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मिडिल ईस्ट संकट के बीच Chabahar Port भारत के लिए कितना अहम, कई मिलियन डॉलर है इसकी लागत

ईरान में तनाव और अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच भारत चाबहार पोर्ट पर काम कर रहा है। यह प्रोजेक्ट पाकिस्तान को बाईपास कर अफगानिस्तान, मध्य एशिया, रूस और यूरोप तक सस्ता व तेज व्यापार मार्ग देता है। जानिए इसकी रणनीतिक अहमियत और भारत का अब तक का निवेश।

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भारत

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Anurag Animesh

May 02, 2026

Chabahar Port

Chabahar Port

Why Chabahar Port Is Important For India: ईरान-अमेरिका युद्ध में रोजाना नए अपडेट सामने आ रहे हैं। सीजफायर होने के बावजूद ट्रंप और ईरानी लीडर के बीच जुबानी जंग जारी है। भारत इस पूरे प्रकरण में किसी भी तरफ नहीं झुकने की निति अपना रहा है। भारत के अपनी कई हित दोनों दशों के साथ हैं। उसमें एक बड़ा जरुरी दांव है, चाबहार बंदरगाह। भारत चाबहार बंदरगाह को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता करने को तैयार नहीं है। भारत अपने प्रोजेक्ट को लेकर आगे बढ़ रहा है। भारत के लिए यह प्रोजेक्ट कई मायनों में अहम है।

पाकिस्तान को पूरी तरह दरकिनार करने वाला रास्ता


चाबहार बंदरगाह से भारत के लिए सबसे बड़ा फायदा यही है कि यह रास्ता पाकिस्तान पर निर्भरता खत्म करता है। सालों से पाकिस्तान ने भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक जमीनी रास्ता देने से मना किया है। ऐसे में चाबहार बंदरगाह भारत के लिए एक वैकल्पिक दरवाजा बनकर सामने आया। इस पोर्ट के जरिए भारत सीधे समुद्री रास्ते से ईरान पहुंचता है और वहां से सड़क और रेल नेटवर्क के माध्यम से अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सामान भेज सकता है। यानी बिना किसी राजनीतिक अड़चन के व्यापार का रास्ता खुल जाता है।

यूरोप और रूस तक सस्ता और तेज कनेक्शन


चाबहार सिर्फ क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार में भी भारत की स्थिति मजबूत करता है। यह पोर्ट International North-South Transport Corridor का अहम हिस्सा है, जो भारत को ईरान, रूस और यूरोप से जोड़ता है। इस रूट का फायदा साफ है, कार्गो पहुंचने में लगभग 15 दिन तक की बचत और लॉजिस्टिक्स लागत में करीब 30% तक कमी। यानी भारतीय सामान तेजी से और कम खर्च में यूरोप तक पहुंच सकता है, जिससे एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलता है।

अफगानिस्तान के लिए राहत का रास्ता


चाबहार का इस्तेमाल भारत ने सिर्फ व्यापार के लिए ही नहीं, बल्कि मानवीय सहायता के लिए भी किया है। जब अफगानिस्तान में हालात बिगड़े और पारंपरिक रास्ते बंद हो गए, तब भारत ने इसी पोर्ट के जरिए खाने का सामान, दवाइयां और राहत सामग्री भेजी। इससे भारत को एक संतुलन बनाए रखने में मदद मिली।

अब तक कितना निवेश कर चुका है भारत?


इस प्रोजेक्ट में भारत की दिलचस्पी सिर्फ रणनीतिक नहीं, बल्कि वित्तीय भी है। अब तक भारत करीब 500 मिलियन डॉलर की प्रतिबद्धता चाबहार पोर्ट के लिए बता चूका है। 120 मिलियन डॉलर का शुरुआती निवेश पूरा हो चुका है। जिसमें इससे पोर्ट पर आधुनिक उपकरण, मोबाइल क्रेन और कार्गो सिस्टम लगाए गए। 2024 में भारत-ईरान के बीच 10 साल का ऑपरेशन समझौता हुआ। अब भारत आगे लगभग 370 मिलियन डॉलर और निवेश करने की तैयारी में है, ताकि पोर्ट की क्षमता बढ़ाई जा सके और संचालन बिना रुकावट चलता रहे।