नई दिल्ली

गलती से मारा गया कारोबारी…कनॉट प्लेस में पीट-पीटकर हत्या के बाद आरोपियों को पता चली हकीकत तो उड़े होश

Shivam Gupta Murder Case: खौफनाक हत्या की यह वारदात न सिर्फ दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करती है कि मामूली कहासुनी और गलत पहचान किस तरह एक निर्दोष की जान ले सकती है। पुलिस ने मामले में अब दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

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Shivam Gupta Murder Case: राष्ट्रीय राजधानी के सबसे सुरक्षित इलाके कनॉट प्लेस में एक गलत पहचान की वजह से एक युवक की हत्या कर दी गई। यह वारदात एक महीने पहले की है। पुलिस ने सीसीटीवी और सर्विलांस सेल की मदद से आरोपियों को गिरफ्तार किया तो मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। आरोपियों के कबूलनामे पर जहां पुलिस कर्मियों के होश उड़ गए, वहीं मृतक के परिजन एक बार फिर गहरे सदमे में चले गए। पुलिस के अनुसार, दिल्ली के सबसे सुरक्षित इलाके कनॉट प्लेस में 2–3 जनवरी की दरम्यानी रात हुई एक दिल दहला देने वाली घटना में 36 साल के कारोबारी शिवम गुप्ता की मौत हो गई। पुलिस ने मामले में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

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दोस्तों के साथ पार्टी करने निकले थे शिवम

परिजनों के अनुसार, घटना वाली रात कारोबारी शिवम गुप्ता अपने दोस्तों के साथ पार्टी करने घर से निकले थे। इस दौरान तीन बाइक सवार युवकों ने उसे किसी और के धोखे में बेरहमी से पीटा। आरोपियों ने शिवम के सिर पर हेलमेट से ताबड़तोड़ वार किए। इसके बाद जब शिवम जमीन पर गिर गया तो उसके सीने को पैरों से कुचला गया। गंभीर रूप से घायल शिवम ने दो हफ्ते तक अस्पताल में जिंदगी और मौत से संघर्ष किया, लेकिन 19 जनवरी को उन्होंने दम तोड़ दिया। यह सनसनीखेज वारदात न सिर्फ राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करती है कि मामूली कहासुनी और गलत पहचान किस तरह एक निर्दोष की जान ले सकती है।

ई-ब्लॉक पार्किंग में छोड़कर फरार हुए आरोपी

परिजनों के अनुसार, शिवम को कनॉट प्लेस के ई-ब्लॉक पार्किंग क्षेत्र में लहूलुहान हालत में छोड़ दिया गया था। 6 जनवरी को पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 110 (गैर-इरादतन हत्या का प्रयास) और धारा 3(5) (सामान्य आशय) के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने अब दो और आरोपियों को भी हिरासत में लिया है। शिवम की मौत से पूरा परिवार सदमे में है। पिता अनिल कांत गुप्ता ने भावुक होते हुए कहा, "उसकी मौत ने हमारे जीवन में ऐसा खालीपन छोड़ दिया है, जो कभी नहीं भर पाएगा। उसकी मां पूरी तरह टूट चुकी हैं। बहन और जीजा भी इस सदमे से उबर नहीं पा रहे।"

गलत पहचान बनी मौत की वजह

पुलिस जांच और पूछताछ में सामने आया कि पकड़े गए तीन आरोपी डिलीवरी एग्जीक्यूटिव हैं। उन्होंने पूछताछ में बताया कि उनका एक दोस्त इलाके में खड़े एक व्यक्ति से पानी मांग रहा था। कथित तौर पर उस व्यक्ति ने उन्हें झिड़क दिया और गाली-गलौज की। इसी बात से नाराज होकर उसने अपने दोस्तों को बुलाया और बदला लेने के इरादे से वह बाइक से ई-ब्लॉक पहुंचे। मुख्य आरोपी ने वहां खड़े शिवम की ओर इशारा कर उसे वही व्यक्ति समझ लिया। इसके बाद हेलमेट से उनके सिर पर वार किया गया। शिवम के गिरते ही एक आरोपी बाइक से उतरा और उनके सीने पर बार-बार पैर रखकर कुचलता रहा। वारदात को अंजाम देने के बाद तीनों मौके से फरार हो गए।

आपराधिक रंजिश या दुश्मनी का एंगल नहीं

शिवम गुप्ता की मौत किसी पुरानी दुश्मनी या आपराधिक रंजिश का नतीजा नहीं थी। यह सिर्फ एक गलत पहचान थी, जिसने 36 साल के कारोबारी की जान ले ली। परिवार का कहना है कि आरोपी किसी और से बदला लेना चाहते थे, लेकिन निशाना बन गया शिवम, जो महज दोस्तों के साथ पार्टी से लौट रहा था। सवाल यह भी है कि अगर वह वही व्यक्ति होता, तब भी क्या इतनी बेरहमी जायज ठहराई जा सकती थी? यह मामला न सिर्फ एक परिवार की उजड़ी हुई दुनिया की कहानी है, बल्कि राजधानी में कानून-व्यवस्था और सड़क पर बढ़ती हिंसा पर भी एक बड़ा सवाल छोड़ जाता है।

परिवार को ऐसे मिली वारदात की खबर

पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर स्थित शिवम के घर में देर रात तक उनके न लौटने पर परिजन चिंतित हो गए। पिता ने बताया "हम लगातार फोन करते रहे, लेकिन मोबाइल बंद आ रहा था। कुछ देर बाद दोबारा कॉल किया तो एक पुलिसकर्मी ने फोन उठाया और बताया कि हमारा बेटा बेहोश हालत में खून से लथपथ पड़ा मिला है। अगले दिन पुलिस ने हमें सीसीटीवी फुटेज दिखाकर पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद 3 जनवरी को लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में शिवम को भर्ती कराया गया। जहां से गंभीर सिर की चोट को देखते हुए उन्हें आरएमएल अस्पताल रेफर कर दिया गया।"

सर्जरी के बाद भी नहीं बची जान

सीटी स्कैन में शिवम की खोपड़ी में कई फ्रैक्चर पाए गए। 4 जनवरी को उनकी सर्जरी की गई। डॉक्टरों ने 36 से 72 घंटे में होश में आने की उम्मीद जताई थी। पिता के अनुसार, 7 जनवरी को उसने कुछ मिनटों के लिए आंखें खोली थीं, लेकिन उसके बाद उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। आखिरकार 19 जनवरी को शिवम ने दम तोड़ दिया। परिवार ने शिवम को बेहद मिलनसार, शांत स्वभाव और मददगार इंसान बताया। वह अपने जीजा के साथ निर्माण व्यवसाय से जुड़े थे और जानवरों, खासकर कुत्तों से उन्हें बेहद लगाव था। पिता ने बताया कि शिवम ने आयरलैंड से खरीदा लैब्राडोर पाला था। भतीजे को डर लगने के कारण उन्होंने कुत्ते को बुलंदशहर में एक दोस्त के यहां शेल्टर दिलवाया, लेकिन हर हफ्ते उससे मिलने जरूर जाते थे।

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