
प्रतीकात्मक तस्वीर
LPG Price Hike: गैस के बढ़ते दामों का असर अब दिल्ली में भी दिखने लगा है। बढ़ते दामों की वजह से लोगों की परेशानियां बढ़ गईं हैं। खासकर प्रवासी मजदूर, ठेले वाले और कम कमाने वाले लोग हर दिन खर्च बढ़ने से परेशान हैं। जो गैस पहले उनके लिए सहारा थी, अब वही भारी लगने लगी है। दो वक्त का खाना भी उनके लिए लग्जरी हो गया है। लोगों की कमाई कम है और खर्च ज्यादा, ऐसे में घर चलाना मुश्किल हो रहा है, इसलिए लोग मजबूरी में फिर से पुराने तरीके अपनाने लगे हैं।
नई दिल्ली के प्रेम नगर में रहने वाले 25 साल के चंदन पोद्दार जैसे कई मजदूर अब महीने का हिसाब लगाते-लगाते परेशान हो रहे हैं। चंदन ने बताया कि उनकी कमाई करीब 18 हजार रुपये है और वे नौ लोगों के साथ एक कमरे में रहते हैं। पहले 5 किलो का सिलेंडर लगभग 10 दिन चल जाता था, लेकिन अब दाम बढ़ने के बाद यह खर्च संभालना मुश्किल हो गया है। अब हर बार गैस भरवाना उनके लिए टेंशन बन गया है। लोगों को पहले 5 किलो का सिलेंडर सस्ता और आसानी से मिल जाता था, इसलिए गरीब परिवार उसी से काम चला लेते थे। लेकिन अब दाम बढ़ने से यह विकल्प भी खत्म होता जा रहा है और लोगों को दूसरे रास्ते ढूंढने पड़ रहे हैं।
शुक्रवार को पश्चिम एशिया के संकट की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा के दाम बढ़ गए, जिसका असर एलपीजी पर भी पड़ा। कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में करीब 47.8% की बड़ी बढ़ोतरी हुई है। 19 किलो का सिलेंडर जो पहले करीब 2,078 रुपये में मिलता था, अब 3,071 रुपये तक पहुंच गया है। इसी के साथ 5 किलो वाला छोटा सिलेंडर भी महंगा हो गया है, जिससे आम लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।
दिल्ली के कई इलाकों में अब लोग गैस छोड़कर फिर से लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने लगे हैं। चिल्ला खादर और अन्य बस्तियों में यह बदलाव साफ दिखाई दे रहा है। कई घरों में गैस सिलेंडर बिना इस्तेमाल के पड़े हैं, जबकि चूल्हों पर खाना बन रहा है। यह बदलाव बताता है कि लोग मजबूरी में सस्ते विकल्प चुन रहे हैं।
महंगी गैस का असर अब लोगों की नौकरी, छोटे कारोबार और छात्रों की जिंदगी पर भी साफ दिखने लगा है। कई जगह काम के साथ मिलने वाली खाने की सुविधा बंद हो गई है, जिससे लोगों का खर्च बढ़ गया है। स्ट्रीट वेंडर्स का गैस पर खर्च बढ़ने से कमाई पर असर पड़ रहा है और उन्हें दाम बढ़ाने का डर है। वहीं PG चलाने वालों और छात्रों को गैस की कमी के कारण इंडक्शन जैसे विकल्प अपनाने पड़ रहे हैं, जिससे उन पर आर्थिक दबाव और बढ़ रहा है।
Published on:
02 May 2026 10:13 am
