई और ईडी प्रमुखों का कार्यकाल बढ़ाने के फायदे और उद्देश्य बताया। लोक शिकायत, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा कि इस विधेयक को लाने का मकसद यह है कि इससे जुड़े मुद्दों का वृहद अंतरराष्ट्रीय प्रभाव है क्योंकि विदेशी धनशोधन के मामले जुड़े होते हैं। इसके साथ ही उन्होंने इस मुद्दों को लेकर विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।
सरकार ने बताया यह क्यों है जरूरी
जितेन्द्र सिंह ने कहा कि वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) ने भी यह सुझाव दिया है कि देशों को अपनी क्षमताओं को बढ़ाना चाहिए। इसके साथ ही एजेंसियों में उच्च मानदंडों को स्थापित करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि अगर हमें उच्च वैश्विक मानदंडों को पूरा करना है तब हमारी दृष्टि आगे की ओर बढ़ने वाली होनी चाहिए।
विपक्ष पर भी साधा निशाना
इस दौरान उन्होंने विपक्ष द्वारा इस विधेयक पर दी जा रही प्रतिक्रियाओं को लेकर हमला किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग विधेयक को पढ़े बिना ही निष्कर्ष पर पहुंच गए हैं, जो बिल्कुल अच्छी आदत नहीं है। इस विधेयक देश हित के लिए है। ऐसे में बिना विधेयक को पढ़कर किसी निष्कर्ष पर न पहुंचें, वहीं इस मुद्दे पर लोगों को भ्रमित न करें।
जितेन्द्र सिंह ने कहा कि अभी तक कानून में कार्यकाल के संबंध में केवल न्यूनतम सीमा तय थी और कार्यकाल को लेकर कोई अधिकतम सीमा तय नहीं की गई थी। अब हमने इसकी सीमा 5 वर्ष तय कर दी है। केंद्रीय मंत्री ने देश की अन्य एजेंसियों का जिक्र करते हुए कहा कि देश की अन्य एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों के कार्यकाल की सीमा 2 वर्ष नहीं है।
बता दें कि सीबीआई और ईडी के प्रमुखों का कार्यकाल बढ़ाने को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार एजेंसियों को अपने काबू में करना चाहती है। ऐसे सरकार जांच एजेंसियों के प्रमुखों पर दबाव बनाएगी। ये देश के लिए अच्छा नहीं है। किसी भी लोकतंत्र में जांच एजेंसियां जांच के लिए स्वतंत्र होनी चाहिए।