Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक दिलचस्प घटना सामने आई, जब सीजेआई ने याचिकाकर्ता से अंग्रेजी की परीक्षा लेने की बात कही। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर परीक्षा में 30 नंबर भी आ गए तो मामले पर विचार किया जाएगा।
Supreme Court: देश के सर्वोच्च न्यायालय में कभी-कभी ऐसी घटनाएं हो जाती हैं, जो अक्सर खबरों की सुर्खियां और चर्चा का विषय बन जाती हैं। दरअसल, ऐसा ही एक और कोर्टरूम का दिलचस्प किस्सा सामने आया है। सुनवाई के दौरान अचानक सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई याचिकाकर्ता से अंग्रेजी की परीक्षा लेने की बात करने लगे। उन्होंने कहा कि इस परीक्षा में अगर 30 नंबर भी आ गए तो मामले को देखेंगे।
इतना ही नहीं, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने बताया कि उसने लुधियाना के एक सनातन धर्म स्कूल से पढ़ाई की है और वह 12वीं पास है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उससे कुछ ऐसे सवाल पूछे, जिनका प्रयोग याचिका के दौरान किया जाता है। कानूनी शब्दावली के ज्ञान को आंकने के लिए सीजेआई ने पूछा कि ‘कॉर्पोरेट दानदाताओं के लिए fiduciary risk’ का क्या मतलब है? इस सवाल का जवाब याचिकाकर्ता नहीं दे पाया, जिसके बाद यह साफ हो गया कि उसने जो याचिका दायर की है, वह किसी दूसरे वकील द्वारा तैयार की गई है।
याचिकाकर्ता पर नाराज हुए सीजेआई ने जब थोड़ा सख्ती से पूछा तो उसने बताया कि वह याचिका तैयार करने के लिए एआई टूल की मदद ली थी। उसने बताया कि एक टाइपिस्ट से दस्तावेज टाइप करवाए, जिसके लिए उसे प्रति घंटे 1000 रुपये का भुगतान किया गया। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि उसने टाइपिस्ट को चार जैकेट उपहार में दी थीं। इस पर न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है मानो सुप्रीम कोर्ट के किसी टाइपिस्ट ने ही यह याचिका तैयार की हो और उसे अदालत में पेश होने का निर्देश दिया गया। अदालत ने यह भी कहा कि याचिका में दिए गए तर्क अस्पष्ट और बेबुनियाद प्रतीत होते हैं तथा इसका स्वर किसी छोटे व्यापारी की सोच से मेल नहीं खाता।
हालांकि कोर्ट ने मामले में विस्तृत जांच के आदेश नहीं दिए, लेकिन याचिकाकर्ता को चेतावनी दी कि भविष्य में इस तरह की निरर्थक याचिकाएं दाखिल न की जाएं। इसके साथ ही कोर्ट ने नसीहत देते हुए कहा कि जाइए, अपने काम पर ध्यान दीजिए और स्वेटर बनाकर बेचिए। अगर इसी तरह की पीआईएल बार-बार दायर करते रहेंगे तो आपको भारी जुर्माना भी देना पड़ सकता है।