Iran hostage Indian engineer: ईरान में बंधक बने गाजियाबाद के एक इंजीनियर ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि जहाज पर 250 गोलियां चलाई गईं और हर वक्त उनके सिर पर बंदूक तनी रहती थी। उन्होंने मौत के साए में बिताए उन खौफनाक पलों का खुलासा किया।
Iran hostage Indian engineer: मौत के साये में 109 दिन बीते और हर पल सिर पर बंदूकें तनी रहती थी। गाजियाबाद में साहिबाबाद के भोपुरा स्थित डीएलएफ कॉलोनी निवासी केतन मेहता के लिए पिछला कुछ समय किसी भयावह सपने जैसा रहा। दरअसल, मर्चेंट नेवी में 'एमटी वेलिएंट रोर' जहाज पर थर्ड इंजीनियर के पद पर तैनात केतन सोमवार को सुरक्षित अपने घर लौटे। मंगलवार को उन्होंने मीडिया के सामने ईरान की जेल और युद्ध के बीच बिताए उन खौफनाक दिनों की दास्तां बयां की।
केतन ने बताया कि यह संघर्ष 8 दिसंबर 2025 को शुरू हुआ, जब उनका जहाज अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में एक अन्य जहाज की मदद के लिए पहुंचा था। इसी दौरान इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के जवानों ने चेतावनी देते हुए उनके जहाज पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। केतन और उनके 15 साथियों को बंधक बना लिया गया और उनके फोन सहित सभी जरूरी सामान समुद्र में फेंक दिए गए।
शुरुआत में केतन को लगा कि यह कोई गलतफहमी है, इसलिए उन्होंने घर पर कुछ नहीं बताया। उन्हें 6 जनवरी 2026 तक जहाज के एक केबिन में ही कैद रखा गया। केतन बताते हैं, 'आलम यह था कि खाना खाते समय भी हमारे सिर पर बंदूकें तनी रहती थीं।' 6 जनवरी को उन्हें डीजल चोरी के आरोप में ईरान के बंदर अब्बास से औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
26 फरवरी को जमानत मिलने के बाद भारतीय दूतावास के अधिकारी उन्हें एक होटल ले गए, लेकिन मुसीबतें कम नहीं हुईं। केतन ने बताया कि होटल के पास ही ईरान का मुख्य नौसैनिक अड्डा था। युद्ध के दौरान वह अड्डा तबाह कर दिया गया और दिन भर होटल के आसपास मिसाइलें गिरती रहती थीं। धमाकों की गूँज के बीच हर पल मौत का अहसास होता था।
केतन की घर वापसी का सफर भी कम चुनौतीपूर्ण नहीं था। 21 मार्च को वह सड़क मार्ग से आर्मेनिया के लिए निकले, जहां से सऊदी अरब होते हुए 28 मार्च को मुंबई एयरपोर्ट उतरे। सोमवार को जब वह साहिबाबाद पहुंचे, तो परिवार की आंखों में खुशी के आंसू थे। उनकी मां रजनी ने बताया कि उन्होंने बेटे की सुरक्षित वापसी के लिए 'भैरो बाबा' से मन्नत मांगी थी, जिसे पूरा करने के लिए अब वे दिल्ली स्थित मंदिर जाएंगे।
केतन के पिता मुकेश मेहता ने राहत की सांस लेते हुए कहा कि बेटा अब क्या करेगा, यह उसका फैसला होगा, लेकिन अगले दो महीने उसे कहीं नहीं जाने देंगे। केतन ने भावुक होते हुए कहा, 'मैं दुआ करूंगा कि किसी की जिंदगी में ऐसे हालात कभी न आएं।'